देश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची (Voter List) की शुचिता पर सवाल उठाने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। तेलंगाना और कर्नाटक राज्यों में कुछ बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। इन एजेंटों पर वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम सुनियोजित तरीके से हटाने के लिए फर्जी 'फॉर्म-7' (Form-7) का इस्तेमाल करने का आरोप है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया है।
हैदराबाद से लेकर बेंगलुरु तक फैला फर्जीवाड़े का जाल
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन में चुनाव अधिकारियों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि एक राजनीतिक दल के बीएलए द्वारा कथित तौर पर फर्जी फॉर्म-7 जमा कर एक मुस्लिम परिवार के करीब 30 मतदाताओं के नाम सूची से हटवाने की कोशिश की गई। इन फॉर्म्स में पहले से ही जानकारियां भरी हुई थीं, जिससे अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने इसकी गहराई से जांच शुरू कर दी।
इसी तरह का मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र से भी सामने आया है। यहां एक स्थानीय नेता की शिकायत पर पुलिस ने बीएलए के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर के जरिए 136 फॉर्म-7 जमा करने का मामला दर्ज किया। जांच में यह भी सामने आया कि कर्नाटक के बेल्लारी शहर में हजारों की संख्या में नाम हटाने के लिए गलत जानकारियां मुहैया कराई गईं, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी के कार्यालय की तलाशी के आदेश भी जारी किए हैं।
चुनाव आयोग और पुलिस की सख्त कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन फॉर्म्स को ऑनलाइन जमा करने के लिए जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया, उनके तार पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से जुड़े हुए हैं। इस खुलासे के बाद निर्वाचन आयोग और स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी मामलों की तकनीकी और मैदानी स्तर पर बारीकी से जांच की जा रही है, और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस खबर में दी गई जानकारी आधिकारिक शिकायतों, पुलिस एफआईआर और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। 'The Freelance' सभी पक्षों के दावों की निष्पक्षता और तथ्यात्मक सटीकता के प्रति प्रतिबद्ध है। मामले में आगे की जांच और आधिकारिक अपडेट आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।







