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राज्यपढ़ने में समय: 3 मिनट

उत्तर प्रदेश की सियासत में कितना मजबूत है मल्लाह और निषाद समाज का वोटबैंक, क्या है सत्ता में दखल?

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मल्लाह और निषाद समुदाय एक निर्णायक वोटबैंक के रूप में उभर रहा है। पूर्वांचल से लेकर मध्य यूपी तक फैली इस जाति की राजनीतिक ताकत, आबादी और सत्ता में दखल को लेकर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
प्रादेशिक एवं राज्य ब्यूरो•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•24
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उत्तर प्रदेश की सियासत में कितना मजबूत है मल्लाह और निषाद समाज का वोटबैंक, क्या है सत्ता में दखल?
📷 उत्तर प्रदेश की सियासत में कितना मजबूत है मल्लाह और निषाद समाज का वोटबैंक, क्या है सत्ता में दखल? — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • यूपी में मल्लाह और निषाद समाज की कुल आबादी लगभग 5 से 9 फीसदी के बीच मानी जाती है।
  • राज्य की करीब 160 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का किसी न किसी रूप में राजनीतिक प्रभाव है।
  • निषाद समुदाय लंबे समय से अपनी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने की मांग कर रहा है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मल्लाह और निषाद समाज एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गया है। आबादी के लिहाज से भले ही यह समाज प्रदेश के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में शामिल न हो, लेकिन यह एक बेहद प्रभावशाली और निर्णायक राजनीतिक ताकत के रूप में उभरा है। पूर्वांचल से लेकर मध्य और पश्चिमी यूपी तक इनकी मौजूदगी सियासी समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित करती है। यही वजह है कि सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी तक सभी प्रमुख दल इस समुदाय को अपने पाले में करने की कवायद में जुटे हैं।

यूपी में कितनी है मल्लाह-निषाद समाज की आबादी और प्रभाव?

उत्तर प्रदेश में मल्लाह और निषाद समाज की आबादी करीब 5 से 6 फीसदी आंकी जाती है, जो केवट, बिंद, बाथम, कश्यप, निषाद, साहनी और मांझी जैसी कई उप-जातियों में बंटी हुई है। नदी-आधारित इन सभी समुदायों को एक व्यापक समूह के रूप में जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा लगभग 9 फीसदी तक पहुंच जाता है। गंगा, यमुना, घाघरा और सरयू जैसी नदियों के किनारे बसे इलाकों में इनकी संख्या बहुतायत में है।

विशेषज्ञों और विभिन्न राजनीतिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 160 सीटों पर इस समुदाय का अच्छा-खास प्रभाव है। इनमें से करीब 50 से 80 सीटें ऐसी हैं जहां इनकी आबादी हार-जीत का फैसला करने की पूरी क्षमता रखती है। गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, संतकबीरनगर, मऊ, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, प्रयागराज और फतेहपुर जैसे जिलों में इन मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जाती है।

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सत्ता में दखल और राजनीतिक दलों की रणनीति

मल्लाह समुदाय का प्रभाव केवल उसकी आबादी पर ही नहीं, बल्कि उसके क्षेत्रीय संकेंद्रण पर भी निर्भर करता है। हालांकि, आबादी के अनुपात में विधानसभा और संसद में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। वर्तमान में यूपी सरकार में संजय निषाद कैबिनेट मंत्री हैं और कुछ विधायक व सांसद भी इस समाज से आते हैं। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के बीच अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग लगातार उठ रही है।

इस समुदाय की एक सबसे बड़ी और पुरानी मांग अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा हासिल करने की है। निषाद पार्टी समेत कई अन्य संगठन लंबे समय से इस मांग को लेकर मुखर रहे हैं। जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है, सभी दल इस महत्वपूर्ण वोटबैंक को साधने के लिए नए सियासी समीकरण और समझौते करने में लगे हैं।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और राजनीतिक रिपोर्ट्स पर आधारित इस विश्लेषण के आंकड़ों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह रिपोर्ट विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर आधारित है। साभार: राजनीतिक विश्लेषक एवं मीडिया रिपोर्ट्स।

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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

उत्तर प्रदेश व प्रादेशिक विकास रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस का प्रादेशिक ब्यूरो उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के जमीनी मुद्दों, विकास योजनाओं, प्रशासनिक कार्रवाइयों और ग्रामीण-शहरी समस्याओं की निष्पक्ष और वास्तविक रिपोर्टिंग करता है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

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