नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत की लगातार मजबूत होती विदेश नीति और कूटनीतिक मार से पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों बुरी तरह बिलबिला उठे हैं। इसी बौखलाहट के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के सामने गिड़गिड़ाने का रास्ता चुना है। वैश्विक मंच पर एक बार फिर पुराना और घिसा-पिटा कश्मीर राग अलापते हुए मुनीर ने भारत के खिलाफ जहर उगला है। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहा है, लेकिन दुनिया अब उनके इन पुराने बयानों पर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अपनी ताकत को और ज्यादा मजबूत करने में जुटे हैं। हाल ही में उन्होंने देश के कई कोर कमांडरों के बड़े पैमाने पर तबादले किए हैं, जिससे सेना के भीतर भी असंतोष सुलग रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि थ्री-स्टार जनरल रिटायरमेंट के बाद भी किस तरह सेना के अहम पदों पर काबिज रहते हैं, यह पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। इसके अलावा, पाकिस्तानी संसद और सरकार से भी ऊपर खुद को स्थापित करने की मुनीर की कोशिशों को लेकर अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है।
सऊदी अरब के फैसलों और घरेलू राजनीति का दबाव
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों लगातार विदेशी दौरों पर हैं, जिससे सेना प्रमुख के करीबी सहयोगियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मुनीर के करीबी माने जाने वाले लोग बिना सीधे नाम लिए पीएम शहबाज के इन दौरों पर तंज कस रहे हैं। सऊदी अरब के साथ आर्थिक समझौतों और वहां से मिलने वाली मदद के मोर्चे पर भी पाकिस्तानी सेना अपनी सीधी दखल चाहती है। यही वजह है कि देश के भीतर राजनीतिक खींचतान अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है और जनता इस आपसी कलह से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है।
पाकिस्तान की अवाम महंगाई, बेरोजगारी और बिजली संकट से जूझ रही है, लेकिन वहां की हुकूमत का पूरा ध्यान सिर्फ भारत विरोध और अपनी फौज की ताकत बढ़ाने पर केंद्रित है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि मुनीर खुद को देश के सर्वेसर्वा के रूप में पेश करने की फिराक में हैं। संसद को दरकिनार करके लिए जा रहे फैसलों ने पाकिस्तान को एक बार फिर गहरे संवैधानिक संकट में धकेल दिया है। आम नागरिकों का मानना है कि देश की बदहाली के लिए वहां की फौज की नीतियां ही सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की कूटनीतिक और दो टूक प्रतिक्रिया
भारत ने हमेशा से आतंकवाद और द्विपक्षीय मुद्दों पर पाकिस्तान के प्रोपोगंडा का कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में जब भी पाकिस्तान के हुक्मरान कश्मीर का बेबुनियाद राग अलापते हैं, भारतीय प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें हर बार करारा और तथ्यात्मक जवाब मिलता है। इस बार भी आसिम मुनीर की गुहार का वैश्विक मंच पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। दुनिया के तमाम बड़े देश अब यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ बन चुका है और वहां की सेना ही देश की असली बर्बादी की जड़ है।
हमारे रिपोर्टर द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, भारतीय कूटनीति के आगे पाकिस्तान के सभी पैंतरे फेल साबित हो रहे हैं। चाहे वो यूएन के गलियारे हों या सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक बैठकें, पाकिस्तान हर जगह अलग-थलग पड़ता जा रहा है। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पर पूरी मुस्तैदी बरती हुई है ताकि पाकिस्तान की किसी भी नापाक हरकत का तुरंत और मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
आगे की रणनीति और कड़े सुरक्षा इंतजाम
भारतीय सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना प्रमुख द्वारा उठाए जा रहे ऐसे कदम केवल उनकी लाचारी को दर्शाते हैं। आने वाले दिनों में भारत अपनी सीमाओं पर और अधिक चौकस रहने वाला है ताकि पड़ोसी देश की हर साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके। कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाए हुए है ताकि आतंकवाद को पालने वाले चेहरों बेनकाब किया जा सके।
द फ्रीलान्स की इस जमीनी पड़ताल से साफ है कि पाकिस्तान चाहे जितने भी हथकंडे अपना ले, उसकी गिरती हुई अर्थव्यवस्था और सेना की तानाशाही उसे कभी उबरने नहीं देगी। संयुक्त राष्ट्र में गिड़गिड़ाने से सच्चाई छुप नहीं सकती और भारत की मजबूत स्थिति के आगे पाकिस्तान के मंसूबे हमेशा की तरह इस बार भी पूरी तरह पानी में मिल जाएंगे।






