याददाश्त कमजोर होने को लेकर आम लोगों में फैली बड़ी गलतफहमी
जब भी कोई व्यक्ति अपनी बात भूलने लगता है या पुरानी चीजें उसके जहन से उतरने लगती हैं, तो परिवार और समाज में तुरंत यह चिंता बैठ जाती है कि कहीं वह व्यक्ति अल्जाइमर या डिमेंशिया की चपेट में तो नहीं आ गया है। इस तरह के न्यूरोलॉजिकल विकारों को लेकर लोगों के मन में एक गहरा डर बैठा हुआ है कि इनका कोई इलाज नहीं है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान का नजरिया इस मामले में काफी अलग और उम्मीद बंधाने वाला है। हर बार भूलने की आदत या याददाश्त का कमजोर होना किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी की निशानी नहीं होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार हमारे शरीर में चल रहे आंतरिक असंतुलन या जीवनशैली से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां भी दिमागी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इन छिपे हुए कारणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो याददाश्त को दोबारा पूरी तरह पटरी पर लाया जा सकता है। इसके लिए किसी भी तरह की घबराहट या डर की जगह तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत होती है।
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थायराइड और विटामिन की कमी का सीधा असर
याददाश्त कमजोर होने के पीछे कई ऐसे शारीरिक कारण जिम्मेदार होते हैं जिन पर आम तौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। हाइपोथायराइडिज्म, यानी थायराइड ग्रंथि का सुस्त पड़ जाना, शरीर में थकान के साथ-साथ सोचने की गति को भी काफी धीमा कर देता है। ऐसे मरीजों को चीजें याद रखने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा, शरीर में विटामिन बी12 की कमी सीधे तौर पर हमारे तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है।
विटामिन बी12 की कमी से मूड में उतार-चढ़ाव, हाथों और पैरों में लगातार झनझनाहट महसूस होना, अत्यधिक कमजोरी और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां पैदा होने लगती हैं। चिकित्सा शोधों में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि थायराइड हार्मोन में गड़बड़ी और एकाग्रता में कमी के बीच गहरा संबंध होता है। सही समय पर इन कमियों का इलाज कराने से दिमागी लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
नींद की कमी और स्लीप एप्रिया का दिमागी सेहत पर वार
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भरपूर और चैन की नींद लेना लोगों के लिए किसी लग्जरी जैसा हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नींद की कमी सीधे तौर पर आपके दिमाग के फ्रंटल लोब के कामकाज को बाधित करती है? जब दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता है, तो ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटने लगती है और छोटी-छोटी बातें दिमाग से स्लिप होने लगती हैं।
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्रिया एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है। इस वजह से दिमाग को ऑक्सीजन की पूरी आपूर्ति नहीं मिल पाती है, जो आगे चलकर गंभीर भूलने की बीमारी का रूप ले सकती है। इसलिए रात की अच्छी नींद को नजरअंदाज करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है और यह याददाश्त की कमजोरी का एक बड़ा कारण बन सकता है।
एमआरआई स्कैन से बीमारी के शुरुआती संकेतों की मिलती है जानकारी
हाल के दिनों में मेडिकल टेक्नोलॉजी ने इतनी तरक्की कर ली है कि गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों को उनके शुरुआती दौर में ही पकड़ा जा सकता है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, आधुनिक एमआरआई तकनीक के जरिए दिमाग की बनावट में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों का पता लगाया जा सकता है। ये बदलाव अक्सर बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखने से कई साल पहले ही मस्तिष्क में शुरू हो जाते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि एमआरआई स्कैन के माध्यम से कॉर्टेक्स यानी दिमाग की बाहरी परत के बारीक अंतर को पहचाना जा सकता है। जब शरीर में कुछ खास प्रोटीन की मात्रा बढ़ने लगती है, तो दिमाग की संरचना में हल्के बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। समय पर इन बदलावों को भांप लेने से डॉक्टरों को सटीक इलाज शुरू करने में बहुत मदद मिलती है।
बच्चों की पढ़ाई में आ रही अचानक गिरावट के पीछे छुपे कारण
यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बार कम उम्र के बच्चों में भी देखने को मिलती है। यदि कोई बच्चा जो पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा हो, अचानक से कमजोर होने लगे या उसका मन पढ़ाई से उचटने लगे, तो माता-पिता अक्सर इसे मोबाइल या स्क्रीन टाइम की लत मान लेते हैं। हालांकि, हर बार वजह इतनी सामान्य नहीं होती है।
बाल रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजिस्ट इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों के व्यवहार में अचानक आने वाले ऐसे बदलाव किसी छिपे हुए मानसिक तनाव या अंदरूनी न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। ऐसे में बिना डांटे-फटकारे सबसे पहले स्कूल के शिक्षकों से बात करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर किसी बाल न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करना समझदारी होती है।
"हर बार याददाश्त कमजोर होने का मतलब डिमेंशिया या अल्जाइमर नहीं होता। थायराइड, विटामिन बी12 की कमी, तनाव और नींद की गड़बड़ी जैसे कई कारण ऐसे हैं जिनका समय पर इलाज करने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।" — डॉ. बाला राजा शेखर चंद्र यतुकुरी, सीनियर कंसलटेंट न्यूरो सर्जन, यशोदा हॉस्पिटल्स








