नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — आज सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी दोनों ही लाल निशान में लुढ़क गए। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि देखते ही देखते निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। द फ्रीलान्स की टीम ने बाजार के इस अचानक कोहराम के पीछे की जमीनी और आर्थिक वजहों की बारीकी से पड़ताल की है। शुरुआती कारोबार से लेकर दोपहर तक किसी भी स्तर पर बाजार में संभलने के संकेत नहीं मिले और दिग्गज शेयरों की कीमतें धड़ाम हो गईं।
बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, आज के इस बड़े क्रैश के पीछे मुख्य तौर पर तीन बड़ी वजहें जिम्मेदार हैं। पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेत हैं, जहां एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। दूसरा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई द्वारा लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकालना है। तीसरा और सबसे अहम कारण घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन और महंगाई का बढ़ता दबाव रहा है, जिसके चलते निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है।
किन शेयरों में दिखा सबसे ज्यादा कोहराम
आज के कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया। टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों के शेयर धड़ाम हो गए जिससे सूचकांक को बहुत बड़ा झटका लगा। छोटे और मझोले शेयरों यानी मिडकैप और स्मॉलकैप में तो हालात और भी ज्यादा खराब रहे, जहां निवेशकों को अपनी पूंजी बचाना मुश्किल हो गया। दिनभर चले इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू में भारी गिरावट दर्ज की गई और ट्रेडिंग फ्लोर पर मायूसी छा गई।
बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर सीधे तौर पर उभरते बाजारों जैसे भारत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि बड़े निवेशक जोखिम भरे शेयरों में पैसा लगाने से बच रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं। इस माहौल ने छोटे और खुदरा निवेशकों को सबसे ज्यादा डरा दिया है, जो बिना सोचे-समझे बिकवाली करने लगे।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
द फ्रीलान्स की एक्सपर्ट टीम से हुई बातचीत में वित्तीय सलाहकारों ने साफ कहा है कि इस समय निवेशकों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव सामान्य आर्थिक चक्र का हिस्सा होते हैं और लॉन्ग टर्म निवेश करने वालों को धैर्य रखना चाहिए। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि जब तक वैश्विक बाजार के मोर्चे पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक भारतीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव का यह दौर बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही पैसा लगाएं।
दिनभर के इस कोहराम के बाद अब सबकी नजरें आगामी आर्थिक आंकड़ों और सरकार के नीतिगत फैसलों पर टिकी हुई हैं। बाजार नियामक संस्थाएं भी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की सनसनी या गलत अफवाह को रोका जा सके। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है और निवेशकों को हर ताजा अपडेट से रूबरू कराती रहेगी, ताकि वे अपने वित्तीय फैसले समझदारी के साथ ले सकें।









