नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर हमेशा से धरना प्रदर्शन और आंदोलनों का मुख्य केंद्र रहा है। अब इसी जंतर-मंतर की तर्ज पर एक नया वीडियो गेम इन दिनों सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गया है। इस अनोखे गेम को एक आईआईटी छात्र ने तैयार किया है, जिसका मकसद लोगों को घर बैठे ही प्रदर्शन का वर्चुअल अनुभव देना है। इस खेल में खिलाड़ी को पुलिस की लाठियों से बचते हुए अपनी बात रखनी होती है। इंटरनेट पर इस गेम के वीडियो और स्क्रीनशॉट तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। युवा इस गेम को लेकर काफी उत्सुक हैं और इसके बारे में खुलकर बात कर रहे हैं।
इस गेम के नियमों और खेलने के तरीके को बहुत ही सरल और मजेदार बनाया गया है। गेम की शुरुआत में खिलाड़ी को जंतर-मंतर के वर्चुअल मैदान पर उतरना होता है। इसके बाद स्क्रीन पर पुलिस के डंडे, बेरिकेड्स और अन्य बाधाएं आती हैं। खिलाड़ी को बहुत तेजी से इन बाधाओं को पार करना होता है और पुलिस की गिरफ्त से बचना होता है। यदि खिलाड़ी पुलिस के हत्थे चढ़ जाता है, तो वह गेम में डिटेन हो जाता है और खेल वहीं खत्म हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में असली आंदोलनों जैसा माहौल बनाने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि लोग इसे बहुत चाव से खेल रहे हैं और इसके वीडियो इंटरनेट पर शेयर कर रहे हैं।
आईआईटी छात्र के दिमाग की उपज
इस वायरल गेम को बनाने वाले युवा की उम्र करीब सत्ताईस साल बताई जा रही है, जिसने अपनी तकनीकी सोच का इस्तेमाल करके इसे डिजाइन किया है। डेवलपर का कहना है कि उसने देश में अक्सर होने वाले आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई को बहुत करीब से देखा था। इसी बात से प्रेरणा लेकर उसने इस खेल को बनाने का फैसला किया। उसने कोडिंग और गेम डिजाइनिंग की अपनी जानकारी का उपयोग करके इस प्रोजेक्ट को पूरा किया। जब यह गेम पहली बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आया, तो कुछ ही घंटों में हजारों लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया। आज यह गेम देश के युवाओं के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
खेल की इस लोकप्रियता में सोशल मीडिया की भूमिका बहुत बड़ी रही है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर इस खेल के क्लिप्स बहुत ज्यादा देखे जा रहे हैं। लोग इसके वीडियो पर तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे रचनात्मक सोच का बेहतरीन नमूना बता रहे हैं, तो कुछ लोग पुलिस से बचने वाले इस तरीके को हास्यपद मान रहे हैं। इस बीच, खेल जगत और डिजिटल मीडिया से जुड़े कई जाने-माने चेहरों ने भी इस पर अपनी राय रखी है। अभिजीत दीपके जैसे लोग भी इस वर्चुअल ट्रेंड पर अपनी प्रतिक्रिया देते नजर आए हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता और अधिक बढ़ गई है।
पुलिस के डंडों और डिटेन होने का वर्चुअल रोमांच
इस खेल की सबसे बड़ी खूबी इसका वह हिस्सा है जहां खिलाड़ियों को पुलिस से लुका-छिपी खेलनी पड़ती है। असली जिंदगी में जब भी युवा जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर इकट्ठा होते हैं, तो उन्हें अक्सर पुलिस के कड़े पहरे और बैरिकेड्स का सामना करना पड़ता है। इस खेल में उसी स्थिति को डिजिटल रूप में ढाल दिया गया है। जब खिलाड़ी वर्चुअली आगे बढ़ता है, तो पुलिस के जवान उसे रोकने की कोशिश करते हैं। गेम खेलने वाले को सही समय पर सही दिशा में मुड़ना होता है ताकि वह पुलिस की नजरों से बच सके। इस चुनौतीपूर्ण हिस्से के कारण लोगों का इस खेल से जुड़ाव और ज्यादा गहरा हो गया है।
मैदानी स्तर पर यदि हम बात करें तो जंतर-मंतर पर अक्सर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन होते रहते हैं। कभी किसान, कभी छात्र तो कभी नौकरीपेशा लोग अपनी मांगों के साथ वहां पहुंचते हैं। इस गेम ने वास्तविक दुनिया की इन तमाम विडंबनाओं को एक हल्के-फुल्के मनोरंजन के तौर पर पेश किया है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह केवल एक टाइमपास गेम है, लेकिन इसके पीछे की सोच युवाओं की वर्तमान मानसिकता को जरूर दर्शाती है। आज की युवा पीढ़ी अपनी बात को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने में बहुत आगे है और यह गेम उसी का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
इंटरनेट पर वायरल वीडियो और लोगों की प्रतिक्रियाएं
गेम लॉन्च होने के बाद से ही इससे जुड़े तमाम वीडियो इंटरनेट की दुनिया में छाए हुए हैं। लोग अपने गेमप्ले की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं कि वे कितनी दूर तक पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहे। इन वीडियो पर लाखों व्यूज आ रहे हैं और युवाओं के बीच इस बात की होड़ लगी है कि कौन सबसे ज्यादा देर तक गेम में टिक पाता है। कई जगहों पर दोस्तों के बीच इसके स्कोर को लेकर प्रतिस्पर्धा भी शुरू हो गई है। यह ट्रेंड साबित करता है कि भारत में मोबाइल गेमिंग का दायरा अब सिर्फ रेसिंग या शूटिंग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वास्तविक जीवन के मुद्दों पर आधारित गेम्स भी अब अपनी जगह बना रहे हैं।








