नई दिल्ली/श्रीकाकुलम ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रेल की पटरियों पर इन दिनों भारी लापरवाही देखने को मिल रही है। लोग जरा सी जल्दबाजी में अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं। ताजा मामला आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले से सामने आया है। वहां एक तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन ने चार छात्रों को कुचल दिया। चारों छात्रों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है। रेलवे पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि छात्र रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। उसी समय तेज गति से आ रही एक्सप्रेस ट्रेन आ गई। छात्रों को संभलने का बिल्कुल मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां दृश्यता कम थी और ट्रेन की रफ्तार बहुत तेज थी। तेज आवाज के बावजूद छात्र समय पर ट्रैक से हट नहीं सके। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिजन रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया है।
श्रीकाकुलम में कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
द फ्रीलान्स की पड़ताल में सामने आया कि यह हादसा बाटुवा रेलवे स्टेशन के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छात्र अपने काम से जा रहे थे। उन्होंने पटरियों के रास्ते पैदल चलना चुना। उसी समय विशाखापट्टनम की तरफ से कोणार्क एक्सप्रेस गुजर रही थी। ट्रेन के हॉर्न की आवाज शायद छात्र ठीक से समझ नहीं पाए। दो सेकंड के भीतर यह भयानक हादसा हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के लिए घटना स्थल पर पहुंच चुके हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यहां अक्सर लोग शॉर्टकट के चक्कर में पटरियों पर चलते हैं। इस जगह पर कोई पैदल ओवरब्रिज नहीं है। लोग मजबूरी में रेलवे ट्रैक पार करते हैं। पहले भी यहां कई बार छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों ने कई बार रेलवे प्रशासन से यहां सुरक्षा दीवार और पुल की मांग की थी। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बड़ी त्रासदी के बाद अब लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
चलती ट्रेन में चढ़ने की होड़ और रील का बुखार
पटरियों पर केवल पैदल चलने की ही लापरवाही नहीं हो रही है। सोशल मीडिया पर रील बनाने का बुखार भी युवाओं की जान ले रहा है। हाल ही में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इसमें एक युवक पटरी पर खड़े होकर रील बना रहा था। तभी पीछे से आई तेज रफ्तार ट्रेन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। गनीमत रही कि उसकी जान बच गई, लेकिन वह बुरी तरह घायल हो गया। चंद लाइक और व्यूज के चक्कर में युवा अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
इसके अलावा स्टेशनों पर चलती ट्रेन में चढ़ने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसल गया। वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खाली जगह में गिरने लगा। तभी वहां तैनात एक सुरक्षा जवान ने पलक झपकते ही उसे खींच लिया। केवल दो सेकंड की देरी होती तो यात्री की जान चली जाती। सीसीटीवी में कैद यह घटना बताती है कि लोग कितनी बड़ी गलती करते हैं। ट्रेन छूटने के डर से लोग जान जोखिम में डालते हैं।
सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और कड़े नियम की जरूरत
रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ के जवान रोजाना अपनी जान पर खेलकर लोगों को बचा रहे हैं। आए दिन प्लेटफॉर्म से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जहां जवान देवदूत बनकर आते हैं। इसके बावजूद यात्री जरूरी सावधानियों का पालन नहीं कर रहे हैं। स्टेशनों पर लगातार चेतावनी वाले लाउडस्पीकर बजते हैं। बोर्ड पर साफ लिखा होता है कि चलती ट्रेन में न चढ़ें। फिर भी लोग नियमों को अनदेखा कर रहे हैं। प्रशासन अब ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
राजधानी दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में भी रेल सुरक्षा को लेकर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। हाल के दिनों में प्रदर्शनों और सुरक्षा कारणों से कई बार ट्रेनों और मेट्रो की आवाजाही प्रभावित हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी सार्वजनिक परिवहन को सुचारू और सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। यात्रियों की जान-माल की रक्षा करना रेलवे की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
लापरवाही रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं?
द फ्रीलान्स की पड़ताल से साफ है कि केवल चेतावनी से बात नहीं बनेगी। संवेदनशील इलाकों में रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ मजबूत बाड़ लगानी होगी। जहां लोग ट्रैक पार करते हैं, वहां तुरंत पैदल पुल बनाए जाने चाहिए। इसके साथ ही पटरियों पर रील बनाने वालों पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान होना चाहिए। रेलवे स्टेशनों पर स्वचालित दरवाजे लगाने का विचार भी किया जा रहा है। जब तक ट्रेन पूरी तरह नहीं रुकेगी, तब तक दरवाजे नहीं खुलेंगे।
यात्रियों को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। थोड़ी सी जल्दीबाजी या चंद सेकंड का रोमांच जीवन भर का गम दे सकता है। ट्रेन छूट जाए तो दूसरी मिल जाएगी, लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलती। श्रीकाकुलम का हादसा हम सबके लिए एक बहुत बड़ा सबक है। पटरियों पर कदम रखने से पहले हर किसी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना ही होगा।





