बिहार के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। कभी स्थानीय मंडियों और व्रत-त्योहारों तक सीमित रहने वाला मखाना अब सात समंदर पार अपनी धाक जमाने लगा है। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के सहयोग से मखाने की पहली खेप ग्रीस के लिए रवाना कर दी गई है। यह ट्रायल खेप 1 मीट्रिक टन की है, जिसने भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं।
इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी खुद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की है। सरकार की इस दूरदर्शी पहल से न केवल देश के पारंपरिक उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है, बल्कि स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी यह एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
सुपरफूड के रूप में यूरोप में बढ़ रही है मांग
मखाना अपनी उच्च पौष्टिकता, भरपूर प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण आज एक ग्लोबल 'सुपरफूड' के रूप में उभर रहा है। यही वजह है कि यूरोपीय और अमेरिकी देशों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के बीच इसकी मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है। ग्रीस को हुआ यह निर्यात आने वाले समय में जर्मनी, अमेरिका और जापान जैसे देशों के बाजारों में भी भारतीय मखाने की पहुंच को आसान बनाएगा।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा और ग्लोबल दाम
अब तक मखाना उत्पादक अक्सर बिचौलियों के जाल में फंसे रहते थे और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। लेकिन APEDA और सरकार की इस नई पहल के बाद किसानों को एक्सपोर्ट की ट्रेनिंग, पैकेजिंग और सर्टिफिकेशन में मदद मिल रही है। इससे मखाना उत्पादक सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ेंगे और उनकी आय में भारी बढ़ोतरी होगी।
'लोकल से ग्लोबल' विजन का प्रमाण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्यात से हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। बिहार सरकार द्वारा पहले ही मखाने को GI टैग दिलाकर इसकी ब्रांडिंग की जा चुकी है, और अब अंतरराष्ट्रीय निर्यात शुरू होने से यह भारत के 'लोकल से ग्लोबल' विजन का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है।
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