नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों किसानों और आम आदमी के लिए मौसम विभाग ने मानसून को लेकर बहुत बड़ी और राहत भरी जानकारी साझा की है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान गूगल ट्रेंड्स पर 'रुतुपव' यानी दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल को लेकर सर्च में अचानक भारी तेजी देखने को मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल मानसून अपने तय समय से पहले देश के कई हिस्सों में दस्तक दे सकता है। केरल के तट पर इसके समय से पहले पहुंचने के साफ संकेत मिल रहे हैं और हवा का रुख भी पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है।
खेती-किसानी से जुड़े जानकारों का मानना है कि समय पर बारिश शुरू होने से धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी। पिछले कुछ सालों से मानसून के अनिश्चित व्यवहार के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस बार ला नीना की स्थिति मजबूत होने के कारण अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। देश के दक्षिणी राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियों ने अभी से ही जोर पकड़ लिया है जिससे गर्मी से बेहाल लोगों को भी काफी हद तक राहत महसूस हो रही है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
हमारे देश की कृषि आज भी बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। खेतों की सिंचाई और भूजल स्तर को सुधारने के लिए मानसून का समय पर आना बेहद जरूरी माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून की यह रफ्तार ऐसी ही बनी रही तो खरीफ की फसल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। सरकार ने भी राज्यों को बीज और खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए हैं ताकि किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
तटीय इलाकों और दक्षिणी राज्यों के जिला प्रशासनों ने भी मानसून की संभावित आहट को देखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। नालों की सफाई, जल निकासी के पुख्ता इंतजाम और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की निगरानी का काम तेज कर दिया गया है। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए स्थानीय प्रशासन इस बार किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए पहले से ही पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। आपदा प्रबंधन टीमों को भी हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
देश के बाकी हिस्सों में कब पहुंचेगी बारिश?
मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार, केरल के रास्ते प्रवेश करने के बाद मानसून तेजी से उत्तर और मध्य भारत की तरफ बढ़ेगा। जून के पहले हफ्ते तक इसके महाराष्ट्र और कर्नाटक के बड़े हिस्से को कवर करने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में भी झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने की असली तस्वीर अगले कुछ दिनों में हवा के दबाव और बादलों की स्थिति साफ होने के बाद ही सामने आएगी।
आम जनता के लिए भी यह साल गर्मी के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहा है और देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। ऐसे में मानसून की यह दस्तक किसी संजीवनी से कम नहीं है। बिजली की बढ़ती मांग और पानी के संकट से जूझ रहे शहरों के लिए भी यह बारिश बड़ी राहत लेकर आएगी। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की गतिविधियों और प्रशासनिक तैयारियों पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी।
गर्मी और बिजली संकट से मिलेगी राहत
मानसून के आने से देश भर में चल रहे भीषण लू के दौर से लोगों को जल्द ही छुटकारा मिलने की उम्मीद है। तापमान में भारी गिरावट दर्ज होने से बिजली की मांग पर भी दबाव कम होगा जो पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ रही थी। जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने से पेयजल की समस्या से जूझ रहे इलाकों को भी बड़ी राहत मिलने की पूरी संभावना है।




