दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी मांग आखिरकार पूरी हो गई है। कर्नाटक सरकार ने तूलू भाषा को राज्य के तटीय जिलों यानी दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में एक अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा दे दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले से तूलू भाषाई समुदाय में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है।
प्रजा सौध भवन में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
यह महत्वपूर्ण फैसला तटीय शहर के प्रजा सौध भवन में आयोजित कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस बात की औपचारिक घोषणा की। सरकार के इस कदम से उस मांग को पूरा कर दिया गया है जिसके लिए स्थानीय लोग और भाषा प्रेमी कई दशकों से आवाज उठा रहे थे।
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने जनता की भावनाओं के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को सुधारने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने साफ किया कि पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया, इस विवाद में पड़ने के बजाय मौजूदा सरकार ने लोगों की भलाई के लिए यह कदम उठाया है।
दो हजार साल पुराना है तूलू भाषा का समृद्ध इतिहास
भाषा विशेषज्ञों के मुताबिक तूलू एक बेहद समृद्ध द्रविड़ भाषा है जिसका इतिहास दो हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। दुनिया भर में करीब एक करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं। इसका मुख्य केंद्र दक्षिण कन्नड़, उडुपी और केरल का कासरगोड जिला रहा है। लंबे समय से इसे सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक कार्यों में जगह देने की मांग उठ रही थी।
"अखंड दक्षिण कन्नड़ के लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए हमने तूलू को राज्य की अतिरिक्त आधिकारिक भाषा बनाने का फैसला किया है। हमारी सरकार लोगों की भावनाओं से ज्यादा उनके जीवन और विकास को महत्व देती है।" — डी.के. शिवकुमार, उपमुख्यमंत्री, कर्नाटक
दक्षिण कन्नड़ का नाम बदलने पर भी चल रहा है विचार
भाषा को मान्यता देने के अलावा कर्नाटक सरकार ने एक और बड़ा प्रस्ताव चर्चा में रखा है। सरकार दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर 'मंगलुरु' करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट बैठक में इस पर शुरुआती चर्चा हो चुकी है और अब इस बारे में आम जनता की राय भी ली जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि जनता की प्रतिक्रिया और एक औपचारिक बहस के बाद इस पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि इस मामले में अगले एक महीने के भीतर कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है। तटीय जिलों के विकास और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार के ये कदम काफी अहम माने जा रहे हैं।

