नई दिल्ली: दलाल स्ट्रीट पर इन दिनों एक अजीब सी दीवानगी देखने को मिल रही है। जब से कॉर्पोरेट जगत ने बोनस शेयरों और डिविडेंड के पिटारे खोले हैं, तब से खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े फंड हाउसों तक की नजरें चुनिंदा शेयरों पर टिक गई हैं। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल से यह बात सामने आई है कि बाजार में इस समय 'बोनस और डिविडेंड' का ऐसा कॉकटेल तैयार हुआ है, जिसने सुस्त पड़े शेयरों में भी जान फूंक दी है। गांधी जयंती के इस सप्ताह में निवेशकों के पास मुनाफे के कई बड़े मौके हैं, लेकिन इसके पीछे छिपे जोखिमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
अपर सर्किट का खेल और खुदरा निवेशकों का उत्साह
पिछले कुछ सत्रों से बाजार में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जैसे ही किसी कंपनी द्वारा बोनस शेयर (Bonus Share) की घोषणा की जाती है, उसके शेयर कुछ ही मिनटों में अपर सर्किट पर लॉक हो जाते हैं। CNBC TV18 और अन्य वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, SAIL और IGL जैसे दिग्गजों के साथ-साथ कई अन्य मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी अचानक जोरदार खरीदारी देखने को मिली है। निवेशक इस उम्मीद में टूट पड़े हैं कि मुफ्त मिलने वाले शेयरों से उनकी होल्डिंग बढ़ जाएगी और लंबी अवधि में पोर्टफोलियो का आकार भी बड़ा हो जाएगा।
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1 पर 1 और 1 पर 2 फ्री: कंपनियों की लुभावनी पेशकश
इस बार के कॉर्पोरेट सीजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कई कंपनियां बेहद आक्रामक तरीके से बोनस बांट रही हैं। हमारे पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, एक ओर जहां कुछ कंपनियां अपने निवेशकों को हर 1 शेयर पर 1 शेयर बिल्कुल मुफ्त दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ चुनिंदा कंपनियां (जिनके शेयरों की कीमत 100 रुपये से भी कम है) निवेशकों को हर 1 शेयर पर 2 स्टॉक तक फ्री देने की घोषणा कर रही हैं। हिंदुस्तान और बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट्स इस बात की पुष्टि करती हैं कि 30 से अधिक बार डिविडेंड दे चुकी परिपक्व कंपनियां भी अब बोनस शेयर के जरिए अपने शेयरधारकों को बड़ा तोहफा दे रही हैं।
रिकॉर्ड डेट का गणित और निवेशकों के लिए चेतावनी
फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान जब हमने वित्तीय विश्लेषकों से बात की, तो उन्होंने एक अहम पहलू पर प्रकाश डाला। बाजार विशेषज्ञ बार-बार यह चेतावनी दे रहे हैं कि केवल बोनस या डिविडेंड की खबर सुनकर अंधी दौड़ में शामिल नहीं होना चाहिए। रिकॉर्ड डेट (Record Date) से पहले शेयर खरीदने की होड़ में अक्सर शेयरों के भाव उनकी वास्तविक फंडामेंटल वैल्यू से ऊपर चले जाते हैं। एक वरिष्ठ बाजार विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'बोनस शेयर मिलने से कंपनी की कुल वैल्यू नहीं बदलती, बल्कि शेयरों की संख्या बढ़ जाती है और भाव उसी अनुपात में एडजस्ट हो जाते हैं। ऐसे में सिर्फ मुफ्त के शेयरों के लालच में आकर बिना सोचे-समझे निवेश करना भारी पड़ सकता है।'
भविष्य का असर और बाजार का रुख
आगामी हफ्तों में कॉर्पोरेट आय के आंकड़े और इन बोनस शेयरों की रिकॉर्ड डेट्स बाजार की चाल तय करेंगी। खुदरा निवेशकों के बीच बढ़ रही वित्तीय साक्षरता के बावजूद, इस तरह का हाइप (Hype) कई बार छोटी पूंजी वाले निवेशकों को नुकसान में भी डाल देता है। 'द फ्रीलान्स' की यह पड़ताल स्पष्ट करती है कि बोनस शेयर का यह दौर जहां एक तरफ उत्साहजनक है, वहीं दूसरी तरफ यह निवेशकों से धैर्य और गहन रिसर्च की मांग करता है। बाजार की इस तेजी के बीच समझदारी इसी में है कि भावुकता की बजाय कंपनी के बुनियादी फंडामेंटल्स को प्राथमिकता दी जाए।










