लखनऊ से लेकर पंजाब के कई जिलों तक पिछले कुछ घंटों में सड़क और पानी से जुड़े कई दर्दनाक हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर हमारी सड़कों और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लखनऊ में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान सई नदी में एक बड़ा हादसा हो गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन की तैयारी पर बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं।
दूसरी तरफ पंजाब के फतेहगढ़ में एक भीषण बस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। विसाखी के पवित्र पर्व से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की एक तेज रफ्तार बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। चश्मदीदों के मुताबिक बस की रफ्तार बहुत तेज थी और चालक नियंत्रण खो बैठा था। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।
तेज रफ्तार और लापरवाही बन रही है मासूमों की मौत की वजह
पंजाब के खन्ना और मजीठिया से आए सड़क हादसों के आंकड़े दिल दहला देने वाले हैं। खन्ना शहर में एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पार कर रहे एक युवक को कुचल दिया, जिसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मरने वाला युवक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सहारा था, जिसकी अचानक मौत से पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में भारी वाहनों की बेकाबू रफ्तार पर रोक लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिसके कारण आए दिन ऐसे खौफनाक हादसे देखने को मिलते हैं।
इसी तरह मजीठिया में एक स्कूल बस ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में मोटरसाइकिल पर सवार नानी और उनके छोटे दोहते की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। एक अन्य सड़क दुर्घटना में एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई और एक नौजवान गंभीर रूप से जख्मी हो गया। इन सभी घटनाओं में एक बात बिल्कुल साफ है कि सड़कों पर बेलगाम वाहन चालकों और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण लगातार आम और निर्दोष लोगों की जान जा रही है।
प्रशासनिक सुस्ती और सुरक्षा इंतजामों की जमीनी हकीकत
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इन इलाकों की जमीनी हकीकत की पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि ज्यादातर जगहों पर ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के लिए कोई सख्त निगरानी नहीं होती है। स्कूल बसों और भारी ट्रकों का शहर के भीतर बेखौफ दौड़ना आम बात हो गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस और परिवहन विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई करते हैं और जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तब कुछ दिनों के लिए औपचारिकता निभाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
त्योहारों के सीजन और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान नदियों या जलाशयों के पास गोताखोरों और सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा तो किया जाता है, लेकिन धरातल पर ये इंतजाम अक्सर नाकाफी साबित होते हैं। लखनऊ की सई नदी में विसर्जन के दौरान हुई घटना ने इस बात को साबित कर दिया है कि प्रशासन आपात स्थिति से निपटने के लिए कितना तैयार है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हादसे आगे भी मासूमों की जिंदगी निगलते रहेंगे।
आम जनता की सुरक्षा के लिए अब क्या कदम उठाए जाने जरूरी हैं
इन लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद अब आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। लोगों की मांग है कि सड़कों पर ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं। इसके अलावा स्कूल बसों की समय-समय पर फिटनेस जांच और चालकों के लाइसेंस की सख्त चेकिंग होनी बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि केवल मुआवजे की घोषणा कर देने से जान गंवाने वाले परिवारों का दर्द कम नहीं होता है। प्रशासन को कागजी दावों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने होंगे। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कार्रवाई करना ही इन हादसों को रोकने का एकमात्र उपाय बचा है।





