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एमबीबीएस के पहले साल में फेल छात्रों के लिए बड़ी राहत, एनएमसी ने दिया पांचवां मौका

नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी ने एमबीबीएस के पहले साल के छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब छात्रों को अपनी फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए पांचवां यानी मर्सी अटेम्प्ट मिलेगा। इसके साथ ही पूरा कोर्स पूरा करने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
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शिक्षा एवं करियर डेस्क, द फ्रीलांस
शिक्षा व करियर मार्गदर्शन•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•49
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एमबीबीएस के पहले साल में फेल छात्रों के लिए बड़ी राहत, एनएमसी ने दिया पांचवां मौका
📷 एमबीबीएस के पहले साल में फेल छात्रों के लिए बड़ी राहत, एनएमसी ने दिया पांचवां मौका — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी ने एमबीबीएस के पहले साल के छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब छात्रों को अपनी फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए पांचवां यानी मर्सी अटेम्प्ट मिलेगा। इसके साथ ही पूरा कोर्स पूरा करने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश के मेडिकल छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी ने उन सभी छात्रों के लिए नियमों में बदलाव किया है जो एमबीबीएस के पहले साल की परीक्षा में अटक जाते थे। अब छात्रों को फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए पांचवां मौका यानी मर्सी अटेम्प्ट दिया जाएगा। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हजारों छात्रों के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं है क्योंकि कई छात्र चार मौके खत्म होने के बाद मानसिक तनाव में आ जाते थे।

इस नए फैसले के तहत अब छात्रों को अपना पूरा एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के लिए दस साल का कुल समय मिलेगा। पहले यह समय सीमा कम हुआ करती थी जिससे कई छात्रों को बीच में ही अपनी डिग्री छोड़ने का खतरा पैदा हो जाता था। अदालत में भी इस मामले पर कई तरह की सुनवाई चली थीं जहां एनएमसी के नियमों को सही ठहराया गया था। लेकिन छात्रों कीि लगातार मांग और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अब नरमी बरतने का फैसला किया है। इस कदम से उन परिवारों को भी बहुत बड़ी राहत मिली है जिनके बच्चे डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

फर्स्ट ईयर की परीक्षा पास करने के लिए मिलेंगे अब पांच मौके

एमबीबीएस की पढ़ाई देश में सबसे कठिन मानी जाती है। इसमें दाखिला पाने के बाद छात्रों को पहले ही साल में कठिन परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है। नियम यह था कि छात्रों को फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के लिए कुल चार ही मौके मिलते थे। कई प्रतिभाशाली छात्र भी किन्हीं कारणों से इन सीमित प्रयासों में परीक्षा पास नहीं कर पाते थे। ऐसे छात्रों का पूरा करियर खतरे में पड़ जाता था और वे डॉक्टर बनने की रेस से बाहर हो जाते थे। अब एनएमसी के इस नए नियम के आने के बाद छात्रों को एक अतिरिक्त यानी पांचवां मौका मिल सकेगा।

देश के कई राज्यों से छात्रों और उनके अभिभावकों ने लगातार आवाज उठाई थी कि उन्हें अपनी योग्यता साबित करने का एक और मौका मिलना चाहिए। अदालत के पिछले फैसलों के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि क्या कोई विशेष छूट दी जाएगी या नहीं। अब एनएमसी ने साफ कर दिया है कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर छात्रों को यह अतिरिक्त प्रयास दिया जाएगा। इससे मेडिकल छात्रों के मानसिक दबाव में भारी कमी आएगी और वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकेंगे।

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दस साल में पूरा करना होगा एमबीबीएस का पूरा कोर्स

सिर्फ पहले साल की परीक्षा ही नहीं बल्कि एनएमसी ने पूरे एमबीबीएस कोर्स की अवधि पर भी बड़ा फैसला लिया है। अब छात्रों को एडमिशन की तारीख से लेकर पूरा कोर्स खत्म करने के लिए दस साल का कुल समय मिलेगा। मेडिकल की पढ़ाई में कई बार इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल और थ्योरी परीक्षाओं के कारण समय ज्यादा लग जाता है। ऐसे में दस साल की यह समय सीमा छात्रों के लिए बहुत मददगार साबित होगी। जो छात्र किसी बीमारी या अन्य गंभीर कारणों से अपनी पढ़ाई समय पर पूरी नहीं कर पाए थे, वे अब इस नियम का लाभ उठा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने में भी मददगार होगा क्योंकि कई होनहार छात्र सिर्फ इसलिए डॉक्टर नहीं बन पाते थे क्योंकि वे परीक्षा पास करने के नियमों में उलझ कर रह जाते थे। मेडिकल कॉलेजों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नए नियमों की जानकारी अपने सभी छात्रों तक पहुंचाएं। कॉलेज स्तर पर भी छात्रों की काउंसलिंग की जाएगी ताकि वे अपने बचे हुए प्रयासों का सही इस्तेमाल कर सकें।

छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया और आगे की राह

द फ्रीलान्स की टीम ने जब कुछ मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों से बात की तो उनके चेहरों पर एक नई उम्मीद साफ दिखाई दी। कई छात्रों ने बताया कि वे चार प्रयास पूरे होने के बाद बहुत ज्यादा तनाव में थे और उन्हें लग रहा था कि उनकी सालों की मेहनत बेकार चली जाएगी। अब एनएमसी के इस फैसले के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने का एक और पक्का मौका मिल गया है। देश के विभिन्न मेडिकल संघों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे छात्रों के हित में उठाया गया एक बहुत ही सकारात्मक कदम बताया है।

हालांकि एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त मौका नियमों के दायरे में ही मिलेगा और छात्रों को इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। लापरवाही बरतने वाले छात्रों को नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर यह फैसला मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है जो आने वाले समय में अनगिनत छात्रों का भविष्य बचाने का काम करेगा। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर आगे भी अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

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