नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में मानसून की चाल एक बार फिर से बदल गई है। गूगल ट्रेंड्स पर तेलुगु शब्द 'रुतुपव' यानी मानसून को लेकर पिछले चार घंटों में अचानक खोज बहुत बढ़ गई है। लोग यह जानने के लिए बेताब हैं कि उनके इलाके में बारिश कब और कितनी होगी। मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसके कारण आसमान में काले बादल छाए हैं और झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है।
दक्षिण भारत के राज्यों से लेकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले कुछ दिनों से रुकी हुई मानसूनी हवाएं फिर से सक्रिय हो गई हैं। खासकर तटीय इलाकों और दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका को देखते हुए पूरी तैयारी कर ली है। किसानों के चेहरों पर भी इस बारिश से खुशी लौट आई है क्योंकि उनकी फसलों के लिए यह पानी बहुत जरूरी है।
मानसून के दोबारा सक्रिय होने की असली वजह
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमी सिस्टम बना है। इसी वजह से मानसूनी हवाओं को नमी मिल रही है और वे फिर से ताकतवर हो गईं हैं। इस बदलाव से हवा की रफ्तार तेज हो गई है और बारिश का दायरा भी बढ़ गया है। जिन इलाकों में पिछले कई हफ्तों से सूखा पड़ रहा था वहां अब झमाझम पानी बरस रहा है। तापमान में भी अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से चैन मिला है।
आम जनता और खासकर सफर करने वाले लोगों को इस दौरान थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई सड़कों पर पानी भरने से ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई है। नगर निगम और स्थानीय निकाय पानी की निकासी के कामों में जुट गए हैं ताकि आम आदमी को जाम से बचाया जा सके। रेलवे और विमान सेवाओं पर भी मौसम का थोड़ा असर पड़ा है लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में है। यात्री घर से निकलने से पहले मौसम का ताजा हाल जरूर देख रहे हैं।
किसानों के लिए वरदान साबित हो रही यह बारिश
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया दौर खरीफ की फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है। जिन किसानों की फसलें पानी की कमी से सूखने की कगार पर थीं उन्हें अब नया जीवन मिल गया है। धान और मक्का जैसी फसलों को इस समय सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। इस समय हो रही बारिश से भूजल स्तर में भी सुधार होने की पूरी उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में लोग इस बारिश को भगवान का आशीर्वाद मान रहे हैं क्योंकि इससे खेती की लागत कम होगी।
आने वाले चौबीस घंटों में मौसम का यह मिजाज देश के बाकी हिस्सों में भी फैल सकता है। मौसम विभाग लगातार सैटेलाइट से बादलों की आवाजाही पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा उसे तुरंत साझा किया जाएगा। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है और जमीन से हर जरूरी खबर आप तक पहुंचाती रहेगी। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
सावधानी और सुरक्षा के लिए प्रशासन की अपील
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भारी बारिश के दौरान लोग बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों के पास न जाएं। बच्चों को भी जलभराव वाले इलाकों में जाने से रोकने के लिए कहा गया है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके। आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए गए हैं जिन पर लोग मदद के लिए फोन कर सकते हैं।






