मारुति सुजुकी की गाड़ियों में जल्द दिखेगा बड़ा बदलाव
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देश की दिग्गज कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बेहद अहम और दूरदर्शी योजना तैयार की है। आने वाले समय में कंपनी अपनी सबसे सस्ती और बजट सेगमेंट की कारों में भी एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS जैसी आधुनिक तकनीक को स्टैंडर्ड तौर पर उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। अब तक इस तरह के हाई-एंड फीचर्स केवल महंगी और लग्जरी गाड़ियों तक ही सीमित रहे हैं, लेकिन मारुति के इस कदम से आम आदमी की जेब पर भारी पड़े बिना उसकी सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी।
भारतीय सड़कों पर लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या और ट्रैफिक के दबाव के चलते सड़क हादसों के आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं। ऐसे में ऑटोमोबाइल कंपनियों की जिम्मेदारी सिर्फ माइलेज या कीमत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पैसेंजर सेफ्टी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। मारुति सुजुकी इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी गाड़ियों के बेसिक स्ट्रक्चर को ही पूरी तरह सुरक्षित बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि हर वर्ग के ग्राहक को आधुनिक सुरक्षा कवच मिल सके।
कंपनी का मानना है कि केवल चुनिंदा प्रीमियम गाड़ियों में ही सुरक्षा के आधुनिक उपकरण देना सड़क हादसों को रोकने के लिए नाकाफी है। जब तक देश की सड़कों पर सबसे ज्यादा दौड़ने वाली बजट और किफायती कारों में ये फीचर्स नहीं आएंगे, तब तक दुर्घटनाओं में कमी लाना मुश्किल होगा। यही वजह है कि मारुति सुजुकी ने अपनी पूरी आने वाली लाइनअप को ध्यान में रखते हुए इस सेफ्टी टेक्नोलॉजी को मास मार्केट तक पहुंचाने का खाका तैयार किया है।
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राइट एडीएस अप्रोच और लागत घटाने की रणनीति
किसी भी किफायती कार में आधुनिक तकनीक को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती उसकी कीमत को नियंत्रित रखना होता है। यदि तकनीक बहुत महंगी होगी, तो आम ग्राहक उसे खरीदने से कतराएंगे। इस समस्या का समाधान निकालते हुए सुजुकी ने एक 'राइट एडीएस अप्रोच' तैयार की है। इसके तहत केवल उन्हीं जरूरी फीचर्स को स्टैंडर्ड बनाया जाएगा जो सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होते हैं, जबकि अन्य लग्जरी और अतिरिक्त आराम वाले फीचर्स को केवल उच्च वेरिएंट्स के लिए आरक्षित रखा जा सकता है।
सुजुकी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर कत्सुहिरो काटो ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि महंगी तकनीक को कुछ खास गाड़ियों तक सीमित रखने से बड़े पैमाने पर सुरक्षा के लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सकता। कंपनी का मुख्य फोकस ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन डिपार्चर प्रिवेंशन जैसे बेहद जरूरी सेफ्टी फीचर्स को हर कार का हिस्सा बनाने पर है। इसके लिए लागत को कम रखने के वास्ते वैकल्पिक और किफायती इंजीनियरिंग समाधानों की तलाश की जा रही है।
कीमत को कम रखने के लिए कंपनी महंगे सेंसर के बजाय हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई चिप्स के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। इसके साथ ही, ड्राइवर और कार में बैठे अन्य यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले सिस्टम को भी इस तकनीक के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। इससे न केवल कार की सुरक्षा क्षमता बेहतर होगी, बल्कि उत्पादन की लागत भी नियंत्रण में रहेगी, जिसका सीधा फायदा कार खरीदने वाले ग्राहकों को मिलेगा।
"महंगे ADAS सिस्टमों को सिर्फ कुछ लग्जरी कारों में फिट करना एक्सीडेंट को कम नहीं कर सकता है। हमारा मकसद सुरक्षा फीचर्स को किफायती बनाकर हर नागरिक तक पहुंचाना है।" — कत्सुहिरो काटो, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, सुजुकी
सेंट्रल जोन ईसीयू और सिंपल इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर
मारुति सुजुकी की यह नई प्लानिंग उसकी भविष्य की बड़ी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। आधुनिक कारों में जटिल वायरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को संभालना निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या से पार पाने के लिए कंपनी आने वाले समय में अपनी गाड़ियों के इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर को काफी सरल और प्रभावी बनाने जा रही है।
इस नई रणनीति के तहत कार के भीतर होने वाले कम्यूनिकेशन, पावर डिस्ट्रीब्यूशन और बॉडी-कंट्रोल से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण फंक्शंस को एक सेंट्रल जोन इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट यानी ईसीयू से जोड़ा जाएगा। इससे गाड़ी का इंटरनल सिस्टम न केवल ज्यादा तेज काम करेगा, बल्कि तकनीकी खराबी की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी। इस सरलीकरण से कार का कुल वजन भी घटेगा, जिससे ईंधन दक्षता या बैटरी रेंज में भी सुधार देखने को मिलेगा।
कंपनी का यह भी कहना है कि सुरक्षा को लेकर उनका दृष्टिकोण दोतरफा है। पहला उद्देश्य ADAS जैसी तकनीकों का उपयोग करके सड़क पर दुर्घटना होने की नौबत ही न आने देना है, और दूसरा यदि दुर्भाग्यवश कोई क्रैश हो भी जाए, तो गाड़ी में बैठे यात्रियों को मजबूत बॉडी शेल और एयरबैग्स के जरिए पूरी सुरक्षा प्रदान करना है।
नए टर्बो-पेट्रोल इंजन और हाइब्रिड तकनीक पर भी काम
सेफ्टी फीचर्स के अलावा मारुति सुजुकी और उसकी मूल कंपनी सुजुकी मोटर जापान पावरट्रेन तकनीक में भी बड़े बदलाव करने की तैयारी में जुटी हुई है। कंपनी साल 2035 तक के लिए अपनी ग्रीन और पावरफुल टेक्नोलॉजी रोडमैप तैयार कर चुकी है। इसी कड़ी में नए डायरेक्ट-इंजेक्शन टर्बोचार्ज्ड इंजन विकसित किए जा रहे हैं जो भविष्य की जरूरतों और कड़े प्रदूषण मानदंडों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी नए 1.2-लीटर तीन-सिलेंडर और 1.5-लीटर चार-सिलेंडर टर्बो-पेट्रोल इंजन पर काम कर रही है। ये इंजन पेट्रोल के अलावा एथनॉल ब्लेंडिंग यानी ई100, सीएनजी और सीबीजी जैसे मल्टीपल फ्यूल ऑप्शंस के साथ भी आसानी से काम करने के लिए सक्षम होंगे। सुजुकी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इन इंजनों की थर्मल एफिशिएंसी को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने का है, जिससे गाड़ियों की पावर और माइलेज दोनों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
मारुति सुजुकी का यह नया कदम भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। जिस तरह से पिछले कुछ सालों में भारतीय ग्राहक कारों में सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं, उसे देखते हुए बजट कारों में ADAS जैसी तकनीक का आना एक क्रांतिकारी बदलाव होगा। हालांकि अभी यह सभी योजनाएं डेवलपमेंट और रिसर्च के चरण में हैं, लेकिन जिस तेजी से कंपनी इस पर काम कर रही है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में मारुति की सस्ती गाड़ियाँ भी दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों को टक्कर देती नजर आएंगी।








