टाटा संस का संभावित आईपीओ और वैल्यूएशन का पूरा गणित
भारतीय कॉर्पोरेट जगत में लंबे समय से टाटा संस के संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफर यानी आईपीओ को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। यदि यह आईपीओ बाजार में आता है और कंपनी लिस्ट होती है, तो यह भारतीय शेयर बाजार इतिहास के सबसे बड़े और महंगे आईपीओ में से एक हो सकता है। बाजार के जानकारों और इन्वेस्टमेंट बैंकरों के अनुमान के मुताबिक, अगर टाटा संस की कुल वैल्यूएशन 9 लाख करोड़ से 12.5 लाख करोड़ रुपये के बीच आंकी जाती है, तो कंपनी के कुल ऑर्डिनरी शेयरों की कीमत आसमान छू सकती है।
मौजूदा समय में टाटा संस के पास कुल 404,146 ऑर्डिनरी शेयर हैं। इस हिसाब से अगर वैल्यूएशन उच्च स्तर पर रहती है, तो प्रत्येक शेयर की कीमत लगभग 2.23 करोड़ रुपये से लेकर 3.09 करोड़ रुपये तक हो सकती है। यह आंकड़ा सुनने में भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन टाटा समूह की विशाल वित्तीय ताकत और उसकी कंपनियों के मार्केट कैप को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह असंभव नहीं है। इस संभावित लिस्टिंग से न केवल बड़े निवेशकों बल्कि उन चुनिंदा शेयरधारकों को भी भारी फायदा मिल सकता है, जो आम तौर पर मीडिया और लाइमलाइट से दूर रहते हैं।
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किसके पास है कितनी हिस्सेदारी और कितनी बढ़ेगी संपत्ति
टाटा संस में हिस्सेदारी की बात करें तो सबसे बड़ा हिस्सा टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जो कुल शेयरों का लगभग 66 प्रतिशत है। इसके बाद शापूरजी पलोनजी (SP) समूह की दो प्रमुख कंपनियों के पास 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा टाटा समूह की अन्य कंपनियां और कुछ व्यक्तिगत परिवार के सदस्य भी इसके शेयरधारक हैं। इन व्यक्तिगत शेयरधारकों में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जो बेहद सादा जीवन जीते हैं और सार्वजनिक मंचों पर कम ही नजर आते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के छोटे भाई जिमी नवल टाटा का नाम भी शामिल है, जो पुणे में बेहद साधारण जीवन बिताते हैं और हमेशा लाइमलाइट से दूर रहते हैं। जिमी नवल टाटा के पास कंपनी के 3,262 शेयर हैं। वर्तमान अनुमानित वैल्यूएशन के अनुसार, उनके इन शेयरों की कुल कीमत 7,264 करोड़ रुपये से लेकर 10,089 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसी तरह, देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रहे दिवंगत रतन टाटा के पास 3,368 शेयर थे, जिनकी वैल्यू भी लगभग 7,500 करोड़ से 10,417 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है।
परिवार के दूसरे सदस्यों और छोटे शेयरधारकों की स्थिति
टाटा संस के शेयरों की इस संभावित रेस में परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हैं। इनमें एचडीएफसी बैंक के चीफ क्रेडिट ऑफिसर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जिमी मिनोचर टाटा का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। इसके अलावा पीलू मिनोचर टाटा के पास भी 487 शेयर हैं, जिनकी वैल्यू लगभग 1,085 से 1,506 करोड़ रुपये हो सकती है। पीलू के बच्चों, जिमी मिनोचर टाटा और वेरा फरहाद चोकसी में से प्रत्येक के पास 157 शेयर हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 350 से 486 करोड़ रुपये तक बैठती है।
टाटा सेंट्रल आर्काइव्स के पारिवारिक इतिहास के अनुसार, ये सभी लोग टाटा परिवार की पुरानी वंशावली से जुड़े हुए हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि यह सारी गणना फिलहाल कागजी वैल्यू और अनुमानों पर आधारित है। वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी आईपीओ का ढांचा किस प्रकार तय करती है और लिस्टिंग के समय बाजार की क्या स्थिति रहती है।
क्या हर शेयरधारक रातों-रात बेच सकेगा अपने शेयर?
आम निवेशकों और शेयरधारकों के मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्या वे आईपीओ आते ही अपने शेयर बेचकर रातों-रात अरबपति बन जाएंगे। वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि शेयरधारकों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उन्हें आईपीओ के 'ऑफर-फॉर-सेल' यानी ओएफएस हिस्से में स्वतः जगह मिल जाएगी। इसमें हिस्सेदारी मिलना पूरी तरह से इश्यू के लिए तय की जाने वाली शर्तों और नियमों पर निर्भर करेगा।
"शेयर बाजार में किसी भी कंपनी की लिस्टिंग और उसका मूल्यांकन पूरी तरह से बाजार की मांग, नियामक संस्थाओं के नियमों और कंपनी की वित्तीय सेहत पर निर्भर करता है। आईपीओ आने के बाद माइनॉरिटी होल्डर्स के पास खुले बाजार में अपने शेयर बेचने का विकल्प जरूर होता है, लेकिन इसके लिए उन्हें उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।"— वित्तीय बाजार विशेषज्ञ
इसके अलावा, शेयरों की बिक्री पर लगने वाला टैक्स, लॉक-इन पीरियड और अन्य विधिक औपचारिकताएं भी अंततः शेयरधारक के हाथ में आने वाली वास्तविक रकम को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि वित्तीय सलाहकार हमेशा यह सलाह देते हैं कि किसी भी कंपनी के संभावित आईपीओ या बाजार की खबरों को केवल कयासों के रूप में देखा जाना चाहिए और निवेश से जुड़े फैसले हमेशा अपने वित्तीय सलाहकार की राय से ही लेने चाहिए।
निष्कर्ष और आम निवेशकों के लिए सबक
टाटा संस के संभावित आईपीओ की चर्चाएं भले ही बाजार में हलचल पैदा कर रही हों, लेकिन यह पूरी घटना इस बात का उदाहरण है कि लंबी अवधि में मजबूत और भरोसेमंद कंपनियों में किया गया निवेश किस प्रकार बड़ा रिटर्न दे सकता है। हालांकि, आम खुदरा निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि टाटा संस एक अनलिस्टेड होल्डिंग कंपनी है और इसके शेयर आम जनता के लिए खुले बाजार में सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इस तरह की खबरों को केवल कॉर्पोरेट इतिहास और शेयर बाजार की बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी सीधी निवेश टिप के रूप में।







