राजधानी दिल्ली के सीमापुरी इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां एक चार मंजिला पुरानी आवासीय इमारत अचानक भरभरा कर ढह गई, जिसमें अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है। इस दर्दनाक हादसे में एक गर्भवती महिला की भी मौत हो गई है, जिसने मलबे के नीचे से खुद को बचाने की गुहार लगाई थी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया था। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए क्रेन और गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि सुरक्षित तरीके से दबे हुए लोगों तक पहुंचा जा सके।
प्रशासन की शुरुआती पड़ताल और स्थानीय लोगों के बयानों से इस भीषण हादसे की असली वजह सामने आने लगी है। चश्मों और पड़ोसियों का दावा है कि कुछ दिन पहले आए भूकंप के हल्के झटकों के बाद इस पुरानी इमारत में बड़ी दरारें आ गईं थी। इमारत की नींव और दीवारें पहले से ही कमजोर थीं, लेकिन रखरखाव के अभाव में किसी ने इन दरारों पर ध्यान नहीं दिया। कमजोर हो चुकी संरचना भूकंप के झटकों का दबाव नहीं झेल पाई और मंगलवार को यह ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे के वक्त इमारत के अंदर कई परिवार मौजूद थे, जिससे जान-माल का नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है।
घने इलाकों में खड़े पुराने मकानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सीमापुरी के इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पुरानी दिल्ली और सीमापुरी जैसे इलाकों में हज़ारों ऐसी इमारतें हैं जो बहुत पुरानी और जर्जर हालत में खड़ी हैं। जरा सी लापरवाही या प्राकृतिक आपदा इन पुरानी इमारतों को मौत का कुआं बना सकती है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी अब ऐसे जर्जर मकानों की पहचान करने की बात कह रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागना प्रशासन की एकमात्र कार्यशैली बन गई है? समय रहते इन खतरनाक इमारतों को खाली क्यों नहीं कराया जाता है?
इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम का माहौल छाया हुआ है। अस्पताल के बाहर अपनों को तलाश रहे परिजनों की चीख-पुकार दिल को दहला देने वाली है। घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस ने इस मामले में लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है और इमारत के मालिक की तलाश शुरू कर दी है।
भूकंप के झटकों और जर्जर नींव का खतरनाक मेल
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूकंपीय जोन के लिहाज से बेहद संवेदनशील श्रेणी में आता है। जब भी इस क्षेत्र में धरती डोलती है, पुरानी और अनियोजित तरीके से बनी इमारतों पर सबसे बड़ा खतरा मंडराता है। सीमापुरी की यह इमारत भी इसी लापरवाही का शिकार हुई है। बिना किसी इंजीनियर की देखरेख के बनी और सालों पुरानी यह इमारत अंदर से पूरी तरह खोखली हो चुकी थी। भूकंप के वक्त आए हल्के झटकों ने इसकी रही-सही ताकत भी छीन ली और आखिरकार एक दिन यह पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई।
घटनास्थल पर मौजूद राहत कर्मियों का कहना है कि तंग गलियां होने की वजह से भारी मशीनें मौके पर समय पर नहीं पहुंच पाईं। इससे बचाव कार्य में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय स्वयंसेवकों और पुलिस ने अपने हाथों से मलबा हटाकर शुरुआती लोगों को बाहर निकाला। अगर रास्ता चौड़ा होता और मशीनें जल्दी पहुंच जातीं तो शायद कुछ और कीमती जानें बचाई जा सकती थीं। यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की कहानी नहीं है, बल्कि हमारी व्यवस्था की उस लापरवाही का आईना है जो हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही आंखें खोलती है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई
द फ्रीलान्स की टीम ने जब सीमापुरी के उस घटनास्थल का दौरा किया तो वहां का मंजर बेहद भयानक था। चारों तरफ ईंटों के मलबे और टूटे हुए सामान के बीच लोग अपनों की तलाश करते नजर आए। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि कई बार निगम अधिकारियों को इन जर्जर इमारतों की शिकायत दी गई थी, लेकिन कभी कोई सुध नहीं ली गई। अब अधिकारी कागजी खानापूरी करने और मुआवजे के बड़े-बड़े ऐलान करने में जुट गए हैं। लेकिन क्या मुआवजा किसी मां की गोद या किसी सुहाग को वापस ला सकता है?
जिला प्रशासन ने अब पूरे इलाके की पुरानी इमारतों का सर्वे करने का आदेश दिया है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जब तक निर्माण और सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होगा, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं होती रहेंगी। जरूरत इस बात की है कि अवैध और जर्जर निर्माण करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले की हर एक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और पीड़ितों को न्याय मिलने तक इस आवाज को उठाता रहेगा।





