भारतीय बाजार में लगातार बढ़ रहा है सेकेंड हैंड लग्जरी कारों का क्रेज
ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले कुछ सालों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आज का आम ग्राहक केवल नई गाड़ियां खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सेकेंड हैंड मार्केट में भी बेहतरीन डील्स तलाश रहा है। खासकर लग्जरी गाड़ियों के सेगमेंट में पुरानी कारों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। लोग कम कीमत में शानदार ब्रांड्स का अनुभव लेना चाहते हैं, जिसके चलते यूज्ड लग्जरी कार मार्केट तेजी से पांव पसार रहा है।
बदलते दौर में लोग अब यह समझ चुके हैं कि नई लग्जरी कार शोरूम से बाहर निकलते ही अपनी कीमत का एक बड़ा हिस्सा गंवा देती है। ऐसे में तीन से चार साल पुरानी गाड़ियां आधी कीमत या उससे भी कम दाम में उपलब्ध हो जाती हैं। इन गाड़ियों की बनावट, इंजन की क्षमता और सुरक्षा मानक इतने उच्च स्तर के होते हैं कि थोड़ा इस्तेमाल होने के बाद भी वे नई जैसी ही परफॉर्मेंस देती हैं। यही वजह है कि मध्यम वर्ग के खरीदार भी अब पुरानी लग्जरी सेडान और एसयूवी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही रिसर्च और सूझबूझ के साथ यदि पुरानी लग्जरी गाड़ी खरीदी जाए, तो यह किसी निवेश से कम नहीं है। हालांकि, बाजार में कई तरह के प्लेटफॉर्म्स और डीलर्स आ चुके हैं जो ग्राहकों को आसान फाइनेंस और वारंटी जैसी सुविधाएं भी मुहैया करा रहे हैं। इससे ग्राहकों का भरोसा इन गाड़ियों पर और अधिक मजबूत हुआ है।
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नई गाड़ियों की तुलना में आधे दाम पर मिल रहे हैं प्रीमियम मॉडल
जब आप बाजार में किसी ब्रांड नई लग्जरी सेडान या एसयूवी को खरीदने निकलते हैं, तो उसकी ऑन-रोड कीमत आसमान छू रही होती है। भारी टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस और इंश्योरेंस के चलते गाड़ी की कुल लागत बहुत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, यदि आप सेकेंड हैंड विकल्प चुनते हैं, तो आपको लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक की सीधी बचत हो जाती है। यह बचत सीधे तौर पर आपके बैंक खाते और बजट पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई प्रीमियम डीजल सेडान अपने लॉन्च के समय या बिल्कुल नई स्थिति में 50 लाख रुपये से अधिक की आती है, तो वही गाड़ी कुछ साल पुरानी होने पर लगभग आधी कीमत यानी 25 से 30 लाख रुपये के दायरे में आसानी से मिल जाती है। इस प्रकार की डील्स उन खरीदारों के लिए वरदान साबित होती हैं जो कम बजट में अपने सपनों की सवारी चलाना चाहते हैं। इसके साथ ही, गाड़ी के मेंटेनेंस और इंश्योरेंस का खर्च भी नई गाड़ी के मुकाबले थोड़ा संभला हुआ रहता है।
वित्तपोषण या कार लोन के मामले में भी अब पुरानी गाड़ियों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थान आसानी से लोन उपलब्ध करा रहे हैं। कम डाउन पेमेंट और आसान मासिक किश्तों (EMI) के विकल्प ने मध्यम वर्ग के लिए लग्जरी कारों का मालिक बनना बहुत आसान कर दिया है। बाजार में मौजूद कई ऑनलाइन सर्टिफाइड प्लेटफॉर्म्स पूरी पारदर्शिता के साथ ऐसी गाड़ियां बेच रहे हैं।
गाड़ी खरीदते समय इन जरूरी बातों का रखें विशेष ध्यान
पुरानी लग्जरी गाड़ी खरीदते समय केवल कीमत देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि कुछ तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहले गाड़ी के पिछले इतिहास यानी सर्विस रिकॉर्ड की जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि गाड़ी की समय पर सर्विसिंग अधिकृत सर्विस सेंटर से ही कराई गई हो या नहीं। इससे इंजन के स्वास्थ्य और गाड़ी के असली रखरखाव का अंदाजा लग जाता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ओनरशिप का है। हमेशा पहली या दूसरी ओनर वाली गाड़ी को प्राथमिकता दें। जितनी कम हाथों से गाड़ी गुजरी होगी, उसकी कंडीशन उतनी ही बेहतर होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, ओडोमीटर रीडिंग यानी गाड़ी ने अब तक कितने किलोमीटर की दूरी तय की है, इसकी भी गहनता से जांच करें। आमतौर पर 50 हजार से 60 हजार किलोमीटर तक चली हुई डीजल गाड़ियां यदि अच्छी हालत में हैं, तो वे लंबा सफर तय कर सकती हैं।
"सेकेंड हैंड लग्जरी कार खरीदते समय केवल चमक-दमक पर न जाएं, बल्कि किसी पेशेवर मैकेनिक से इंजन, ट्रांसमिशन और चेसिस की पूरी जांच जरूर करवाएं। कागजी कार्रवाई में फिटनेस सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस की वैधता जांचना सबसे अहम है।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट और मार्केट एनालिस्ट
कानूनी दस्तावेज और फिटनेस की जांच है सबसे बड़ा कदम
किसी भी वाहन को खरीदने से पहले उसके कागजात की पूरी तसल्ली कर लेना समझदारी का काम है। आरसी (Registration Certificate), पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, वैलिड इंश्योरेंस और यदि गाड़ी पर कोई लोन बकाया है तो एनओसी (No Objection Certificate) की जांच जरूर करें। कई बार लोग जल्दबाजी में कागजी कमियों वाली गाड़ियां खरीद लेते हैं, जिससे बाद में भारी कानूनी और वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सड़क परिवहन नियमों के अनुसार गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट भी वैध होना चाहिए। सफेद या न्यूट्रल रंगों की गाड़ियां रीसेल वैल्यू के मामले में हमेशा आगे रहती हैं क्योंकि उन पर धूल और छोटे-मोटे स्क्रैच कम नजर आते हैं। गाड़ी का एक्सटीरियर और इंटीरियर जितना साफ-सुथरा होगा, उसकी रीसेल वैल्यू भविष्य में उतनी ही बेहतर बनी रहेगी।
अंत में, किसी भी सेकेंड हैंड कार डीलर या व्यक्ति विशेष से वाहन खरीदने से पहले लिखित समझौता जरूर करें। वारंटी या बाय-बैक गारंटी देने वाले अधिकृत प्लेटफॉर्म्स से गाड़ी खरीदना हमेशा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। सही रणनीति और धैर्य के साथ की गई खरीदारी आपके पैसे भी बचाएगी और आपको एक बेहतरीन लग्जरी अनुभव भी देगी।








