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जैक डोर्सी का ऐप 'बिटचैट' भारत में बैन: एपल स्टोर से हटाया गया ऑफलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, जानें पूरा मामला

ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी के ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप 'बिटचैट' को भारत में एपल ऐप स्टोर से हटा दिया गया है। कंपनी का दावा है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय के निर्देश पर आईटी एक्ट की धारा 69(A) के तहत की गई है।
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तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•4 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•30
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जैक डोर्सी का ऐप 'बिटचैट' भारत में बैन: एपल स्टोर से हटाया गया ऑफलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, जानें पूरा मामला
📷 जैक डोर्सी का ऐप 'बिटचैट' भारत में बैन: एपल स्टोर से हटाया गया ऑफलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, जानें पूरा मामला — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • एपल ने भारत के ऐप स्टोर से ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप 'बिटचैट' को पूरी तरह से हटा दिया है।
  • ट्विटर के को-फाउंडर और बिटचैट के डेवलपर जैक डोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी पुष्टि की है।
  • आईटी मंत्रालय (MeitY) की मांग पर आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69(A) के तहत यह एक्शन लिया गया है।
  • यह ऐप बिना इंटरनेट और सेलुलर नेटवर्क के ब्लूटूथ और वाई-फाई के जरिए मैसेज भेजने की सुविधा देता है।

एपल ऐप स्टोर से हटा जैक डोर्सी का चर्चित मैसेजिंग ऐप

टेक जगत में इन दिनों एक नया विवाद गरमाता नजर आ रहा है। ट्विटर यानी वर्तमान में 'एक्स' (X) के सह-संस्थापक और दिग्गज टेक उद्यमी जैक डोर्सी के स्वामित्व वाला ऑफलाइन मैसेजिंग एप्लिकेशन 'बिटचैट' (Bitchat) अब भारतीय यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। दिग्गज टेक कंपनी एपल ने इस ऐप को भारत के अपने ऐप स्टोर से हटा दिया है। इस बड़े घटनाक्रम की जानकारी खुद जैक डोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए साझा की है। डोर्सी द्वारा दी गई जानकारी के बाद से ही टेक इंडस्ट्री और साइबर सुरक्षा के गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

एपल की तरफ से इस ऐप के डेवलपर को एक आधिकारिक नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बिटचैट को भारतीय कानून के नियमों और कंपनी की ऐप समीक्षा गाइडलाइंस का उल्लंघन करने के आरोप में हटाया जा रहा है। एपल के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट या तकनीकी प्रावधान मौजूद है, जिसे भारत में अवैध माना गया है। इसके चलते कंपनी को भारतीय नियामकों और सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए यह सख्त कदम उठाना पड़ा है।

भले ही यह ऐप दुनिया के अन्य देशों के ऐप स्टोर पर अभी भी सुलभ हो, लेकिन भारत के संदर्भ में इसके टेस्ट वर्जन तक को भी ब्लॉक कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि ऑफलाइन संचार और एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसफर से जुड़ी तकनीकी नीतियों पर भारत सरकार की कड़ी नजर है, जिसके चलते इस प्रकार के ऐप्स पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही है।

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भारत सरकार के किस आदेश के तहत हुई यह कार्रवाई?

सामने आई रिपोर्टों और जैक डोर्सी द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई के पीछे देश का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) है। मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 यानी IT Act की धारा 69(A) के प्रावधानों का हवाला देते हुए ऐप को हटाने की औपचारिक मांग की थी। यह धारा केंद्र सरकार को देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में किसी भी डिजिटल कंटेंट या प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने का असीमित अधिकार देती है।

इससे पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस तरह के टूल्स पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। बीते कुछ महीनों पहले गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की साइबर शाखा ने भी गिटहब (GitHub) से इस ऐप से जुड़ी सामग्री को हटाने के निर्देश दिए थे। सरकारी एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के अनियंत्रित और विकेंद्रीकृत संचार माध्यमों का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों या कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए किया जा सकता है।

आईटी एक्ट की धारा 69(A) के तहत सरकार के पास यह शक्ति होती है कि वह किसी भी डिजिटल मध्यस्थ (Intermediary) को जनता तक पहुंच रोकने के लिए बाध्य कर सके। यही कारण है कि एपल जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी को भी स्थानीय कानूनों और नियमों के आगे झुकते हुए इस पॉपुलर ऐप को अपने स्टोर से हटाना पड़ा है।

क्या है 'बिटचैट' ऐप और यह कैसे करता है काम?

आम मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल से बिल्कुल अलग तकनीक पर काम करने वाला 'बिटचैट' एक अनोखा ऑफलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई राउटर या सेलुलर डेटा के भी काम करने में सक्षम है। यह ब्लूटूथ और पीयर-टू-पीयर (P2P) तकनीक का उपयोग करके पास मौजूद अन्य डिवाइस के साथ सीधा संपर्क स्थापित करता है।

इस तकनीक के जरिए यूजर इंटरनेट के बिना भी अपने आस-पास के लोगों को संदेश भेज सकते हैं। हाल के दिनों में दुनिया भर में हुए कई बड़े विरोध प्रदर्शनों (CJP Protests) और आंदोलनों के दौरान इस ऐप का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा था। GenZ और युवा वर्ग के बीच यह ऐप इसलिए लोकप्रिय हो गया क्योंकि सरकारें या स्थानीय प्रशासन इंटरनेट शटडाउन करके प्रदर्शनकारियों के संचार को नहीं रोक पा रहे थे।

हालांकि, यही खूबी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन जाती है। जब किसी संचार माध्यम पर सरकार या किसी केंद्रीय सर्वर का नियंत्रण नहीं होता और सभी संदेश पूरी तरह से विकेंद्रीकृत (Decentralized) तरीके से ट्रांसफर होते हैं, तो आपराधिक या देश-विरोधी गतिविधियों को ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। यही सुरक्षा संबंधी चिंता इस ऐप पर बैन की मुख्य वजह बनी है।

जैक डोर्सी और सरकारी नीतियों के बीच पुराना टकराव

ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी का भारतीय हुकूमत के साथ तकनीकी और वैचारिक असहमतियों का इतिहास पुराना रहा है। जब डोर्सी ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, तब भी भारत में किसान आंदोलन और अन्य मौकों पर कंटेंट हटाने के सरकारी आदेशों को लेकर कई बार खींचतान देखने को मिली थी। डोर्सी ने पहले भी सार्वजनिक मंचों पर यह आरोप लगाया था कि उन्हें भारत सरकार की तरफ से आलोचनात्मक आवाजों को दबाने और अकाउंट्स ब्लॉक करने का भारी दबाव झेलना पड़ा था।

अब 'बिटचैट' के मामले में एक बार फिर जैक डोर्सी और भारतीय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। हालांकि, इस बार मामला सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट सेंसरशिप का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक ऐसे ऑफलाइन मैसेजिंग टूल को प्रतिबंधित करने का है जो किसी भी सरकारी नियंत्रण या टेलीकॉम नेटवर्क के दायरे से बाहर रहकर काम करता है।

"भारत सरकार ने हमारे ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप बिटचैट को आधिकारिक तौर पर ऐप स्टोर से हटवा दिया है। एपल के नोटिस में साफ कहा गया है कि यह एक्शन आईटी मंत्रालय की मांग और आईटी एक्ट के नियमों के तहत लिया गया है।" — जैक डोर्सी, डेवलपर एवं को-फाउंडर

राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता के बीच नाजुक संतुलन

आज के डिजिटल दौर में जहां एक तरफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत गोपनीयता (Privacy) को सर्वोपरि माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ देश की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद या उपद्रव रोकने की जिम्मेदारी भी सरकारों के कंधों पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन मेश नेटवर्किंग ऐप्स यदि बिना किसी निगरानी के बड़े पैमाने पर चलन में आ जाएं, तो पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए किसी भी बड़ी साजिश का पर्दाफाश करना बेहद कठिन हो जाएगा।

भारत सरकार लगातार यह रुख अपनाती रही है कि डिजिटल स्पेस में कानून से ऊपर कोई भी तकनीक नहीं हो सकती। कंपनियों को देश के कानूनों का पालन करना ही होगा। बिटचैट पर की गई यह कार्रवाई इसी बड़ी नीति का हिस्सा है, जो यह संदेश देती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

एपल ऐप स्टोर से बिटचैट का हटाया जाना यह साबित करता है कि भारत सरकार देश की डिजिटल सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही है। आने वाले समय में अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप स्टोर भी ऐसे अनियंत्रित संचार माध्यमों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं। तकनीकी नवाचार और सरकारी नियमों के बीच का यह संघर्ष आने वाले दिनों में और अधिक गहराने की पूरी संभावना है, जिस पर पूरी दुनिया की तकनीकी और कानूनी बिरादरी की पैनी नजर बनी हुई है।

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