सेना के भीतर अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख
भारतीय सेना अपने अनुशासन और उच्च नैतिक मूल्यों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। सेना का हर एक जवान और अधिकारी देश की रक्षा के साथ-साथ अपने आचरण से एक मिसाल पेश करता है। लेकिन जब कोई अधिकारी इन स्थापित मानदंडों और सैन्य मर्यादाओं को तार-तार करता है, तो सेना बिना किसी देरी के कड़े कदम उठाती है। हाल ही में एक ऐसा ही संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जहां सेना के एक मेजर पर साथी अधिकारियों की पत्नियों के साथ अवैध संबंध रखने और गंभीर कदाचार के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के बाद भारतीय सेना प्रशासन ने आरोपी अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने की पूरी तैयारी कर ली है।
रक्षा मंत्रालय से जुड़े उच्च सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कोर्ट-मार्शल की लंबी और जटिल प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता चुना गया है। सेना मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि बल के भीतर इस तरह की अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी मेजर ने इस प्रशासनिक फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर तरफ से झटका ही मिला है।
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण से झटका और कानूनी दांव-पेंच
अपनी नौकरी बचाने और सेना की इस कार्रवाई को रोकने के लिए आरोपी मेजर ने दिल्ली स्थित सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) की प्रिंसिपल बेंच में याचिका दायर की थी। मेजर के वकीलों की दलील थी कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई नियमों के अनुकूल नहीं है और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया है। हालांकि, न्यायाधिकरण ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया।
न्यायाधिकरण की बेंच, जिसमें न्यायविद् और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल रहे, ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिकारी को अपने ऊपर लगे आरोपों पर तय समयसीमा के भीतर जवाब देना होगा। हालांकि, अदालत ने सेना को यह जरूर निर्देशित किया है कि वह कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की पूरी रिपोर्ट और चार्ज हियरिंग से जुड़े दस्तावेज आरोपी मेजर को उपलब्ध कराए, ताकि वे अपनी कानूनी आपत्तियां सही ढंग से दर्ज करा सकें।
अगस्त 2023 में खुला था अनैतिक आचरण का काला चिट्ठा
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई थी, जब आरोपी मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सीधे सेना मुख्यालय के अनुशासन एवं सतर्कता निदेशालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें न केवल पारिवारिक उपेक्षा और घरेलू कलह शामिल थी, बल्कि सैन्य अधिकारियों के बीच विश्वास को झकझोर देने वाले तथ्य भी सामने आए थे। शिकायत के मुताबिक, मेजर के संबंध कई महिलाओं के साथ थे, जिनमें दो साथी सैन्य अधिकारियों की पत्नियां भी शामिल थीं।
सेना के आंतरिक नियमों के तहत इस तरह के मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। सेना की भाषा में इसे 'स्टीलिंग अफेक्शन' या विश्वासघात की श्रेणी में रखा जाता है, जो एक सैन्य अधिकारी के लिए आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। शिकायत मिलने के बाद तुरंत मैकेनाइज्ड ब्रिगेड स्तर पर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बिठाई गई थी, जिसने अपनी जांच में आरोपी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया।
कारण बताओ नोटिस और आगे की कार्रवाई की रूपरेखा
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेना ने आर्मी रूल्स 19 और 14 के तहत आरोपी मेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में मुख्य रूप से यह सवाल पूछा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जब पारंपरिक कोर्ट-मार्शल करना व्यावहारिक नहीं प्रतीत होता है, तो क्यों न उन्हें सीधे तौर पर सेवा से बर्खास्त कर दिया जाए। सेना के इस कड़े कदम से रक्षा हलकों में हलचल मच गई है।
"सेना में अधिकारी वर्ग से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कनिष्ठों और साथियों के प्रति अनुशासित और सम्मानजनक आचरण बनाए रखें। जब इस प्रकार की अनैतिक घटनाएं सामने आती हैं, तो संस्थागत शुद्धता के लिए त्वरित और कड़े प्रशासनिक कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है।"— रक्षा मामलों के विशेषज्ञ
आने वाले दिनों में इस मामले पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है। एफ्ट के आदेश के बाद अब सेना द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर आरोपी अधिकारी को अपना अंतिम जवाब देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश आधिकारिक रूप से जारी कर दिया जाएगा। यह मामला एक बार फिर से इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना अपने आंतरिक अनुशासन और गरिमा से समझौता करने के पक्ष में कभी नहीं रही है।












