बदायूं में जमीन पैमाइश के दौरान भड़का विवाद
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी है। कादरचौक थाना क्षेत्र के लाभारी गांव में जमीन की पैमाइश को लेकर उपजा तनाव इस हद तक बढ़ गया कि एक युवती का वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में जलती हुई झोपड़ी के सामने खड़ी एक लड़की गुस्से और रोष में नजर आ रही है। उसकी बातें सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
यह पूरा विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसकी एक लंबी पृष्ठभूमि है जिसकी शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी। ग्रामीण इलाकों में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े और मेड़बंदी को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार का मामला प्रशासनिक अमले और आम नागरिकों के बीच सीधी तनातनी में बदल गया। पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम जब मौके पर पहुंची तो हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते चले गए।
वीडियो में जिस युवती का गुस्सा फूटता दिखाई दे रहा है, उसकी पहचान शिवानी कश्यप के रूप में हुई है। शिवानी का सीधा और तीखा आरोप है कि प्रशासनिक अमले के अधिकारी जबरन उसके घर में दाखिल हुए और उनकी झोपड़ी को आग के हवाले कर दिया। आग की लपटों के बीच खड़े होकर उसने जो बयान दिया, उसने इस घटना को एक अलग ही मोड़ दे दिया है।
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'फूलन देवी बनकर लूंगी बदला' - युवती के तीखे तेवर
जलती हुई झोपड़ी के सामने खड़े होकर शिवानी कश्यप ने जिस अंदाज में प्रशासनिक अधिकारियों को चुनौती दी, उसका वीडियो तेजी से वायरल हो गया। गुस्से से कांपती हुई युवती ने कहा कि वह इस ज्यादती को चुपचाप सहन नहीं करेगी। उसने कैमरे के सामने तल्ख लहजे में घोषणा की कि वह फूलन देवी बनकर इस अन्याय का बदला लेगी और आरोपियों को छोड़ेगी नहीं।
युवती का आरोप है कि पुलिस और लेखपाल की टीम ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर उनके आशियाने को उजाड़ दिया। उसने यह भी चेतावनी दी कि जिन लोगों ने उनका घर जलाया है, उनके घरों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए। इस बयान के बाद से ही स्थानीय राजनीति और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि आखिर इस आगजनी के पीछे की असल सच्चाई क्या है।
"लेखपाल मेरी झोपड़ी में आग लगाकर मौके से भाग गया है। मैं अब फूलन देवी बनकर इन सभी से बदला लूंगी और इन्हें कानून का सबक सिखाऊंगी।" — शिवानी कश्यप, स्थानीय निवासी एवं पीड़ित पक्ष
प्रशासन और पुलिस पक्ष: आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस और जिला प्रशासन ने अपनी सफाई पेश की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती और उसके परिजनों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं। पुलिस के मुताबिक, राजस्व टीम ने किसी भी घर में आग नहीं लगाई है, बल्कि यह सब सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए खुद ही किया गया एक ड्रामा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ में नन्हीं देवी नाम की महिला की शिकायत है। नन्हीं देवी ने 29 सितंबर को अपनी जमीन की पैमाइश के लिए तहसील में प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और नियमानुसार पैमाइश कर जमीन का कब्जा दिलाया गया। लेकिन इसके बाद से ही दोनों पक्षों के बीच खींचतान शुरू हो गई थी।
पैमाइश से शुरू हुआ विवाद और नींव उखाड़ने का आरोप
मामले की तह में जाएं तो पता चलता है कि 29 सितंबर को पैमाइश होने के अगले ही दिन यानी 30 सितंबर को नन्हीं देवी ने अपनी जमीन पर नींव भरवाने का काम शुरू किया था। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उस नींव को जबरन उखाड़ कर फेंक दिया। स्थिति को दोबारा बिगड़ता देख 1 अक्टूबर को एसडीएम सदर के निर्देश पर राजस्व टीम और पुलिस बल फिर से लाभारी गांव पहुंचा।
पुलिस का दावा है कि जब अधिकारी और कर्मचारी पैमाइश का काम आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, तो कुछ लोगों ने सरकारी काम में भारी बाधा उत्पन्न की। इसी हंगामे के बीच अचानक एक खाली झोपड़ी में आग लग गई। पुलिस का मानना है कि यह आग सोची-समझी रणनीति के तहत लगाई गई ताकि प्रशासनिक टीम को फंसाया जा सके और सहानुभूति बटोरी जा सके।
कानूनी कार्रवाई और पांच लोगों की गिरफ्तारी
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक अमला भी सख्त एक्शन में आ गया है। हल्का लेखपाल की आधिकारिक तहरीर पर कादरचौक थाने में बलवे, सरकारी काम में बाधा डालने और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक महिला को पुलिस ने शुरुआती पूछताछ के बाद मुचलके पर छोड़ दिया है, जबकि अन्य चार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो में लगाए गए बयानों और आग लगने के वास्तविक कारणों की बारीकी से फोरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
बदायूं का यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे जमीनी विवाद कभी-कभार विकृत रूप धारण कर लेते हैं। एक तरफ जहां गरीब परिवार अपनी झोपड़ी जलने और उत्पीड़न का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस इसे प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने की साजिश बता रही है। फिलहाल गांव में तनाव को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन हर एक गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है।


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