नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। दो महीने पहले सोने के भाव काफी नीचे आ गए थे, लेकिन निचले स्तर पर हुई भारी खरीदारी ने बाजार में इसकी चमक फिर से लौटा दी है। आम निवेशक असमंजस में हैं कि इस समय सोना खरीदें या थोड़ा और इंतजार करें। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा सोने पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को चुन रहे हैं। यही वजह है कि तमाम बाधाओं के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और इसमें तेजी के संकेत मिल रहे हैं। दूसरी ओर, चांदी के भाव में भी अच्छी खासी रिकवरी दर्ज की गई है, जिससे औद्योगिक मांग और खुदरा खरीदार दोनों सक्रिय हो गए हैं।
साल 2026 तक कौन सी धातु बनेगी निवेशकों की पहली पसंद?
फ्यूचर मार्केट के जानकारों का कहना है कि आने वाले सालों में सोने और चांदी दोनों का रिटर्न शानदार रह सकता है। कुछ वित्तीय संस्थानों और एक्सपर्ट्स ने साल 2026 के अंत तक के लिए नए टारगेट तय करना शुरू कर दिए हैं। हालांकि हाल ही में आई कुछ अमेरिकी बैंकों की रिपोर्ट में कीमतों को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं, लेकिन घरेलू बाजार का मूड पूरी तरह से सकारात्मक बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि का निवेश करने वालों को बाजार के इन उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है।
बाजार में इस समय एक तरफ जहां शेयर बाजार के लुढ़कने की खबरें आम लोगों को परेशान कर रही हैं, वहीं कमोडिटी मार्केट यानी सोना और चांदी निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं। शेयर बाजार में लगातार हो रहे नुकसान के बाद छोटे निवेशकों ने भी अपना पैसा सुरक्षित निवेश की तरफ मोड़ना शुरू कर दिया है। सरकार के फैसलों और आर्थिक नीतियों का असर भी सीधे तौर पर कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
खरीदारी करने से पहले जान लें बाजार के ताजा समीकरण
अगर आप भी आने वाले दिनों में सोना या चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो बाजार की चाल पर बारीक नजर रखना बेहद जरूरी है। जानकारों की सलाह है कि एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किश्तों में खरीदारी करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। त्योहारी सीजन और शादियों के मौसम में घरेलू मांग बढ़ने से कीमतों में और तेजी आने की पूरी संभावना है। इसलिए किसी भी जल्दबाजी से बचने और समझदारी से फैसला लेने की जरूरत है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि खुदरा बाजारों में खरीदारों की भीड़ धीरे-धीरे फिर से लौटने लगी है। स्थानीय सराफा व्यापारियों का कहना है कि लोग अब सोने की शुद्धता और डिजिटल गोल्ड के विकल्पों पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं। आने वाले हफ्तों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसलों से तय होगा कि सोने और चांदी की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।




