अक्टूबर के पहले दिन शेयर बाजार में मचा भूचाल
हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त और कमजोर माहौल के साथ हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लाल निशान के दायरे में खुला और जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मंदी का दायरा और गहराता चला गया। दोपहर के सत्र में बाजार की स्थिति इस कदर बिगड़ी कि निवेशकों में भगदड़ मच गई। बिकवाली के भारी दबाव के कारण बाजार पूरी तरह से दबाव में नजर आया और देखते ही देखते सूचकांकों ने भारी गोता लगा दिया।
कारोबार के दौरान स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सेंसेक्स अपने पिछले तमाम सपोर्ट लेवल को तोड़ते हुए 1200 से अधिक अंकों तक नीचे फिसल गया। इस दौरान सेंसेक्स ने 71,292.88 अंक के स्तर को छुआ, जो कि इसका पूरे 52 हफ्ते का सबसे निचला स्तर यानी लो है। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 400 अंक तक क्रैश होकर 22,200 के खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया। बाजार में आई इस अचानक मची तबाही ने छोटे और बड़े सभी निवेशकों की नींद उड़ा दी।
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निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे, मार्केट कैप घटा
बाजार में आई इस भारी गिरावट का सीधा और क्रूर असर देश के आम और खास निवेशकों की पूंजी पर पड़ा। सत्र के दौरान जब बाजार अपने सबसे निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था, तब बीएसई पर लिस्टेड तमाम कंपनियों का कुल मार्केट कैप भारी भरकम गिरावट के बाद काफी सिकुड़ गया। शुरुआती घंटों में ही निवेशकों की गाढ़ी कमाई के 7 लाख करोड़ रुपये हवा हो गए, और दिन ढलते-ढलते यह नुकसान बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब बाजार में इस तरह की तेज गिरावट आती है, तो मार्जिन कॉल और पैनिक सेलिंग की वजह से हालात और भी खराब हो जाते हैं। इस दिन भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां चौतरफा बिकवाली के चलते दिग्गज शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट तक के काउंटर धड़ाम हो गए। टाटा, महिंद्रा और मारुति जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भी इस सुनामी में ताश के पत्तों की तरह बिखरते नजर आए।
ऑटो, मेटल और बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़ी बिकवाली
क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान के गहरे पानी में डूबे नजर आए। ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे भयंकर बिकवाली देखने को मिली, जहां ऑटो इंडेक्स तीन फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, आईटीसी, अदानी पोर्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे दिग्गज शेयर भारी नुकसान के साथ बंद हुए।
इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो निवेशकों को और भी अधिक दर्द झेलना पड़ा। पॉलिसी बाजार, यूपीएल, भारत फोर्ज और एयू बैंक जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना है कि जब बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ता है, तो बिकवाल किसी भी अच्छे या बुरे शेयर का लिहाज किए बिना बिकवाली शुरू कर देते हैं, जिसका खामियाजा हर वर्ग के निवेशकों को भुगतना पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली बनी मुख्य वजह
शेयर बाजार में आए इस भूचाल और भारी भूकम्प के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आर्थिक कारण जिम्मेदार रहे। सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही भारी बिकवाली है। पिछले कई सत्रों से विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार की रीढ़ कमजोर हो गई है।
"बाजार में इस समय वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी फंड्स के आउटफ्लो का दोहरा दबाव साफ देखा जा रहा है। हालांकि, तकनीकी स्तरों पर घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक संभालने की कोशिश जरूर की है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।"— बाजार विश्लेषक, द फ्रीलांस
इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी ने भी आग में घी का काम किया। सितंबर महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड स्तर पर निकासी की है, जिससे बाजार की लिक्विडिटी प्रभावित हुई है।
कारोबार के आखिरी घंटों में यू-टर्न और रिकवरी
दिनभर की भारी उठापटक और मंदी के बीच, कारोबार के अंतिम घंटों यानी दोपहर 3 बजे के बाद बाजार ने एक दिलचस्प यू-टर्न लिया। निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग यानी सस्ते शेयरों की खरीदारी आने के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अपने दिन के सबसे निचले स्तरों से कुछ रिकवरी दर्ज की।
हालांकि यह रिकवरी बाजार को हरे निशान में वापस लाने के लिए नाकाफी साबित हुई, लेकिन इसने भारी तबाही से बाजार को जरूर बचाया। कारोबार की समाप्ति पर बीएसई सेंसेक्स अंततः 570.59 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 198.50 अंक टूटकर 22,421.95 के स्तर पर सिमट गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तकनीकी सपोर्ट लेवल पर ही बाजार की अगली चाल निर्भर करेगी।







