महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में पानी की कमी हमेशा से एक बड़ा दर्द रही है। चिलचिलाती धूप और सूखे कुओं के बीच यहां के लोगों की जिंदगी सिर्फ पानी ढोने में ही बीत जाती थी। ऐसे मुश्किल समय में मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर और उनके साथी कलाकार मकरंद अनासपुरे ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। दोनों ने मिलकर 'नाम फाउंडेशन' नाम की संस्था की शुरुआत की, जिसने इस इलाके की किस्मत ही बदल डाली।
शुरुआत में इस संस्था का मकसद सिर्फ सूखे से जूझ रहे किसानों को आर्थिक मदद देना था। लेकिन धीरे-धीरे इन कलाकारों ने समझा कि पैसे देने से ज्यादा जरूरी स्थायी हल निकालना है। इसके बाद जल संरक्षण पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। गांवों में नए तालाब बनाए गए, पुराने बांधों को गहरा किया गया और बारिश के हर एक बूंद को रोकने के पुख्ता इंतजाम किए गए।
टैंकर मुक्त हुए मराठवाड़ा के कई गांव
जल संरक्षण के इन ठोस कामों का नतीजा यह निकला कि जिन गांवों में पानी के लिए टैंकरों की लंबी कतारें लगती थीं, वहां अब पानी की किल्लत काफी हद तक खत्म हो गई है। भूजल स्तर ऊपर आने से किसानों के चेहरे पर भी मुस्कान लौटने लगी है। अब वे एक बार फिर अपनी जमीन पर फसल उगा पा रहे हैं और उन्हें अपनी आजीविका के लिए शहर की तरफ पलायन नहीं करना पड़ रहा है।
नाना पाटेकर अपनी फिल्मों और चकाचौंध भरी दुनिया से दूर एक बेहद साधारण जीवन जीते हैं। उनकी सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे किसानों की मदद के लिए हमेशा जमीन पर मौजूद रहते हैं। मकरंद अनासपुरे भी अपनी फिल्मों के जरिए सामाजिक मुद्दों को उठाते रहे हैं और असल जिंदगी में भी किसानों के दर्द को बांटने में पीछे नहीं रहते हैं।
मंच और पर्दे से अलग सामाजिक जिम्मेदारी का सफर
मकरंद अनासपुरे ने फिल्मों में चाहे गंभीर वकील की भूमिका निभाई हो या फिर कॉमिक किरदार, उन्होंने हमेशा अपनी कला से लोगों के दिलों में जगह बनाई है। उनकी फिल्म 'कायद्याचा बोला' में उनका निभाया गया वकील केशव कुंथलगिरिकर का किरदार आज भी लोगों को याद है। वहीं दूसरी ओर, 'मानव हत्या' जैसे क्राइम थ्रिलर और गंभीर वेब सीरीज में उनका अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आया है।
लेकिन परदे की इन कामयाबियों से परे, मकरंद और नाना की जोड़ी ने यह साबित कर दिया है कि असली हीरो वे हैं जो समाज के काम आएं। मराठवाड़ा के गांवों में आज जो हरियाली और पानी की उपलब्धता दिखती है, उसके पीछे इन दोनों कलाकारों की सालभर की कड़ी मेहनत और विजन है।
भविष्य की योजनाएं और किसानों के लिए खुला आसमान
नाम फाउंडेशन का दायरा अब सिर्फ जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के परिवारों और बच्चों की शिक्षा के लिए भी काम कर रहा है। संस्था का लक्ष्य है कि मराठवाड़ा का कोई भी किसान कर्ज या पानी की कमी के कारण लाचार न हो। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में यह बात साफ सामने आई है कि जब कला और सामाजिक संवेदनाएं मिलती हैं, तो बड़े से बड़ा संकट भी टाला जा सकता है।





