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देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

हिमालय के टॉयलेट में बनते थे बम, लाहौर से भगत सिंह को पति बनाकर कलकत्ता लाई थीं 'मर्दानी' दुर्गा भाभी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दुर्गा भाभी का नाम अमर है। उन्होंने लाहौर से भगत सिंह को कलकत्ता सुरक्षित पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी और अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•33
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हिमालय के टॉयलेट में बनते थे बम, लाहौर से भगत सिंह को पति बनाकर कलकत्ता लाई थीं 'मर्दानी' दुर्गा भाभी
📷 हिमालय के टॉयलेट में बनते थे बम, लाहौर से भगत सिंह को पति बनाकर कलकत्ता लाई थीं 'मर्दानी' दुर्गा भाभी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दुर्गा भाभी का नाम अमर है। उन्होंने लाहौर से भगत सिंह को कलकत्ता सुरक्षित पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी और अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पन्नों में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। इन्हीं महान और निडर क्रांतिकारियों में एक नाम दुर्गावती देवी का भी है, जिन्हें इतिहास 'दुर्गा भाभी' के नाम से जानता है। अंग्रेजों के दिलों में खौफ पैदा करने वाली इस महिला क्रांतिकारी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। वह न सिर्फ बम बनाने के काम में माहिर थीं, बल्कि अंग्रेजों को चकमा देने की उनकी रणनीति इतनी सटीक थी कि बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी भी हैरान रह जाते थे।

लाहौर में ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स की हत्या के बाद अंग्रेजों ने भगत सिंह और उनके साथियों की तलाश तेज कर दी थी। चारों तरफ पुलिस का पहरा था और लाहौर से बाहर निकलना नामुमकिन सा लग रहा था। ऐसे खतरनाक समय में दुर्गा भाभी ने आगे आकर एक ऐसा साहसी कदम उठाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने भगत सिंह को अपना पति बनाया और उनके साथ एक छोटे बच्चे को लेकर ट्रेन में सवार हो गईं। कलकत्ता जाने वाली उस ट्रेन में अंग्रेजों की पैनी नजरों से बचकर निकलना मौत को गले लगाने जैसा था, लेकिन दुर्गा भाभी के अदम्य साहस ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया।

हिमालय की वादियों में छिपा था बम बनाने का गुप्त ठिकाना

दुर्गा भाभी का क्रांतिकारी सफर सिर्फ सफरियों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सीधे तौर पर हथियारों और बम निर्माण की गतिविधियों से जुड़ी हुई थीं। इतिहास के दस्तावेजों के मुताबिक, उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों यानी हिमालयी क्षेत्र के कुछ गुप्त ठिकानों पर उनके और अन्य साथियों के जरिए बम तैयार किए जाते थे। इन गुप्त 'हिमालयन टॉयलेट्स' और सुनसान जगहों पर बारूद और बम बनाने का सामान जुटाया जाता था। अंग्रेजी हुकूमत को भनक तक नहीं लगी कि जिन पहाड़ियों को वे शांत और आम मानते हैं, वहीं देश की आजादी के लिए बारूद तैयार हो रहा है।

क्रांतिकारी गतिविधियों के दौरान दुर्गा भाभी ने हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व किया। भगवती चरण बोहरा की पत्नी होने के नाते उनका घर क्रांतिकारियों का मुख्य अड्डा हुआ करता था। चंद्रशेखर आजाद से लेकर भगत सिंह तक, सभी उनकी कार्यकुशलता और देशभक्ति का सम्मान करते थे। जब उनके पति भगवती चरण बोहरा बम के परीक्षण के दौरान शहीद हो गए, तब भी दुर्गा भाभी ने अपना हौसला नहीं खोया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुखों को दरकिनार करते हुए देश की आजादी के आंदोलन को ही अपना एकमात्र मकसद बना लिया और चुपचाप संगठन के लिए काम करती रहीं।

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अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुली बगावत और मर्दानी तेवर

ब्रिटिश पुलिस दुर्गा भाभी के नाम से इस कदर डरती थी कि वे उन्हें पकड़ने के लिए हरसंभव कोशिश करते थे। उनके 'मर्दानी' तेवर और फैसलों की गति इतनी तेज होती थी कि खुफिया तंत्र भी फेल हो जाता था। वह पुरुषों की पोशाक पहनने से लेकर आम औरत का भेस बदलने में माहिर थीं। कलकत्ता पहुंचने के बाद उन्होंने भूमिगत रहकर क्रांतिकारियों के लिए धन जुटाने और हथियार सप्लाई करने का काम जारी रखा। अंग्रेज अधिकारी उन्हें अपनी गिरफ्त में लेने के लिए लगातार छापेमारी करते रहे, लेकिन वे हमेशा पुलिस की पकड़ से कोसों दूर रहीं।

आजादी मिलने के बाद भी दुर्गा भाभी ने लाइमलाइट से दूर रहकर एक साधारण जीवन बिताना पसंद किया। उन्होंने गाजियाबाद में एक स्कूल की शुरुआत की जहां गरीब बच्चों को शिक्षा दी जाती थी। अपने जीवन के अंतिम दिनों तक उन्होंने किसी से कोई बड़ी मदद नहीं मांगी और गुमनामी की जिंदगी जीती रहीं। आज जब भी देश के महान क्रांतिकारियों को याद किया जाता है, तो दुर्गा भाभी का नाम बिना झुके और बिना डरे देश के प्रति समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल के रूप में लिया जाता है। उनकी यह कहानी आज भी हर भारतीय को देशप्रेम की प्रेरणा देती है।

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