अक्टूबर की शुरुआत में बदला बुलियन मार्केट का रुख
भारतीय सर्राफा बाजार के लिए पिछला महीना यानी सितंबर उतार-चढ़ाव और लगातार कमजोरी का गवाह रहा था। महीने के दौरान कीमती धातुओं में सुस्ती छाई हुई थी और निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। लेकिन, जैसे ही अक्टूबर महीने ने दस्तक दी, सोने और चांदी की चाल एकदम से बदल गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन की आहट और वैश्विक बाजार में आए बदलावों के कारण घरेलू मांग में अचानक सुधार देखने को मिला है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर कारोबार की शुरुआत के साथ ही खरीदार और निवेशक सक्रिय हो गए। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार टूट रहे सोने और चांदी के भावों में आई इस तेजी ने बाजार के विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। आम आदमी जो लंबे समय से सोने की खरीदारी का मन बना रहा था, उसके लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कारकों के कारण यह तेजी कितनी टिक पाएगी, यह आने वाले दिनों के वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
राजधानी दिल्ली के स्थानीय सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने के भाव में 700 रुपये प्रति 10 ग्राम की ठोस बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का नया भाव बढ़कर सीधे 1.49 लाख रुपये के पार पहुंच गया। पिछले कुछ सत्रों से सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का जो सिलसिला चल रहा था, वह आखिरकार थम गया है। कल तक बाजार में सुस्ती का माहौल था, लेकिन आज की इस छलांग ने व्यापारियों में नई ऊर्जा भर दी है।
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चांदी की कीमतों में स्थिरता और निवेशकों की प्रतिक्रिया
सोने के विपरीत चांदी की कीमतों में एक अलग ही रुख देखने को मिला है। चांदी का भाव लगातार दूसरे सत्र में स्थिर बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर पिछले कारोबारी दिन भी चांदी अपने तय स्तर पर ही टिकी रही थी। पिछले महीने के दौरान चांदी के दाम में काफी उठापटक जरूर हुई थी, लेकिन महीने के अंत आते-आते इसमें कुछ हद तक स्थिरता आनी शुरू हो गई थी।
अगर पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सितंबर के आखिरी दिनों में चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक चांदी के वायदा भाव में बड़ा अंतर आया था। साल की शुरुआत में जब चांदी ने अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऐतिहासिक ऊंचाई को छुआ था, तब निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की थी। उसके बाद से ही इसमें लगातार करेक्शन देखा जा रहा है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, जिसके कारण इसमें बहुत ज्यादा बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है। निवेशकों के लिए यह समय रणनीतिक रूप से निवेश करने का हो सकता है, बशर्ते वे वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर बनाए रखें। आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह कीमत राहत भरी है क्योंकि अपने ऑल-टाइम हाई स्तर से चांदी अभी भी काफी नीचे ट्रेड कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का हाल और डॉलर का प्रभाव
घरेलू बाजार में सोने और चांदी की चाल को तय करने में अंतरराष्ट्रीय कारकों की भूमिका सबसे अहम होती है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक में लगातार हो रहे बदलावों ने वैश्विक बुलियन मार्केट की दिशा तय की है। डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग पर दबाव बनता है और कीमतों में करेक्शन देखा जाता है।
वैश्विक बाजार में सोना मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी में हल्की नरमी दर्ज की गई। जानकारों का यह भी मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर नीतियों के कारण बुलियन मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। मुद्रास्फीति के आंकड़ों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे कीमतों को अंदरूनी समर्थन मिल रहा है।
"सोने और चांदी के बाजारों में इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख का सबसे गहरा असर देखने को मिल रहा है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार के ट्रेंड को अच्छी तरह समझ लें।"— वरिष्ठ कमोडिटी विश्लेषक
सितंबर महीने के दौरान सोने-चांदी में आई बड़ी गिरावट का लेखा-जोखा
बीता सितंबर का महीना कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए काफी भारी रहा था। महीने के शुरुआती हफ्तों से ही सोने के दाम में लगातार कमजोरी आनी शुरू हो गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में जो सोना ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहा था, वह महीने के अंतिम दिनों तक काफी नीचे आ चुका था। प्रति 10 ग्राम के हिसाब से निवेशकों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
हाल के केवल पांच दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो सोने की कीमतों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। वैश्विक स्तर पर दबाव और मजबूत डॉलर के कारण घरेलू बाजार में भी घबराहट भरी बिकवाली हुई। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गिरावट के बाद जब निचले स्तर पर खरीदारी शुरू होती है, तो बाजार में एक तकनीकी बाउंस-बैक देखने को मिलता है, जो आज की बढ़त के रूप में सामने आया है।
निवेशकों के लिए आगे की क्या है रणनीति?
त्योहारी सीजन के नजदीक आने के साथ ही देश भर के सर्राफा बाजारों में रौनक लौटने की उम्मीद है। ऐसे में आम ग्राहक और निवेशक असमंजस में हैं कि उन्हें इस समय सोना-चांदी खरीदना चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि बाजार के हर छोटे उतार-चढ़ाव पर पैनिक होने के बजाय टुकड़ों में निवेश करना सबसे समझदारी भरा कदम होता है।
विशेष रूप से गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वालों को अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड रखना चाहिए। चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभी भी कई तरह के जोखिम बने हुए हैं, इसलिए सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का एक निश्चित हिस्सा पोर्टफोलियो में होना फायदेमंद साबित हो सकता है। ग्राहकों को खरीदारी करते समय हॉलमार्क और शुद्धता के मानकों की पूरी जांच जरूर करनी चाहिए।







