पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी के भीतर चल रहे अंदरूनी कलह और दो गुटों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए टीएमसी के नाम और उसके पारंपरिक 'जोड़ा फूल' (Flowers & Grass) चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इस राजनीतिक भूचाल के बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला है और इस पूरी स्थिति के लिए उनके रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।
चुनाव आयोग के फैसले पर गरमाई सियासत
टीएमसी के भीतर छिड़े अधिकार के इस युद्ध में चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले ने हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर दो स्पष्ट धड़े आमने-सामने आ चुके हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं तो दूसरा धड़ा उनके विरोधी गुطور के रूप में उभरा है। दोनों ही पक्ष पार्टी की असली पहचान पर अपना दावा ठोक रहे हैं। इसी खींचतान के चलते चुनाव आयोग को दखल देना पड़ा और दोनों पक्षों से नए नाम तथा चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया है कि इस फैसले में भारतीय जनता पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से चुनाव आयोग का स्वतंत्र फैसला है। उन्होंने ममता बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अगर आज पार्टी के टुकड़े हो रहे हैं और नाम व निशान पर संकट आया है, तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है जो अपने कुनबे को संभाल कर नहीं रख पाया।
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अहंकार और भगवान राम के श्राप का जिक्र
शुभेंदु अधिकारी ने अपने तीखे तेवर जारी रखते हुए ममता बनर्जी के कथित अहंकार को उनके पतन की वजह बताया। उन्होंने कहा कि जो भी नेता या व्यक्ति अपनी ताकत के नशे में अहंकार करता है, उसे इतिहास और जनता आखिरकार अपनी सही जगह दिखा ही देती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को धर्म और आस्था से जोड़ते हुए बड़ा बयान दिया।
"टीएमC का नाम और चुनाव चिन्ह छिनना और पार्टी का बिखरना कोई सामान्य घटना नहीं है, यह अहंकार का परिणाम है और सीधे तौर पर भगवान राम का श्राप है। जो लोग सनातन और हिंदू धर्म का अपमान करते हैं, उनका यही हश्र होना तय है।" — शुभेंदु अधिकारी, नेता प्रतिपक्ष, पश्चिम बंगाल विधानसभा
बीजेपी नेता ने इस दौरान ममता बनर्जी द्वारा अतीत में दिए गए बयानों की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि ममता ने हिंदू धर्म और महाकुंभ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान निकाली गई विरोध रैलियों का जिक्र करते हुए शुभेंदु ने कहा कि सनातन विरोधी नीतियों के कारण ही आज उन्हें यह दिन देखना पड़ रहा है।
आगे क्या होगी टीएमसी की राह?
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश के बाद टीएमसी के दोनों बागी गुटों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आगामी उपचुनावों में बिना अपने पुराने नाम और परिचित चुनाव चिन्ह के मैदान में उतरना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें चुनाव आयोग के अगले और अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पार्टी की असली विरासत किसके हाथ लगेगी।






