स्टॉकहोम से हमारे फील्ड डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञान की दुनिया में इस साल का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान उन वैज्ञानिकों को मिला है जिन्होंने जीवन के निर्माण से जुड़ी बुनियादी पहेली को हल किया है। नोबेल समिति ने आज रसायन विज्ञान यानी केमिस्ट्री के पुरस्कार विजेताओं के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह खोज इतनी बड़ी है कि इसे पिछले सौ सालों से विज्ञान जगत का एक ऐसा अनसुलझा सवाल माना जा रहा था जिसका जवाब किसी के पास नहीं था। वैज्ञानिकों की इस सफलता से अब जीवित कोशिकाओं और शरीर के भीतर होने वाली रासायनिक क्रियाओं को बहुत ही बारीकी से समझना आसान हो गया है।
इस पूरी खोज का संबंध हमारे शरीर की उन सूक्ष्म इकाइयों से है जो हर पल जीवन को चलाने का काम करती हैं। जानकारों के मुताबिक, पिछले एक सदी से वैज्ञानिक इस बात को लेकर परेशान थे कि शरीर के भीतर प्रोटीन और अन्य रासायनिक तत्व किस तरह से काम करते हैं और आपस में जुड़कर रूप बदलते हैं। पारंपरिक तरीकों से इस रहस्य को भेदना नामुमकिन सा लग रहा था क्योंकि तकनीक उतनी विकसित नहीं थी। लेकिन इस बार विजेता वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक और अपनी गहरी सूझबूझ का इस्तेमाल करके इस सदी पुरानी बाधा को पार कर लिया है। उनकी इस मेहनत से अब इंसानी शरीर की बीमारियों और उनके इलाज की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
प्रोटीन की पहेली और विज्ञान का नया सवेरा
नोबेल पाने वाले इन वैज्ञानिकों ने मुख्य रूप से प्रोटीन की संरचना और उसके काम करने के तरीकों पर काम किया है। हमारे शरीर में हर एक काम के पीछे प्रोटीन का हाथ होता है, चाहे वह सांस लेना हो या खाना पचाना। लेकिन इन प्रोटीनों का आकार समय के साथ बदलता रहता है जिसे देखना और समझना पहले असंभव माना जाता था। इन शोधकर्ताओं ने एक ऐसी उन्नत तकनीकी प्रणाली तैयार की जिसकी मदद से कंप्यूटर पर ही इन जटिल आकारों को साफ-साफ देखा जा सकता है। इससे न केवल प्रयोगशाला का काम आसान हुआ बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत भी हो गई है।
शोध से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस खोज का सीधा फायदा आम आदमी की सेहत पर पड़ेगा। जब वैज्ञानिक यह जान जाएंगे कि कोई खास प्रोटीन किस तरह से बीमारी फैलाता है, तो वे वैसी ही दवाइयां तैयार कर पाएंगे जो सीधे उस बीमारी पर हमला करेंगी। इससे इलाज का समय कम होगा और साइड इफेक्ट्स का खतरा भी बहुत हद तक घट जाएगा। दुनिया भर के डॉक्टर और शोध संस्थान इस उपलब्धि को चिकित्सा इतिहास का एक मील का पत्थर मान रहे हैं। यही वजह है कि इस साल का केमिस्ट्री नोबेल मिलने के बाद से ही विज्ञानप्रेमियों और अकादमिक जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।
भविष्य की चिकित्सा पर इस खोज का गहरा असर
इस महान उपलब्धि के बाद अब फार्मास्यूटिकल कंपनियों और शोध संस्थानों के सामने रास्ते पूरी तरह खुल गए हैं। आने वाले दिनों में कई नई और घातक बीमारियों के खिलाफ सटीक दवाएं बनाने का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके पर्यावरण को बचाने वाले नए पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं जो प्लास्टिक या अन्य कचरे को खत्म करने में मददगार साबित होंगे। आम जनता के लिए इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा बेहतर तथा सस्ती हो सकती हैं।
नोबेल समिति ने भी अपने बयान में कहा है कि यह खोज न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए बल्कि आने वाली सदियों के लिए मानवता को एक बहुत बड़ा उपहार है। इस पुरस्कार की घोषणा के बाद से स्टॉकहोम से लेकर दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज में जश्न का माहौल है। हमारे संवाददाता के मुताबिक, विजेता वैज्ञानिकों ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम और उन तमाम लोगों को दिया है जिन्होंने इस लंबे सफर में उनका साथ निभाया। द फ्रीलान्स की टीम इस ऐतिहासिक सफलता से जुड़े हर पहलू पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी।





