गुवाहाटी: 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड विशेष रिपोर्ट। क्रिकेट के मैदान पर कई बार कहानियां सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनमें संघर्ष, विवाद और पुनरुत्थान के अनछुए पहलू भी छिपे होते हैं। भारत और वेस्टइंडीज के बीच चल रही सीरीज में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब वेस्टइंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल ने मैदान पर उतरकर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। गुवाहाटी के मैदान पर उन्होंने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐतिहासिक और तूफानी शतक जड़ दिया।
टॉस का फैसला और भारतीय रणनीति की नाकामी
मैच की शुरुआत में जब भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह निर्णय इतना भारी पड़ेगा। पिच की नमी का फायदा उठाने की उम्मीद में उतरी भारतीय टीम को जॉन कैंपबेल के इरादों का अंदाजा नहीं था। कैंपबेल ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और भारतीय गेंदबाजों को मैच में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। उनके इस प्रहार के आगे कप्तान गिल की रणनीतियां ध धरी रह गईं।
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विवादों से घिरा अतीत: 22 महीने का कड़ा प्रतिबंध
यह शतक केवल रनों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह जॉन कैंपबेल के संघर्षपूर्ण अतीत की कहानी भी कहता है। कुछ समय पहले यही खिलाड़ी अनुशासन और नियमों के फेर में बुरी तरह फंस गया था। एंटी-डोपिंग टेस्ट के दौरान खून का नमूना न देने पर अड़ जाने के कारण उन पर भारी गाज गिरी थी। क्रिकेट जगत की नियामक संस्था ने उन पर 22 महीने का लंबा प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौर में ऐसा माना जा रहा था कि कैंपबेल का करियर लगभग समाप्त हो चुका है।
गुवाहाटी में ऐतिहासिक धमाका और रिकॉर्ड्स
प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद जब कैंपबेल ने मैदान पर कदम रखा, तो उनके भीतर एक अलग ही जिद्द साफ झलक रही थी। भारत के खिलाफ इस मुकाबले में उन्होंने वेस्टइंडीज की तरफ से भारत के खिलाफ वनडे क्रिकेट में सबसे तेज शतक जड़ने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनकी इस पारी में न केवल शानदार शॉट्स का मुआयना हुआ, बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी परिचय मिला, जिसने कैरेबियन टीम को एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया।
भविष्य पर असर और दूसरा वनडे
हालांकि, इस शानदार प्रदर्शन के तुरंत बाद एक बुरी खबर भी सामने आई है कि तिरुवनंतपुरम में शतक ठोकने वाला या इस लय को आगे बढ़ाने वाला बल्लेबाज चोट या अन्य कारणों से अगले मुकाबले से बाहर हो सकता है, जिससे वेस्टइंडीज की टीम प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई हैं। लेकिन इतना तय है कि जॉन कैंपबेल ने अपनी इस पारी से यह साबित कर दिया है कि वह तमाम विवादों को पीछे छोड़कर केवल अपने बल्ले से जवाब देना जानते हैं। 'द फ्रीलान्स' इस सीरीज के हर घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा।








