नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली के जीवन पर बनने वाली बायोपिक इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म निर्माताओं ने हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज किया है, जिसमें अभिनेता राजकुमार राव को 'दादा' के लुक में दिखाया गया है। पोस्टर सामने आते ही इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं का बाढ़ आ गई और फैंस ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि पोस्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कमजोर वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे राजकुमार राव का चेहरा सौरव गांगुली से मेल नहीं खा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने इस फर्स्ट लुक की तुलना स्कूल प्रोजेक्ट्स के पोस्टर्स से करनी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि बॉलीवुड जैसे बड़े उद्योग में एक महान क्रिकेटर की बायोपिक के लिए बेहतर और अधिक वास्तविक दिखने वाला पोस्टर तैयार किया जाना चाहिए था। कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि पोस्टर में डिजिटल सुधारों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से अभिनेता का मूल लुक छिप गया है। यह विवाद इतनी तेजी से फैला कि कुछ ही घंटों में यह इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगा और फिल्म मेकर्स के साथ-साथ मुख्य अभिनेता पर भी सवाल उठने लगे कि उन्होंने इस तरह के लुक को क्यों मंजूरी दी।
पोस्टर की ट्रोलिंग पर राजकुमार राव का सीधा जवाब
बढ़ती आलोचनाओं और सोशल मीडिया पर हो रही तीखी ट्रोलिंग के बीच अब खुद अभिनेता राजकुमार राव ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान राजकुमार राव ने स्पष्ट किया कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में हर चीज को केवल तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम और निर्देशक ने इस फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत की है और वे सौरव गांगुली के जीवन के हर पहलू को पर्दे पर पूरी ईमानदारी के साथ उतारने की कोशिश कर रहे हैं। अभिनेता ने आलोचकों को यह भी समझाया कि किसी भी फिल्म के शुरुआती पोस्टर को देखकर पूरी फिल्म की गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जाना चाहिए।
राजकुमार राव ने अपने बयान में आगे कहा कि दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का वे सम्मान करते हैं, लेकिन केवल एक पोस्टर के आधार पर फिल्म के बारे में नकारात्मक राय बना लेना सही नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब फिल्म का टीज़र और ट्रेलर दर्शकों के सामने आएगा, तब उन्हें समझ आ जाएगा कि इस किरदार के लिए कितनी गहरी तैयारी की गई है। फिल्म से जुड़े सूत्रों का भी यह कहना है कि राजकुमार राव ने इस भूमिका के लिए क्रिकेट की बारीकियों को सीखने में महीनों की कड़ी मेहनत की है। वे मैदान पर सौरव गांगुली के अंदाज, उनके चलने के तरीके और शॉट्स खेलने की शैली को हूबहू अपनाने के लिए लगातार पसीना बहा रहे हैं।
सौरव गांगुली के जीवन पर आधारित बायोपिक से जुड़ी खास बातें
क्रिकेट प्रेमियों के बीच 'दादा' के नाम से मशहूर सौरव गांगुली की यह बायोपिक उनके संघर्ष, भारतीय टीम की कप्तानी संभालने और भारतीय क्रिकेट को एक नई आक्रामक पहचान देने की कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाएगी। फिल्म की घोषणा के बाद से ही फैंस यह जानने के लिए उत्सुक थे कि पर्दे पर सौरव गांगुली का किरदार कौन निभाएगा। जब राजकुमार राव का नाम इस भूमिका के लिए फाइनल हुआ, तो खेल प्रेमियों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला था, क्योंकि राजकुमार राव को उनकी बेहतरीन अभिनय क्षमता के लिए जाना जाता है। हालांकि, पहले ही पोस्टर पर उठे विवाद ने इस उत्साह को थोड़ा फीका जरूर किया है, लेकिन निर्माताओं को उम्मीद है कि जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज की तारीख पास आएगी, दर्शकों का यह संदेह पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
फिल्म की शूटिंग और बाकी की निर्माण प्रक्रियाओं से जुड़े आधिकारिक ब्योरे जल्द ही साझा किए जाएंगे। इस बायोपिक का निर्देशन कौन कर रहा है और इसमें अन्य प्रमुख भूमिकाओं में कौन-कौन से कलाकार नजर आएंगे, इसे लेकर भी फैंस के मन में कई सवाल हैं। हालांकि, फिल्म के मेकर्स ने अभी तक रिलीज की फाइनल तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इतना तय है कि यह फिल्म अगले साल सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। इस बीच, सोशल मीडिया पर चल रही बहस ने फिल्म के प्रचार में अनजाने में ही सही, लेकिन एक बड़ी भूमिका निभा दी है, जिससे फिल्म हर किसी की जुबान पर आ गई है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और आगे की उम्मीदें
मैदान पर सौरव गांगुली के छक्के लगाने का अंदाज और उनकी आक्रामक कप्तानी आज भी क्रिकेट फैंस के जेरो में ताजा है। ऐसे में दर्शक चाहते हैं कि उनके हीरो की बायोपिक में किसी भी तरह की कोई कमी न रह जाए। यही कारण है कि फैंस इतने संवेदनशील हैं और वे जरा सी भी चूक पर अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि भारतीय दर्शक अब फिल्मों में केवल बड़े नामों से संतुष्ट नहीं होते, बल्कि वे प्रामाणिकता और उच्च गुणवत्ता की मांग करते हैं। राजकुमार राव के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म का अगला विजुअल या टीज़र दर्शकों के गुस्से को शांत करने में कितना सफल साबित होता है।







