जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ: वैश्विक निवेशकों के साथ बैठकों का दौर पूरा
देश के टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ को बाजार में उतारने की दिशा में बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की इस डिजिटल आर्म ने अपने आईपीओ से जुड़े दस्तावेजों को अंतिम रूप देने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों और सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने हाल ही में दुनिया भर के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में संभावित बड़े निवेशकों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।
इन निवेशकों के साथ हुई बैठकों और रोड शो का दायरा काफी बड़ा था, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात यानी दुबई, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देश शामिल रहे। इन महत्वपूर्ण बैठकों और निवेशकों को आकर्षित करने की मुहिम का नेतृत्व रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी और रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ईशा अंबानी ने किया। इस वैश्विक स्तर की तैयारी से यह साफ जाहिर होता है कि कंपनी अपने इस मेगा आईपीओ को लेकर कितनी बड़ी योजना पर काम कर रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वैश्विक रोड शो किसी भी बड़े आईपीओ से पहले निवेशकों का भरोसा जीतने और संस्थागत निवेशकों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम होते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी बड़ी और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनी जब वैश्विक बाजार में उतरती है, तो दुनिया भर के निवेशकों की नजरें उस पर टिक जाती हैं। कंपनी की इस सक्रियता से साफ है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को एक ऐतिहासिक और बड़ा अवसर मिलने जा रहा है।
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बाजार में लॉन्चिंग की संभावित तारीखें और ग्रे मार्केट की हलचल
हालांकि जियो प्लेटफॉर्म्स की तरफ से अभी तक आईपीओ की लॉन्चिंग की किसी आधिकारिक और पक्की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन वित्तीय बाजार के गलियारों में इसे लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इस आईपीओ को साल के आखिर तक या त्योहारी सीजन यानी दिवाली के आसपास बाजार में उतारा जा सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि स्थितियां अनुकूल रहीं तो अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्ते तक भी शेयर बाजार में इसकी एंट्री हो सकती है।
दूसरी ओर, आम निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी को लेकर बना हुआ है। वित्तीय नियमों के मुताबिक, किसी भी आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम तभी खुलकर सामने आता है जब कंपनी अपने आधिकारिक प्राइस बैंड की घोषणा करती है। एक बार जियो प्लेटफॉर्म्स की ओर से शेयरों का प्राइस बैंड तय कर दिया जाएगा, उसके बाद ग्रे मार्केट में इसके शेयरों की खरीद-फरोख्त और प्रीमियम का असली रुख स्पष्ट हो पाएगा।
बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि निवेशकों को किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और सेबी की मंजूरियों पर नजर रखनी चाहिए। जैसे-जैसे रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी आरएचपी फाइल करने की प्रक्रिया पूरी होगी, लॉन्चिंग की तारीखों को लेकर स्थिति और अधिक साफ होती चली जाएगी।
मार्च और अगस्त के बीच सेबी की मंजूरी और ड्राफ्ट पेपर की अहम बातें
इस मेगा आईपीओ की रूपरेखा बहुत पहले से तैयार की जा रही थी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने इसी साल जून के महीने में मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास अपने ड्राफ्ट आईपीओ पेपर फाइल किए थे। इसके बाद लंबी समीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के दौर से गुजरते हुए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने 28 अगस्त को अपनी अंतिम टिप्पणियां और मंजूरी जारी कर दी। सेबी की हरी झंडी मिलने के बाद अब कंपनी के लिए शेयर बाजार में उतरने का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है।
जून में दाखिल किए गए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, कंपनी की योजना लगभग 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की है। यह संख्या इश्यू के बाद के कुल इक्विटी बेस का करीब 2.9 प्रतिशत बैठती है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने ड्राफ्ट पेपर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए एक खास शेयरहोल्डर रिजर्वेशन कैटेगरी का भी प्रावधान रखा है। हालांकि, इस आरक्षित कोटे के तहत कितने प्रतिशत शेयर रखे जाएंगे, इसका सटीक खुलासा फाइनल आरएचपी यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस आने के बाद ही हो सकेगा।
कारोबारी जगत के जानकारों का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की इस पेशकश का मूल्यांकन यानी वैल्यूएशन करीब 137 अरब डॉलर यानी लगभग 137 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है। इतनी बड़ी वैल्यूएशन के साथ यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित आईपीओ में से एक बनने जा रहा है, जिस पर हर निवेशक की पैनी नजर बनी हुई है।
आईपीओ से मिलने वाली रकम का कहां और कैसे होगा इस्तेमाल
किसी भी बड़ी कंपनी के आईपीओ को लेकर यह जानना बेहद जरूरी होता है कि उससे जुटाई जाने वाली पूंजी का उपयोग किस काम में किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट दस्तावेजों के मुताबिक, इस आईपीओ के जरिए आने वाली भारी-भरकम रकम का एक बहुत बड़ा हिस्सा कंपनी के वित्तीय संतुलन को सुधारने में लगाया जाएगा। इस फंड का मुख्य उपयोग रिलायंस जियो इन्फोकॉम पर चल रहे लगभग 27,500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बकाया कर्ज को चुकाने या उसका पहले ही भुगतान करने में किया जाएगा।
"जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम केवल पूंजी जुटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह कंपनी के वित्तीय ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने और भविष्य की डिजिटल क्रांति को नई रफ्तार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।"— वित्तीय बाजार विशेषज्ञ
कर्ज के बोझ को कम करने के बाद, आईपीओ से बचने वाली शेष राशि का उपयोग कंपनी अपनी सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों, तकनीक के विस्तार, नेटवर्क को अपग्रेड करने और अत्याधुनिक डिजिटल सेवाओं के विकास के लिए करेगी। कर्ज मुक्त होने से कंपनी की वित्तीय सेहत में और अधिक सुधार होगा, जिसका सीधा फायदा भविष्य में शेयरधारकों को मिलने की उम्मीद है।
भारतीय टेलीकॉम बाजार में जियो का दबदबा और भविष्य की संभावनाएं
वित्तीय और कॉर्पोरेट आंकड़ों पर नजर डालें तो जियो इन्फोकॉम वर्तमान में भारतीय टेलीकॉम बाजार की सबसे बड़ी और ताकतवर ताकत बनकर उभरी है। कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून तक जियो के कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या बढ़कर लगभग 50.6 करोड़ तक पहुंच चुकी है। भारतीय मोबाइल बाजार में अकेले जियो की हिस्सेदारी लगभग 39.29 प्रतिशत है, जो इसे देश का नंबर एक ऑपरेटर बनाती है।
केवल मोबाइल सेगमेंट में ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड बाजार में भी जियो ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। फिक्स्ड-लाइन क्षेत्र में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 32.89 प्रतिशत दर्ज की गई है। इतने विशाल ग्राहक आधार और मजबूत बुनियादी ढांचे के चलते निवेशकों के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार की दशा और दिशा दोनों को बदल सकता है। निवेशकों के लिए यह देश की सबसे बड़ी डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी में हिस्सेदारी हासिल करने का एक बेहतरीन मौका साबित होने वाला है, बशर्ते वे सही समय पर और सही रणनीति के साथ निवेश का फैसला लें।




