त्योहार के मौसम में बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य के करीब 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के अगले वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। महालेखाकार (AG) की जांच में दोनों विभागों में भारी वित्तीय अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में इसे एक बड़े वेतन घोटाले के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के इस सख्त फैसले के बाद वित्त विभाग ने दोनों विभागों को पत्र भेजकर दस्तावेजों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस और शिक्षा विभाग में सॉफ्टवेयर से लेकर फर्जी आईडी तक का खेल
जांच के मुताबिक, पुलिस विभाग में एचआरएमएस (HRMS) और सीएफएमएस (CFMS) पोर्टल में सेंध लगाकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। गलत ऑनबोर्डिंग के जरिए नियुक्ति के समय ही पोर्टल पर वेतन की अत्यधिक राशि दर्ज कर ली गई। मेकर, चेकर और अप्रूवर की मिलीभगत से कई सालों तक सरकारी खजाने से अतिरिक्त वेतन के फर्जी बिल पास कराए जाते रहे। वहीं, शिक्षा विभाग में स्थिति और भी गंभीर पाई गई, जहां फर्जी आईडी और गलत पे-आईडी का बड़ा खेल हुआ। सुपौल, पटना और औरंगाबाद जैसे जिलों में सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर एचआरए व सीटीए की अधिकतम सीमा 10 फीसदी के बजाय 2 हजार फीसदी तक बढ़ा दी गई।
लाखों के वेतन की जगह करोड़ों का अवैध भुगतान और आगे की कार्रवाई
हैरान करने वाली बात यह है कि 52 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के खातों में हर महीने 6 से 9 लाख रुपये तक का फर्जी भुगतान किया जाता रहा। अकेले पटना सिटी के एक स्कूल में लिपिक को नियमों के विरुद्ध भारी-भरकम राशि भेजी गई, जबकि सुपौल में लिपिक ने फर्जी आईडी के जरिए अपनी मां और सास के खातों में 1.83 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। सरकार की शुरुआती जांच में ही ऐसे 5 हजार संदिग्ध कर्मचारी चिह्नित किए गए हैं। अब राज्य के इन कर्मियों के पिछले 5 साल के वेतन खातों की गहन जांच कराई जा रही है, और रिपोर्ट आने के बाद ही अगला वेतन जारी किया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और रिपोर्टों के आधार पर इस मामले की जानकारी दी गई है। 'The Freelance' इस वित्तीय घोटाले से जुड़ी आधिकारिक प्रशासनिक जांच और तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। विवरण संबंधित सरकारी आदेशों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
सत्यापित संपादकीय डेस्कउत्तर प्रदेश व प्रादेशिक विकास रिपोर्टिंग टीम
द फ्रीलांस का प्रादेशिक ब्यूरो उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के जमीनी मुद्दों, विकास योजनाओं, प्रशासनिक कार्रवाइयों और ग्रामीण-शहरी समस्याओं की निष्पक्ष और वास्तविक रिपोर्टिंग करता है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।
शराबबंदी वाले राज्य में ट्रक से पकड़ी गई 2400 लीटर से ज्यादा विदेशी शराब, त्योहारी सीजन से पहले तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा
अगली खबरवीडियो: विधानसभा में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, स्पीकर के नाम का इस्तेमाल करने वाला कर्मचारी सस्पेंड
संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

उत्तराखंड बन रहा फिल्म शूटिंग का हब : धामी

समीर वर्मा की डेब्यू फिल्म के फर्स्ट लुक में देरी: कहानी में बदलाव के बाद 14 फरवरी 2027 को आएगा फर्स्ट लुक

मसूरी से नैनीताल तक फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन रहा उत्तराखंड, सात दिन में मिलता है शूटिंग का क्लियरेंस

डोपिंग के जाल में फंसा यह भारतीय खिलाड़ी! IPC ने ठोका 3 साल का बैन, छीने गए सारे मेडल
‘बिहार वेतन घोटाला’ व राज्य से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें
STATESशराबबंदी वाले राज्य में ट्रक से पकड़ी गई 2400 लीटर से ज्यादा विदेशी शराब, त्योहारी सीजन से पहले तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा
STATESवीडियो: विधानसभा में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, स्पीकर के नाम का इस्तेमाल करने वाला कर्मचारी सस्पेंड
STATESवीडियो: 'मैंने नीतीश के लिए 9 हत्याएं कराईं...' विवाद बढ़ने पर अपने ही बयान से पलटे बाहुबली नेता
STATESकोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में दर्दनाक हादसा: भारी भीड़ और भगदड़ से 17 लोगों की मौत, कई घायल
STATESवीडियो: 'अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में जाएंगे?', दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भड़के केजरीवाल
STATESयूपी में महानवमी पर सार्वजनिक अवकाश का ऐलान, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा तीखा निशाना
STATESवीडियो: प्लॉट के नाम पर शातिर ठगों ने बुना खतरनाक जाल, रसीद देने के बहाने वकील से लूट लिए 20 लाख रुपये
STATES