कोच्चि और तिरुवनंतपुरम के डिजिटल गलियारों में इन दिनों बच्चों की एक नई कहानी और गाना हर जुबान पर है। इंटरनेट पर बच्चों के वीडियो और बाल कथाओं की दुनिया में 'रॉकी स्नेक - वंचकन पांप' नाम का यह मलयालम प्रोजेक्ट अचानक से सर्च ट्रेंड्स में सबसे ऊपर आ गया है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक लोक कथाओं के आधुनिक डिजिटल रूपांतरण को माता-पिता और बच्चों का भारी समर्थन मिल रहा है। इस गाने में बच्चों को एक चालाक सांप की कहानी के जरिए अच्छे और बुरे की पहचान सिखाई जा रही है। मोबाइल फोन और टैबलेट पर कार्टून वीडियो देखने वाले छोटे बच्चों के बीच यह ट्रेंड पिछले कुछ घंटों में काफी तेजी से उभरा है।
इस ट्रेंड की सबसे खास बात यह है कि क्षेत्रीय भाषा की बाल सामग्री अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही है। यूट्यूब और अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर इसे देश के दूसरे हिस्सों से भी देखा जा रहा है। बाल मनोविज्ञान के जानकारों का मानना है कि एनिमेटेड वीडियो और आसान धुनों के जरिए बच्चों को जल्दी बातें समझाई जा सकती हैं। 'वंचकन पांप' यानी धोखेबाज सांप की यह कहानी पारंपरिक दक्षिण भारतीय लोककथाओं से प्रेरित है। आधुनिक एनिमेशन तकनीक और रंगीन ग्राफिक्स के साथ पेश किए जाने के कारण बच्चे इसे बहुत चाव से देख रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के माता-पिता भी सोशल मीडिया पर इस नए कंटेंट को लेकर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं साझा कर रहे हैं।
डिजिटल बाल साहित्य में क्षेत्रीय भाषाओं की बढ़ती धमक
आजकल इंटरनेट पर अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं के कार्टून और गाने बड़ी संख्या में पसंद किए जा रहे हैं। मलयालम बाल गीत 'रॉकी स्नेक' इसी बदलाव का एक सटीक उदाहरण है जो गूगल ट्रेंड्स में अपनी मजबूत जगह बना चुका है। मेकर्स ने बच्चों की मानसिक उम्र को ध्यान में रखकर इसके बोल और संगीत को बेहद सरल रखा है। कहानी का मुख्य पात्र एक ऐसा सांप है जो अपनी चालाकी से जंगल के दूसरे जानवरों को परेशान करता है। अंत में बच्चों को यह संदेश मिलता है कि धोखेबाजी का परिणाम हमेशा बुरा होता है। इस तरह के मनोरंजक और शिक्षाप्रद वीडियो बच्चों की डिजिटल स्क्रीन टाइम को थोड़ा अधिक सार्थक बना रहे हैं।
केरल के स्थानीय रचनाकारों और एनिमेशन स्टूडियो का कहना है कि वे क्षेत्रीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर लाना चाहते हैं। पारंपरिक कहानियों में आधुनिक तकनीक का तड़का लगाने से बच्चों का जुड़ाव अपनी जड़ों से बना रहता है। जब एक बच्चा मोबाइल पर इस तरह के स्थानीय कार्टून देखता है तो वह अपनी संस्कृति के करीब आता है। यही कारण है कि इस तरह के विषयों पर सर्च लगातार बढ़ रही है और यह गूगल ट्रेंड्स के शीर्ष पर पहुंच गया है। डिजिटल मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस प्रकार के क्षेत्रीय बाल साहित्य की मांग और अधिक तेजी से बढ़ेगी।
पारंपरिक लोक कथाओं का आधुनिक एनिमेटेड सफर
भारत में सदियों से मौखिक परंपरा के जरिए बच्चों को नैतिक कहानियां सुनाने का चलन रहा है। अब वही पुरानी और पारंपरिक कथाएं आधुनिक एनिमेशन और डिजिटल गानों का रूप ले चुकी हैं। 'वंचकन पांप' जैसी रचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि तकनीक और संस्कृति का मेल कितना सुंदर हो सकता है। माता-पिता भी इस बात से खुश हैं कि उनके बच्चों को स्क्रीन पर देखने के लिए हिंसा या फूहड़ता की बजाय अच्छी सीख देने वाली सामग्री मिल रही है। इंटरनेट पर इन गानों के व्यूज लगातार बढ़ रहे हैं और यह ट्रेंड आने वाले कुछ दिनों तक बच्चों के बीच बना रह सकता है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों का मनोरंजन अब एक नई दिशा ले रहा है। स्थानीय लोक कथाएं जब वैश्विक तकनीक से मिलती हैं तो वे सीधे बच्चों के दिलों में उतर जाती हैं। 'रॉकी स्नेक' की यह सफलता अन्य क्षेत्रीय कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। आने वाले समय में हमें भारतीय भाषाओं में इस तरह के और भी कई बेहतरीन और ज्ञानवर्धक डिजिटल प्रोजेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं।





