नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय सरकार के एक बड़े फैसले पर टिकी हैं। हर किसी को उम्मीद थी कि इस हफ्ते होने वाली कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते पर मुहर लग जाएगी। बैठक खत्म हो गई, लेकिन भत्ते पर कोई फैसला नहीं आया। इस वजह से कर्मचारियों में थोड़ी मायूसी जरूर है, लेकिन उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। अब माना जा रहा है कि सरकार दिवाली से ठीक पहले कर्मचारियों को यह बड़ा तोहफा दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो त्योहार के मौके पर कर्मचारियों के खाते में मोटी रकम आएगी।
सरकार हर साल दो बार महंगाई भत्ता बढ़ाती है। पहला भत्ता जनवरी से लागू होता है और दूसरा जुलाई से लागू किया जाता है। इस बार जुलाई वाले भत्ते के ऐलान में काफी देर हो चुकी है। आमतौर पर सितंबर के आखिर तक इसकी घोषणा हो जाती थी। इस बार अक्टूबर का आधा महीना बीतने को है और फाइल अभी भी अटकी है। ग्राउंड स्तर पर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह देरी उनके बजट को बिगाड़ रही है। दूध, तेल, दाल और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में भत्ते का पैसा मिलने से परिवार का खर्च चलाना थोड़ा आसान हो जाता है।
कैबिनेट की बैठक में क्यों टला फैसला?
सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की पिछली बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिली थी। लेकिन महंगाई भत्ते के प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था। वित्त मंत्रालय ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। माना जा रहा है कि भत्ते में तीन या चार फीसदी की बढ़ोतरी तय है। सरकार त्योहार के ठीक नजदीक जाकर इसका ऐलान करना चाहती है। इससे कर्मचारियों के बीच खुशी का माहौल बनेगा और बाजार में भी मांग बढ़ेगी। दशहरे की छुट्टियां बीतने के बाद अब अगली कैबिनेट बैठक पर सबकी निगाहें हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव पूरी तरह तैयार है और बस प्रधानमंत्री की हरी झंडी का इंतजार है।
इस संभावित बढ़ोतरी से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों को भी महंगाई राहत का फायदा पहुंचेगा। अगर सरकार चार फीसदी की बढ़ोतरी करती है, तो कुल महंगाई भत्ता 50 फीसदी से बढ़कर 54 फीसदी हो जाएगा। यदि तीन फीसदी का इजाफा होता है, तो यह आंकड़ा 53 फीसदी तक पहुंचेगा। कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस बार चार फीसदी की ही बढ़ोतरी करेगी, ताकि उन्हें बाजार की महंगाई से वास्तविक राहत मिल सके।
कोल इंडिया ने दिया अपने कर्मचारियों को तोहफा
एक तरफ जहां केंद्रीय कर्मचारी फैसले का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोल इंडिया ने अपने कामगारों की झोली भर दी है। कोल इंडिया ने अपने गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की नई दरें तय कर दी हैं। कंपनी के इस कदम से करीब एक लाख से ज्यादा मजदूरों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। नई दरों के तहत कई श्रेणियों में दैनिक भत्ता 1443 रुपये तक पहुंच गया है। कोल इंडिया के इस फैसले से खदानों में काम करने वाले मजदूरों के चेहरे खिल गए हैं। उनका कहना है कि त्योहार से पहले मिला यह पैसा उनके परिवार के लिए बड़ी खुशी लेकर आया है।
कोल इंडिया के इस फैसले के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की मांग और तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब सरकारी कंपनियों ने अपने स्तर पर भत्ते बढ़ा दिए हैं, तो फिर केंद्र सरकार क्यों देरी कर रही है। रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों की यूनियन ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने सरकार को बाकायदा चिट्ठी भेजी है। यूनियन ने मांग की है कि डीए में बढ़ोतरी का ऐलान बिना किसी देरी के तुरंत किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बोनस की पुरानी सीमा को भी बढ़ाने की मांग रखी है।
तीन महीने का एरियर और खाते में आएगी बड़ी रकम
इस फैसले में सबसे राहत भरी बात यह है कि यह बढ़ोतरी 1 जुलाई से लागू मानी जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर का बकाया यानी एरियर भी मिलेगा। अक्टूबर के वेतन के साथ जब तीन महीने का एरियर जुड़ेगा, तो कर्मचारियों के खाते में अच्छी खासी रकम आएगी। त्योहार के सीजन में घर की खरीदारी, बच्चों के कपड़े और मिठाइयों के खर्च के बीच यह पैसा बहुत काम आएगा। निचले स्तर के कर्मचारियों को भी एरियर के तौर पर कई हजार रुपये एकमुश्त मिलेंगे।
वित्त मामलों के जानकारों का मानना है कि कर्मचारियों के हाथ में पैसा आने से देश की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलता है। जब लाखों परिवारों के पास अतिरिक्त रकम आती है, तो वे बाजार में खर्च करते हैं। इससे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और खुदरा बाजार में बिक्री बढ़ती है। सरकार भी इस गणित को अच्छी तरह समझती है। यही वजह है कि दिवाली से पहले इस तरह के वित्तीय फैसले लिए जाते हैं। अब देखना यही है कि अगली कैबिनेट बैठक में सरकार कर्मचारियों के इस बहुप्रतीक्षित तोहफे पर कब अंतिम मुहर लगाती है।






