नई दिल्ली। मोटरस्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी और रोमांचित करने वाली खबर सामने आ रही है। भारत में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मोटर रेसिंग प्रतियोगिता 'फॉर्मूला वन' (F1) की दोबारा वापसी की तैयारियां जोरों पर हैं। हमारी ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम को मिले इनपुट और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस दिशा में गंभीर कदम उठाते हुए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। लक्ष्य साफ है—साल 2013 के बाद से ठप पड़ी इस रफ्तार को एक बार फिर देश की धरती पर उतारा जाए।
बुद्धा इंटरनेशनल सर्किट पर टमी निगाहें
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित 'बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट' (BIC) पर एक बार फिर F1 कारों के इंजन गरजते दिखाई दे सकते हैं। जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) के परिसमापन और संपत्तियों के अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच इस सर्किट के भविष्य को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालिया व्यावसायिक घटनाक्रमों, जिनमें अदाणी समूह द्वारा संपत्तियों के अधिग्रहण से जुड़े कयास और तथ्य शामिल हैं, के बाद इस विश्वस्तरीय ट्रैक के पुनरुद्धार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सरकार का मास्टर प्लान इसी सर्किट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फिर से तैयार करने पर केंद्रित है।
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2028 का मास्टर प्लान और प्रशासनिक पहल
आखिरी बार भारत में F1 ग्रैंड प्रिक्स का आयोजन 2013 में हुआ था, जिसके बाद टैक्स संबंधी विवादों, वित्तीय संकट और प्रशासनिक लालफीताशाही के चलते यह रोमांच देश से दूर हो गया था। अब लगभग 15 साल के लंबे अंतराल के बाद, यानी 2028 तक भारत में F1 की वापसी का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। नीति निर्माताओं और मोटरस्पोर्ट्स फेडरेशन के बीच हो रही बैठकों से संकेत मिलते हैं कि इस बार कर ढांचे और आयोजनों की बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस कानूनी और वित्तीय फ्रेमवर्क बनाया जा रहा है।
वैश्विक परिदृश्य और सेपांग का उदाहरण
दिलचस्प बात यह है कि एशियाई सर्किटों में F1 का क्रेज एक बार फिर चरम पर है। हाल ही में सेपांग (मलेशिया) में F1 की वापसी की चर्चा के बीच मैक्स वेरस्टैपेन जैसे दिग्गज ड्राइवर ट्रैक पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं, वहीं सिंगापुर ग्रैंड प्रिक्स 2026 की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। ऐसे में, भारत जैसी उभरती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था और विशाल युवा बाजार के लिए मोटरस्पोर्ट्स के मानचित्र पर दोबारा लौटना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनौतियां और आगे की राह
भले ही मास्टर प्लान तैयार हो चुका हो और टास्क फोर्स ने काम शुरू कर दिया हो, लेकिन धरातल पर उतरने से पहले कई बड़ी चुनौतियां अभी भी बाकी हैं। ट्रैक का आधुनिकीकरण, भारी-भरकम लाइसेंसिंग फीस, और सरकार-निजी क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित करना आसान नहीं होगा। हालांकि, यदि यह योजना सफल होती है, तो यह भारतीय खेल जगत, पर्यटन और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा।








