केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की दो टूक, कहा- भारत कोई बांग्लादेश नहीं है
देश की राजनीति में इन दिनों 'रिजीम चेंज' यानी सरकार बदलने के बयानों को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ा हुआ है। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभालते हुए उन तमाम ताकतों और बयानों पर करारा प्रहार किया है जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। रिजिजू ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि भारत के खिलाफ किसी भी तरह के बाहरी या अराजक तौर-तरीके नहीं चल सकते।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बेबाक बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि देश की व्यवस्था को सड़क के दबाव से नहीं, बल्कि संविधान और नियमों से चलाया जाता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि भारत के करोड़ों नागरिक अपने अधिकारों और देश की अखंडता के प्रति पूरी तरह सजग हैं।
दिमागी नक्सलियों और देशभक्तों के बीच छिड़ी वैचारिक जंग
मामले की गहराई में जाएं तो यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब देश के कुछ छात्र संगठनों और वामपंथी विचारधारा से जुड़े नेताओं ने सार्वजनिक मंचों से पड़ोसी देश के छात्र आंदोलनों का हवाला देना शुरू किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने देश के भीतर सक्रिय वैचारिक ताकतों पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश के भीतर एक साफ लकीर खिंच चुकी है।
मंत्री ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि एक तरफ वे लोग हैं जो देश के संविधान और कानून का सम्मान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे तत्व हैं जिन्हें उन्होंने 'दिमागी नक्सल' करार दिया है। रिजिजू के मुताबिक, ये लोग देश के अंदर अराजकता फैलाने और जनमानस को भ्रमित करने का काम लगातार कर रहे हैं, जिसे देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
"बड़े आए 'रिजीम चेंज' करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है। भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं, वे देश का निर्माण करेंगे, इसे बर्बाद नहीं करेंगे।"
— किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री
देश के युवाओं को लेकर विपक्षी बयानों पर तीखा पलटवार
विपक्षी दलों और कुछ छात्र नेताओं द्वारा युवाओं को भड़काने या उनके कंधे पर रखकर राजनीति करने के प्रयासों पर भी किरेन रिजिजू ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि आज का भारतीय युवा तकनीकी रूप से सक्षम है और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। युवा वर्ग स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी, नवाचार और खेल के मैदान में देश का नाम रोशन कर रहा है।
उन्होंने साफ किया कि कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए युवाओं के नाम पर गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि देश की युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। युवाओं को गुमराह करने वाली ताकतों को कभी सफलता नहीं मिलेगी क्योंकि वे देश की ताकत और उसकी दिशा को अच्छी तरह समझते हैं।
प्रशांत भूषण और छात्र नेताओं की टिप्पणियों पर गरमाई सियासत
यह पूरा राजनीतिक टकराव उस वक्त शुरू हुआ जब राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा समेत कुछ अन्य वक्ताओं ने सत्ता परिवर्तन और पड़ोसी देश में हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र किया था। वक्ताओं ने देश में इसी तरह के आंदोलनों की आवश्यकता पर बल दिया था, जिसके बाद से ही सत्ता पक्ष की ओर से आक्रामक प्रतिक्रियाएं सामने आनी शुरू हो गईं।
भारतीय जनता पार्टी और उसके तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इस तरह के बयानों को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला और अराजकता फैलाने की कोशिश बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह वैचारिक और राजनीतिक जंग और अधिक तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी विचारधारा को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं।












