उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़ा संकट
उत्तर प्रदेश में इन दिनों सरकारी नौकरियों और पदों के लिए चल रही चयन प्रक्रियाओं में उत्साह और जोश का माहौल है, लेकिन होमगार्ड पदों के लिए शुरू हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से एक बेहद डरावनी और दुखद तस्वीर सामने आई है। राज्य के विभिन्न केंद्रों पर होमगार्ड भर्ती के लिए दौड़ का चरण चल रहा है, जिसमें भाग लेने वाले चार युवाओं की पिछले कुछ दिनों के भीतर अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने न केवल पीड़ित परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि प्रशासन, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खुद युवाओं के बीच भी एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में युवा इस शारीरिक परीक्षा के दौरान अपनी जान क्यों गंवा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसे राज्य के तीन प्रमुख जिलों—मेरठ, लखनऊ और मुरादाबाद में सामने आए हैं। इन सभी मामलों में एक ही पैटर्न देखा गया है कि युवा दौड़ लगाते समय या दौड़ पूरी करने के तुरंत बाद अचानक गश खाकर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इन घटनाओं के बाद से भर्ती केंद्रों पर सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, हालांकि मुख्य चिंता का विषय युवाओं की अपनी शारीरिक क्षमता और फिटनेस का स्तर बनता जा रहा है।
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मेरठ और लखनऊ में हुई सबसे ज्यादा घटनाएं
सबसे ज्यादा दर्दनाक आंकड़े मेरठ जिले से सामने आए हैं, जहां अकेले कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में दो युवकों की जान चली गई। मंगलवार, 15 सितंबर को मेरठ के इसी स्टेडियम में अंकुश मलिक नाम का युवक अपनी दौड़ पूरी करने की कोशिश कर रहा था, तभी उसकी तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसी तरह ठीक अगले दिन यानी बुधवार को तरुण कुमार नाम के एक अन्य अभ्यर्थी के साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हादसा हुआ। दौड़ के दौरान तरुण की सांसें उखड़ने लगीं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
दूसरी तरफ, राजधानी लखनऊ के रिजर्व पुलिस लाइन मैदान में भी एक ऐसा ही दुखद मामला सामने आया। यहां योगेंद्र कुमार नामक अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा में हिस्सा ले रहा था। दौड़ने के दौरान अचानक उसका शरीर जवाब दे गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस और मेडिकल टीम ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा, मुरादाबाद जिले में भी शिवम यादव नाम का एक युवा दौड़ के दौरान लक्ष्य से महज 50 से 70 मीटर की दूरी पर अचानक गिर पड़ा और उसकी भी मौत हो गई। इन चार मौतों ने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या कहती है होमगार्ड भर्ती की शारीरिक परीक्षा की शर्त?
आखिर इस परीक्षा में ऐसा क्या है जो युवाओं की जान पर बन आई है? इसे समझने के लिए होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट के नियमों को देखना होगा। नियमों के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को 4.8 किलोमीटर के लंबे दायरे को दौड़कर पूरा करना होता है। इस कठिन दूरी को तय करने के लिए अभ्यर्थियों को 28 मिनट का समय दिया जाता है। इसका मतलब साफ है कि युवाओं को स्टेडियम या निर्धारित मैदान के करीब 12 चक्कर लगाने होते हैं।
यह दौड़ सामान्य नहीं है, बल्कि इसके लिए उच्च स्तर की सहनशक्ति (स्टेमिना), फेफड़ों की मजबूत क्षमता और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि कई युवा बिना किसी पूर्व तैयारी या जिम व रनिंग के अभ्यास के सीधे परीक्षा मैदान में उतर रहे हैं। चार बड़ी मौतों के अलावा, कई अन्य केंद्रों पर भी दर्जनों अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की खबरें हैं। अकेले मेरठ में पहले ही दिन 11 ऐसे अभ्यर्थी सामने आए थे जिन्हें चक्कर आने, सांस फूलने या उल्टी होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कड़ी चेतावनी
इन लगातार हो रही मौतों के बाद चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ बेहद चिंतित हैं। डॉक्टरों का साफ कहना है कि किसी भी लंबी दौड़ या भारी शारीरिक श्रम वाले टेस्ट में उतरने से पहले शरीर को उसके अनुकूल बनाना सबसे जरूरी शर्त होती है। अचानक से बिना तैयारी के भारी शारीरिक मेहनत करने पर दिल और फेफड़ों पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ता है, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।
"किसी भी फिजिकल टेस्ट से ठीक पहले अभ्यर्थियों को कम से कम एक महीना पहले से लगातार अभ्यास शुरू कर देना चाहिए। बिना अभ्यास के इतनी लंबी और कठिन दौड़ लगाना युवाओं की तबीयत बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। अभ्यर्थी कभी भी खाली पेट दौड़ में शामिल न हों। दौड़ शुरू करने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करना बेहद जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।" — डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ
विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि युवाओं को अपनी शारीरिक सीमाओं का अंदाजा होना चाहिए। यदि किसी को पहले से सांस की बीमारी, दिल की कमजोरी या ब्लड प्रेशर से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दौड़ में हिस्सा लेने से बचना चाहिए। मैदान पर उतरने से पहले वार्म-अप करना और शरीर को हाइड्रेट रखना प्राथमिक आवश्यकता है, जिसे अक्सर युवा अनदेखा कर देते हैं।
भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के लिए आगे की सीख
इन त्रासदियों ने एक तरफ जहां परिवारों को कभी न भरने वाला दर्द दिया है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भर्ती केंद्रों पर मेडिकल स्क्रीनिंग को और अधिक सख्त किया जाना चाहिए। हालांकि, जानकारों का मानना है कि परीक्षा आयोजित करने वाले विभाग अपनी जगह मानक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर युवाओं की लापरवाही इन हादसों की मुख्य वजह बन रही है। सरकारी नौकरी की चाहत में युवा अक्सर अपनी सेहत और शरीर की चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो घातक साबित हो रहा है।
इस पूरी घटना से राज्य के तमाम युवाओं के लिए एक कड़ा संदेश निकलता है कि फिटनेस केवल एक दिन की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह एक लंबी जीवनशैली और सतत अभ्यास का परिणाम है। बिना तैयारी के मैदान में उतरना अपनी जिंदगी को खतरे में डालने जैसा है। आने वाले दिनों में उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर ऐसे एहतियाती कदम उठाएंगे जिससे भविष्य में इस तरह के हादसों को पूरी तरह रोका जा सके और युवा सुरक्षित माहौल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।




