चार दशकों के लंबे प्रशासनिक सफर के बाद राजनीति में नया कदम
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी में शीर्ष पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके और लंबे समय तक कानून-व्यवस्था की निगरानी करने वाले एम नागेश्वर राव अब चुनावी और राजनीतिक जमीन पर उतर चुके हैं। सुरक्षा, एडमिनिस्ट्रेशन और आंतरिक व्यवस्थाओं को करीब चार दशक तक संभालने के बाद उन्होंने अपनी एक नई पहचान गढ़ी है। इस बदलाव को देश के राजनीतिक गलियारों में काफी अहमियत दी जा रही है। पूर्व जांच अधिकारी का इस तरह सीधे राजनीति में आना और एक नए राजनीतिक दल की कमान संभालना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में वैचारिक बहसों को एक नया आयाम मिलने वाला है।
काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती को इस घोषणा के लिए चुने जाने के पीछे एक गहरा वैचारिक संदेश माना जा रहा है। देश के कोने-कोने से पहुंचे पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों की मौजूदगी में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक सुधार अकेले किसी मुल्क की काया नहीं पलट सकते। इसके लिए वैचारिक और सांस्कृतिक चेतना का होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि वे अपने प्रशासनिक और व्यावहारिक अनुभवों को अब देश के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के सुधार में झोंकेंगे।
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सनातन को सिर्फ पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन दर्शन बताने का उद्देश्य
अपनी नई राजनीतिक पारी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए एम नागेश्वर राव ने कहा कि सनातन संस्कृति को केवल कुछ खास कर्मकांडों या पूजा के तौर-तरीकों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह पूरी तरह से एक जीवन दृष्टि है जो मानवीय मूल्यों, सत्य, धर्म, कर्तव्यपरायणता, न्याय, संयम और करुणा के शाश्वत सिद्धांतों पर टिकी हुई है। पार्टी का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है और यह किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के विरोध में नहीं खड़ी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक और आर्थिक तरक्की के मामले में देश को दुनिया के साथ कदमताल करना चाहिए, लेकिन अपनी प्राचीन सभ्यता और जड़ों से कभी दूर नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि विकास की अंधी दौड़ में अगर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बिसरा देंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के पास अपनी जड़ों से जुड़ाव का कोई ठोस आधार नहीं बचेगा। इसलिए आधुनिकता और प्राचीन ज्ञान-परंपरा का संतुलन ही एक सशक्त राष्ट्र की वास्तविक पहचान तय करता है.
शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर टिकी है पार्टी की मूल रूपरेखा
सर्वजन सनातन पार्टी की वैचारिक नींव को स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कुल चार प्रमुख स्तंभों का खाका खींचा है। सबसे पहला स्तंभ शिक्षा है, जिसके तहत आधुनिक और विश्वस्तरीय ज्ञान के साथ-साथ भारतीय सभ्यता और इतिहास के गौरव को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई है। दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ स्वास्थ्य है, जिसमें अत्याधुनिक चिकित्सा विज्ञान और देश की प्राचीन भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों का अनूठा समन्वय स्थापित करके हर नागरिक तक सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का वादा किया गया है।
तीसरा स्तंभ आजीविका से जुड़ा हुआ है, जिसके अंतर्गत देश के युवाओं, किसानों, छोटे व्यापारियों, मजदूरों और कुशल कारीगरों के लिए सम्मानजनक रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया गया है। चौथा और अंतिम स्तंभ सभ्यतागत जुड़ाव का है, जिसमें देश की भाषा, लोक कलाओं, सांस्कृतिक संस्थाओं और ऐतिहासिक तीर्थ स्थलों को राष्ट्र की मुख्य ताकत के रूप में संजोए रखने का संकल्प लिया गया है। इन सभी बिंदुओं के जरिए पार्टी ने एक समग्र विकास मॉडल पेश करने का दावा किया है।
मंदिरों और तीर्थ स्थलों को सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र बनाने पर जोर
पार्टी की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए राव ने इस बात पर खास जोर दिया कि देश के मंदिर और प्राचीन तीर्थ स्थल केवल मूक आस्था या पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं होने चाहिए। उन्हें समाज की जीवित सांस्कृतिक संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जहां पारदर्शिता, आपसी सम्मान और आम नागरिकों की सार्थक व सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उनका मानना है कि ये स्थल समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन के मूल्यों को केवल चुनावी नारों या राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इन्हें देश की शिक्षा नीति, स्वास्थ्य व्यवस्था, शासन के तौर-तरीकों और रोजमर्रा के सामाजिक जीवन में साफ तौर पर उतरना चाहिए। तभी जाकर समाज का वास्तविक और सर्वांगीण कल्याण संभव हो सकेगा। इस पूरी रूपरेखा के माध्यम से पार्टी ने आम जनता के बीच एक अलग तरह की वैचारिक राजनीति की शुरुआत करने का दावा किया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और भविष्य की रणनीति
पूर्व सीबीआई निदेशक के इस तरह अचानक सक्रिय राजनीति में उतरने से सियासी जानकारों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लगभग चार दशक तक खाकी और फाइलों के बीच काम करने वाले एक सख्त प्रशासक का इस प्रकार वैचारिक और राजनीतिक मंच पर आना कई मायनों में नया प्रयोग माना जा रहा है। पार्टी के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों जैसे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत तीर्थानंद, ऋतु राठौड़, महासचिव राजा सक्षम सिंह योगी और प्रवक्ता बबीता शर्मा की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक लंबी और सुनियोजित रणनीति तैयार की जा रही है।
आने वाले समय में यह दल किस तरह से देश के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर पाता है और जनता के बीच अपनी वैचारिक पकड़ कितनी मजबूत कर पाता है, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, काशी से शुरू हुआ यह राजनीतिक सफर राष्ट्रीय पटल पर बहस का एक नया केंद्र जरूर बन गया है, जहां प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक मूल्यों के मेल का दावा किया जा रहा है।
"भारत का नवनिर्माण सिर्फ प्रशासनिक सुधारों से नहीं हो सकता। देश को आधुनिक विकास की राह पर बढ़ना चाहिए, लेकिन अपनी सभ्यता की जड़ों से मजबूती से जुड़े रहकर। सनातन सिर्फ पूजा का तरीका नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक मुकम्मल नजरिया है।" — एम. नागेश्वर राव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वजन सनातन पार्टी






