नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। सिटिजन्स फार पीस एंड जस्टिस संस्था ने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। संगठन ने तीखे शब्दों में पूछा है कि क्या भाजपा देश के अंदर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा करना चाहती है। इस बयान के सामने आने के बाद से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। सभी दलों की तरफ से इस पर अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कुछ हालिया राजनीतिक घटनाक्रम बताए जा रहे हैं। संस्था ने साफ तौर पर कहा है कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सीजेपी के तेवर को देखकर यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में सड़क से लेकर संसद तक घमासान देखने को मिलेगा। संगठन ने ऐलान किया है कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
दस अक्टूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ होगा जोरदार प्रदर्शन
इस तीखे हमले के साथ ही संस्था ने बड़े आंदोलन की रूपरेखा भी सबके सामने रख दी है। सीजेपी ने घोषणा की है कि वे आगामी दस अक्टूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी के खिलाफ कड़ा प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और सत्ताधारी दल के इशारों पर फैसले ले रहा है। देश भर के विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
संगठन के नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते चुनाव आयोग ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो यह आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन ने भी इस संभावित प्रदर्शन को देखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। खुफिया एजेंसियां भी इस बात पर कड़ी नजर रख रही हैं कि इस विरोध प्रदर्शन में कौन कौन से संगठन और चेहरे शामिल होने जा रहे हैं।
प्रधान के इस्तीफे की मांग और स्थानीय राजनीति का नया एंगल
इस राष्ट्रीय स्तर के बड़े विवाद के बीच स्थानीय स्तर पर भी कई तरह की राजनीतिक मांगें उठनी शुरू हो गई हैं। हाल ही में एक अन्य घटनाक्रम में हिंदू क्रांति दल ने बदनौर को लेकर एक बड़ी मांग सामने रखी है। संगठन ने मांग की है कि बदनौर क्षेत्र को पंस यानी पंचायत समिति बनाया जाए ताकि वहां विकास कार्यों में तेजी आ सके। इन दोनों अलग अलग घटनाओं ने देश के राजनीतिक पटल पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
एक तरफ जहां देश की बड़ी संस्थाएं और मानवाधिकार संगठन सीधे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर संगठन अपनी क्षेत्रीय मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इन तीखे सवालों और विरोध प्रदर्शनों का क्या जवाब देती है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और हर एक अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाती रहेगी।







