नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड जैसा माहौल रहा। सुबह बाजार खुला तो निवेशकों के चेहरे खिले हुए थे क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान में मजबूत शुरुआत कर रहे थे। शुरुआती घंटों में बाजार में अच्छी खरीदारी देखी गई और सेंसेक्स करीब 300 अंकों की तेजी के साथ आगे बढ़ रहा था। इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 22,600 के अहम आंकड़े को पार कर चुका था जिससे बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि आज का दिन मुनाफे वाला साबित होगा।
लेकिन दोपहर के सत्र में तस्वीर पूरी तरह पलट गई और दलाल स्ट्रीट पर अचानक से मंदी के बादल मंडराने लगे। बाजार में ऐसी बिकवाली आई कि देखते ही देखते सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर यानी डे-हाई से करीब 650 अंक नीचे लुढ़क गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ ही घंटों के भीतर सेंसेक्स में कुल मिलाकर 1200 अंकों से ज्यादा की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। अचानक आए इस भूचाल से बाजार में अफरातफरी मच गई और निवेशकों की गाढ़ी कमाई पलक झपकते ही डूब गई।
सुबह की तेजी कैसे बदली अचानक बड़े नुकसान में
बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स की मानें तो इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे थे। सुबह के वक्त गिफ्ट निफ्टी और एशियाई बाजारों से कुछ सकारात्मक संकेत मिले थे जिसके चलते भारतीय बाजारों में शुरुआत अच्छी रही थी। लेकिन जैसे ही यूरोपीय बाजार खुले और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बादल गहराए, घरेलू निवेशकों ने अपनी पोजीशन हल्की करनी शुरू कर दी। इसके अलावा बड़ी कंपनियों के शेयरों में हुई मुनाफावसूली ने आग में घी का काम किया और बाजार संभल नहीं पाया।
निफ्टी भी जो सुबह की शुरुआत में 22,600 के स्तर पर मजबूती दिखा रहा था, वह तेजी से फिसलकर लाल निशान में बंद हुआ। बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के बड़े शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। जानकारों का कहना है कि महीने के अंत में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से बाजार का मूड पहले से ही कमजोर था, जिसका असर आज के कारोबार में साफ तौर पर देखने को मिला।
छोटे और खुदरा निवेशकों की बढ़ी टेंशन
बाजार में आई इस अचानक तबाही से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और खुदरा निवेशकों को उठाना पड़ा है। जो निवेशक सुबह बाजार में तेजी देखकर अपनी खरीदारी बढ़ा रहे थे, वे दोपहर बाद आई गिरावट में फंस गए। कई प्रमुख शेयरों में लोअर सर्किट लगने से निवेशकों को बेचने का मौका तक नहीं मिला। द फ्रीलान्स की टीम ने जब कुछ स्थानीय ब्रोकरेज फर्मों से बात की तो उन्होंने बताया कि इस तरह के अचानक उतार-चढ़ाव से आम लोगों का भरोसा डगमगाता है।
बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के अस्थिर दौर में निवेशकों को बिना सोचे-समझे पैनिक होकर अपने शेयर नहीं बेचने चाहिए। शेयर बाजार में निवेश करने वालों को हमेशा लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए और अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से ही पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। हालांकि तकनीकी संकेत अभी भी कमजोरी की तरफ इशारा कर रहे हैं, इसलिए आने वाले कुछ दिनों तक बाजार में सतर्कता बरतना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल और क्या करें निवेशक
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में बाजार इस बड़े झटके से उबर पाएगा या नहीं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों का रुख तय करेगा कि बाजार किस दिशा में जाएगा। घरेलू मोर्चे पर भी कंपनियों के तिमाही नतीजे और आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल को नई दिशा देंगे।
फिलहाल बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने से बचना चाहिए। अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ही दांव लगाना बेहतर रहता है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा हालात में बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों पर निर्भर है, इसलिए हर छोटी खबर पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।











