झारखंड के राशन डीलरों का बकाया कमीशन और केंद्र सरकार पर तीखा हमला
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों की भूमिका सबसे अहम होती है। राज्य के गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक हर महीने मिलने वाला राशन इन्हीं डीलरों के माध्यम से पहुंचता है। लेकिन पिछले कुछ समय से झारखंड के इन दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह उनके कमीशन का समय पर भुगतान न होना है। इस मामले को लेकर झारखंड सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की कथित उदासीनता का सीधा खामियाजा राज्य के हजारों राशन डीलरों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह रेखांकित किया कि राज्य सरकार इन दुकानदारों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। उनका दावा है कि विभागीय स्तर पर लंबित भुगतानों को छुड़ाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि दुकानदारों को किसी भी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बकाया भुगतान पर टिकी निगाहें
राशन डीलरों के सामने आ रही वित्तीय अड़चनों का मुख्य कारण पिछले दो वित्तीय वर्षों का बकाया कमीशन है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग सात महीनों का कमीशन का भुगतान अभी तक पूरी तरह से क्लियर नहीं हो पाया है। मंत्री इरफान अंसारी ने साफ किया है कि इस लंबित राशि को जारी करवाने के लिए राज्य प्रशासन लगातार केंद्र के संपर्क में बना हुआ है और इस दिशा में जल्द ही ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है।
राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग का तर्क है कि इस तरह के मामलों में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। चूंकि राशन वितरण योजना का बड़ा हिस्सा केंद्रीय योजनाओं और दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होता है, इसलिए डीलरों के कमीशन का एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय फंड्स पर निर्भर करता है। मंत्री का यह भी कहना है कि हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से कुछ राशि उपलब्ध कराई गई थी, जिसके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन शेष बकाया राशि के लिए अभी भी केंद्रीय स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
पीडीएस सिस्टम की रीढ़ हैं डीलर, उनके परिवारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राशन डीलरों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे केवल विक्रेता नहीं, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बस्तियों तक, राशन की दुकानों के जरिए ही सरकार की कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। यदि ये डीलर आर्थिक तंगी के दौर से गुजरेंगे, तो पूरी वितरण प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
"हमारे डीलर इस पूरे पीडीएस सिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, उनके भी परिवार हैं और उनकी भी जिम्मेदारियां हैं। इसलिए उनके कमीशन का समय पर भुगतान करना हमारी जिम्मेदारी है। सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है।" — डॉ. इरफान अंसारी, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, झारखंड
उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक डीलर को मिलने वाला कमीशन उसकी आजीविका का मुख्य साधन होता है। महीनों तक भुगतान न मिलने से उनके सामने दुकान का किराया, बिजली बिल और घर चलाने तक का संकट खड़ा हो जाता है। इसलिए इस विषय को केवल एक प्रशासनिक फाइल या वित्तीय लेनदेन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार का रुख और आगे की रणनीति
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार इस मुद्दे पर शुरुआत से ही मुखर रही है। राज्य के मुख्यमंत्री ने भी कई मौकों पर केंद्र सरकार से यह आग्रह किया है कि झारखंड के पीडीएस डीलरों के बकाए का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। राज्य सरकार का मानना है कि यदि केंद्र की तरफ से समय पर फंड ट्रांसफर नहीं किया जाता है, तो जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन छोटे दुकानदारों का मनोबल टूट सकता है, जिसका असर सीधे तौर पर आम जनता को मिलने वाले राशन पर पड़ेगा।
खाद्य आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार केंद्रीय मंत्रालयों को पत्र भेज रहे हैं और स्थिति से अवगत करा रहे हैं। विभाग की तरफ से यह भरोसा भी दिलाया गया है कि आगामी त्योहारों और वित्तीय चक्र को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। राज्य सरकार का यह प्रयास है कि डीलरों को आगे से इस तरह के लंबे इंतजार या संकट का सामना न करना पड़े, जिसके लिए एक स्थायी व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
निष्कर्ष: जल्द समाधान की उम्मीद और जनता पर प्रभाव
अंततः यह पूरा मामला इस बात पर केंद्रित है कि कैसे प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों के बीच जमीनी स्तर के कामगार पिस जाते हैं। झारखंड में 25 हजार से अधिक राशन डीलरों का भविष्य इस बात पर टिका है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस गतिरोध को कितनी जल्दी समाप्त करती हैं। मंत्री इरफान अंसारी के बयानों से यह साफ है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में कितना त्वरित संज्ञान लेती है और झारखंड के इन अन्न दूतों को उनका हक कितनी जल्दी मिलता है।








