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त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और सीएनजी की कीमतों में भारी उछाल

त्योहारों की शुरुआत से ठीक पहले आम जनता और कारोबारियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है, वहीं महानगरों में सीएनजी भी महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के बजट पर पड़ रहा है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•2 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•50
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त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और सीएनजी की कीमतों में भारी उछाल
📷 त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और सीएनजी की कीमतों में भारी उछाल — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • देशभर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 से 70 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • मुंबई में सीएनजी के दाम बढ़कर 89 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं।
  • बढ़ती आयात लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के महंगे होने को इन कीमतों में वृद्धि की मुख्य वजह बताया गया है।

त्योहारों के मुहाने पर महंगाई की मार, रसोई गैस से लेकर सफर तक सब हुआ महंगा

देशभर में त्योहारों का उल्लास शुरू होने ही वाला है कि उससे पहले आम आदमी की जेब पर एक और बड़ा वित्तीय बोझ आ पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों ने अक्टूबर के पहले दिन से ही कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में बड़ा इजाफा कर दिया है। इसके साथ ही महानगरों में वाहन चालकों को भी तगड़ा झटका लगा है क्योंकि सीएनजी की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं। इस दोहरी मार से न केवल होटल, रेस्टोरेंट औरटर और कैफे चलाने वाले कारोबारी परेशान हैं, बल्कि आम नागरिकों का मासिक बजट भी डगमगाने लगा है। त्योहारी सीजन में मिठाइयों और खान-पान की चीजों के महंगे होने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी, लेकिन कीमतों में हुई इस अचानक बढ़ोतरी ने चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के इस दौर में जब कमर्शियल गैस की खपत सबसे ज्यादा होती है, ऐसे समय में कीमतों का बढ़ना बाजार में चीजों के दाम सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। होटल और कैटरिंग कारोबारियों का कहना है कि गैस के दाम बढ़ने से उनके उत्पादन की लागत में काफी इजाफा हो जाएगा, जिसे अंततः उपभोक्ताओं पर ही ट्रांसफर करना पड़ेगा। ऐसे में आम जनता को इस बार त्योहारों पर खरीदारी के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहना होगा।

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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी उछाल, जानिए विभिन्न शहरों का हाल

तेल कंपनियों के नए संशोधनों के अनुसार, कमर्शियल इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर के दाम देश के अलग-अलग हिस्सों में 60 रुपये से लेकर 70 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो राजधानी भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर अब 2815 रुपये में मिल रहा है, जबकि आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इसके दाम बढ़कर 2919 रुपये हो गए हैं। इसके अलावा जबलपुर में यह सिलेंडर 3030 रुपये और ग्वालियर में 3037 रुपये तक पहुंच चुका है। राज्य के रीवा जिले में तो हालात सबसे महंगे हैं, जहां कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3066 रुपये तक दर्ज की गई है।

इस भारी-भरकम बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार की उन सभी छोटी-बड़ी दुकानों पर पड़ेगा जो गैस पर आधारित हैं। चाहे सड़क किनारे लगने वाले चाट-पकौड़े के ठेले हों या फिर नामी-गिरामी रेस्टोरेंट, हर कोई इस महंगाई की चपेट में आ चुका है। व्यापारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उन्हें अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

वाहन चालकों की बढ़ी मुश्किलें, मुंबई में सीएनजी हुई और ज्यादा महंगी

केवल रसोई गैस ही नहीं, बल्कि परिवहन के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। महानगर मुंबई में सितंबर के महीने में दो रुपये की बढ़ोतरी के ठीक बाद, अब अक्टूबर की शुरुआत में सीएनजी के दाम में एक और रुपये की वृद्धि कर दी गई है। इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद मुंबई में सीएनजी की खुदरा कीमत बढ़कर 89 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। वाहन चालकों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे ईंधन के दाम उनकी आमदनी को निगल रहे हैं।

सीएनजी की कीमतों में हुई इस वृद्धि का प्रभाव सिर्फ निजी कार मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा असर ऑटो चालकों, टैक्सी ड्राइवरों और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। रोजाना हजारों किलोमीटर की यात्रा करने वाले इन चालकों के लिए ईंधन का खर्च अचानक काफी बढ़ गया है। जानकारों का अनुमान है कि यदि ईंधन की कीमतें इसी प्रकार बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में ऑटो और टैक्सी का किराया भी बढ़ाया जा सकता है, जिसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।

क्यों बढ़ रहे हैं गैस और ईंधन के दाम? जानिए इसके पीछे की मुख्य वजह

आखिरकार अचानक से गैस और सीएनजी के दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं, इसको लेकर कंपनियों ने स्पष्टीकरण दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) और आरएलएनजी की आयात लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के मुकाबले रुपये की स्थिति के चलते गैस खरीदना महंगा हो गया है। इसी बढ़ी हुई लागत का दबाव अब उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक घरेलू बाजार में राहत की उम्मीद करना मुश्किल है। कंपनियों के लिए यह संभव नहीं है कि वे लगातार घाटा सहकर पुरानी कीमतों पर गैस की आपूर्ति जारी रखें। यही कारण है कि समय-समय पर बाजार की वास्तविक लागत के हिसाब से कीमतों में संशोधन करना इनकी मजबूरी बन गया है।

त्योहारों के बीच घरेलू बजट को संतुलित करने के आसान और असरदार तरीके

कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने के बाद अब आम नागरिकों में इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं इसका असर घरेलू रसोई गैस (LPG) पर भी न पड़े। हालांकि अभी घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, फिर भी समझदारी इसी में है कि ऊर्जा का उपयोग बेहद सोच-समझकर किया जाए। त्योहारों के इस सीजन में जब घर में लगातार पकवान और मिठाइयां बनाई जाती हैं, तब गैस की खपत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है ताकि बीच में खाना बनाते समय अचानक संकट न खड़ा हो।

घर बैठे सिलेंडर में गैस की मात्रा जांचने के लिए कई आसान घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पानी की एक आसान ट्रिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक मग या बाल्टी में पानी लेकर उसे धीरे-धीरे सिलेंडर पर ऊपर से नीचे तक डालें। कुछ सेकंड बाद जब आप सिलेंडर को छुएंगे तो जो हिस्सा ठंडा महसूस हो, वहां तक गैस होने का अनुमान लगाया जाता है, क्योंकि लिक्विड एलपीजी गर्मी को जल्दी सोखती है। इसके अलावा, सिलेंडर के कुल वजन में से उसका खाली वजन (टेयर वेट) घटाकर भी बची हुई गैस का सटीक हिसाब लगाया जा सकता है।

"त्योहारों के ठीक मुहाने पर कमर्शियल गैस और सीएनजी के दामों में हुआ यह इजाफा न केवल छोटे व्यापारियों के लिए बल्कि परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी एक बड़ा आर्थिक झटका है। सरकार और कंपनियों को चाहिए कि वे इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसका अप्रत्यक्ष असर आम आदमी की बुनियादी जरूरतों और महंगाई पर ज्यादा न पड़े।" — आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ

अंततः, इस स्थिति से निपटने के लिए नागरिकों को अपने स्तर पर सतर्क रहना होगा। ईंधन की बर्बादी रोकने और बजट को नियंत्रित रखने के लिए ऊर्जा संरक्षण के उपायों को अपनाना ही इस समय की सबसे बड़ी मांग है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि क्या सरकार या तेल कंपनियां आम जनता को राहत देने के लिए किसी तरह की सब्सिडी या मूल्य स्थिरीकरण का रास्ता अपनाती हैं या नहीं।

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