नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — यूरोप से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ डिजिटल सुरक्षा में सेंध लगने के बाद बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी मच गई है। फ्रांस के एक प्रमुख सुपरमार्केट में अज्ञात हैकर्स ने कंप्यूटर सिस्टम पर कब्जा कर लिया। इस खतरनाक साइबर हमले का नतीजा यह हुआ कि स्टोर के सभी फ्रिज पचास डिग्री सेल्सियस के ऊंचे तापमान पर लगातार काम करते रहे। तापमान बढ़ने की वजह से अंदर रखा सारा कीमती खाना पूरी तरह सड़ गया और बर्बाद हो गया। इस अजीबोगरीब और गंभीर घटना ने यूरोपीय देशों की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
सुपरमार्केट में हुई इस हैकिंग के बाद अब यूरोपीय देशों की सरकारों की नींद उड़ गई है। जांच एजेंसियों को डर है कि डिजिटल उपकरणों और स्मार्ट मशीनों में बाहरी दखल देकर भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इस बड़ी घटना के तुरंत बाद अब यूरोप भर में परिवहन तंत्र की सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। खासतौर पर सड़कों पर दौड़ने वाली चाइनीज बसों के सॉफ्टवेयर और तकनीकी नियंत्रण प्रणालियों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन यात्री बसों में भी इसी तरह की रिमोट हैकिंग का खतरा छिपा हुआ है।
सुपरमार्केट में कैसे बिगड़ा तापमान का पूरा खेल?
फ्रांस की इस घटना ने दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। सामान्य तौर पर सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेटर को खाद्य सामग्री सुरक्षित रखने के लिए बेहद ठंडे तापमान पर सेट किया जाता है। लेकिन हैकरों ने सेंट्रल कंट्रोल यूनिट को अपने कब्जे में लेकर तापमान को उलट दिया। फ्रिज ठंडक देने की बजाय लगातार गर्मी पैदा करने लगे और किसी को तुरंत इसकी भनक तक नहीं लगी। जब तक स्टोर के कर्मचारियों को गड़बड़ी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस नापाक हरकत से दुकान मालिक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद अब परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधुनिक बसें अब केवल डीजल और इंजन के भरोसे नहीं चलती हैं, बल्कि उनमें तमाम डिजिटल सेंसर और जीपीएस लगे होते हैं। यूरोप में चल रही चाइनीज बसों में रिमोट डायग्नोस्टिक्स और सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल होता है। सुरक्षा एजेंसियों को यह चिंता सता रही है कि यदि कोई सुपरमार्केट के फ्रिज हैक कर सकता है, तो क्या चलती बसों के ब्रेक या इंजन को भी कंट्रोल किया जा सकता है। यही वजह है कि अब हर वाहन के डिजिटल नेटवर्क की बारीकी से जांच हो रही है।
यूरोप में चाइनीज बसों की सुरक्षा पर क्यों बढ़ा शक?
पिछले कुछ सालों से यूरोपीय देशों की सड़कों पर चीन में बनी इलेक्ट्रिक और डीजल बसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई शहर इन बसों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि इनकी कीमत कम होती है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी जासूसी के डर के कारण अब इन पर कड़ा पहरा बिठाया जा रहा है। फ्रांस की सुपरमार्केट वाली घटना के बाद राजनेताओं ने भी परिवहन सुरक्षा पर कड़े सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि विदेशी तकनीक पर पूरी तरह आंख मूंदकर भरोसा करना आने वाले समय में बहुत भारी पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर आम जनता भी इस बात को लेकर काफी चिंतित नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि जब रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की चीजें और गाड़ियां ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कैसे महफूज रह सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हर स्मार्ट डिवाइस में मजबूत पासवर्ड और फायरवॉल का होना बेहद जरूरी है। सुपरमार्केट की इस घटना से सबक लेते हुए अब कई कंपनियों ने अपने इंटरनल नेटवर्क को ऑफलाइन मोड पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है ताकि इस तरह के हमलों से बचा जा सके।
आगे क्या कदम उठा रही हैं यूरोपीय एजेंसियां?
पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए यूरोपीय संघ के कई देशों ने मिलकर एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टीम उन सभी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की जांच कर रही है जो बाहर से आयात किए जाते हैं। चाइनीज बसों के निर्माताओं से उनके सोर्स कोड और डेटा स्टोरेज की पूरी जानकारी मांगी गई है। यदि किसी भी वाहन में सुरक्षा को लेकर कोई बड़ी खामी पाई जाती है, तो उसे तुरंत सड़कों से हटाने का निर्देश दिया जा सकता है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले दिनों में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर नियम और भी ज्यादा सख्त होने वाले हैं।









