मेरठ शहर में हुए बेहद चर्चित और खौफनाक नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने आज अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। विशेष अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को सौरभ की हत्या का पूरी तरह दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इस बहुचर्चित फैसले को सुनने के लिए कोर्ट रूम के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और आम लोगों की भी भारी भीड़ जमा थी। घटना के सामने आने के बाद से ही पूरे इलाके में इस खौफनाक वारदात को लेकर भारी गुस्सा और हैरानी का माहौल बना हुआ था।
पुलिस जांच और अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान सामने आया कि किस तरह बेहद शातिर तरीके से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया था। आरोपी मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की और उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए एक नीले रंग के बड़े ड्रम का इस्तेमाल किया था। शव को ड्रम में भरकर ठिकाने लगाने की इस बेरहमी भरी घटना ने हर किसी को अंदर तक दहला दिया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत सबूत और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध समाज में कड़ा संदेश देने के लिए सबसे कड़ी सजा के हकदार हैं।
फैसला आने के बाद कोर्ट रूम में क्या हुआ?
अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद पीड़ित परिवार की भावनाएं छलक पड़ीं। मृतक सौरभ की मां ने नम आंखों से मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज उन्हें और उनके परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया है। मां का कहना था कि उनके बेटे के साथ जो दरिंदगी हुई थी, उसके लिए फांसी की सजा ही एकमात्र उचित न्याय थी। वहीं, सौरभ के परिवार के अन्य सदस्यों और जेठ ने भी कोर्ट के इस फैसले पर संतोष जताया है। परिवार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि आरोपियों को फांसी की सजा नहीं मिलती है, तो वे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। अब अदालत के इस फैसले से परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
इस पूरे मामले की गूंज सिर्फ मेरठ ही नहीं बल्कि पूरे देश में सुनाई दी थी। सोशल मीडिया से लेकर आम बैठकों तक में लोग इस निर्मम हत्या के तौर-तरीकों पर चर्चा कर रहे थे। एक तरफ जहां आरोपियों के इस अमानवीय कृत्य की हर तरफ कड़ी निंदा हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जांच एजेंसियों की मुस्तैदी की भी सराहना की जा रही थी। वकीलों और जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तेजी से सुनवाई और सख्त सजा मिलने से समाज में एक मजबूत और सकारात्मक संदेश जाता है। अपराध करने वालों के मन में कानून का डर बना रहना बेहद जरूरी है।
जांच से लेकर सजा तक की पूरी कानूनी प्रक्रिया
यह पूरा मामला तब खुला जब पुलिस ने लापता सौरभ की तलाश शुरू की और कड़ियों को जोड़ते हुए मुस्कान तथा साहिल तक पहुंची। पूछताछ के दौरान जब नीले ड्रम से शव बरामद हुआ, तो पुलिसई अमला भी सन्न रह गया था। फॉरेंसिक टीम ने मौके से तमाम वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए थे, जो अदालत में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सबसे बड़े हथियार साबित हुए। दोनों आरोपियों ने शुरू में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की सख्त पूछताछ के सामने वे ज्यादा देर टिक नहीं पाए और अपना जुर्म कबूल कर लिया।
निचली अदालत के इस फैसले के बाद अब आगे की विधिक प्रक्रिया के तहत मामले को उच्च न्यायालय में पुष्टि के लिए भेजा जाएगा। कानून के जानकारों के अनुसार, मौत की सजा के मामलों में उच्च न्यायालय से भी संपुष्टि होना अनिवार्य होता है। बचाव पक्ष के वकील इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प खुला रख सकते हैं। हालांकि, वर्तमान में आए इस कड़े फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और जुर्म करने वालों को उनके किए की सजा जरूर मिलती है। मेरठ की इस घटना को लोग लंबे समय तक एक डरावनी मिसाल के तौर पर याद रखेंगे।
समाज पर इस फैसले का क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले के बाद से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जितनी जल्दी और सख्त सजा मिले, उतना ही समाज के लिए बेहतर होता है। पुलिस प्रशासन ने भी फैसले के बाद किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर में गश्त बढ़ा दी है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले की हर एक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। कानून की इस जीत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि न्याय व्यवस्था में आम आदमी का भरोसा अटूट है।









