नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों और कंपनियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईपीएफओ ने सितंबर महीने का ईसीआर यानी इलेक्ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख को 16 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद अब कंपनियों और नियोक्ताओं के पास अपना पीएफ डेटा और रिटर्न जमा करने के लिए थोड़ा अधिक वक्त मिल गया है। बीते कुछ दिनों से देश भर के उद्योग जगत और विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि समयसीमा को बढ़ाया जाए।
बाजार में हाल ही में लागू हुई नई वेज सीलिंग और उससे जुड़े तकनीकी बदलावों के कारण कंपनियों को पीएफ कैलकुलेशन करने में काफी कागजी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन सभी व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ के उच्च अधिकारियों ने यह अहम फैसला लिया है। पहले सितंबर के ईसीआर को जमा करने की अंतिम तारीख महीने के मध्य में तय की गई थी, जिससे कंपनियों पर समय पर रिटर्न फाइल करने का भारी दबाव बना हुआ था। समय पर रिटर्न न भर पाने की स्थिति में नियोक्ताओं को भारी-भरकम जुर्माने और पेनल्टी का डर सता रहा था, जो अब इस मोहलत मिलने के बाद काफी हद तक कम हो गया है।
कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी था यह फैसला
भारत के श्रम कानूनों और पीएफ नियमों के तहत हर महीने की एक निश्चित तारीख तक कंपनियों को अपने कर्मचारियों के वेतन से काटा गया हिस्सा और कंपनी का योगदान पोर्टल पर अपलोड करना होता है। लेकिन इस बार सितंबर के महीने में वेतन सीमा यानी वेज सीलिंग से जुड़े नए नियमों के कारण सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। कई छोटी और मध्यमवर्गीय कंपनियों के सॉफ्टवेयर और एचआर सिस्टम इस नए बदलाव के हिसाब से पूरी तरह अपडेट नहीं हो पाए थे। ऐसे में यदि समयसीमा नहीं बढ़ाई जाती तो हजारों कंपनियों को अनजाने में ही भारी आर्थिक जुर्माने और नोटिस का सामना करना पड़ सकता था।
ईपीएफओ के इस ताजा आदेश से उन तमाम नियोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों से अपना डेटा समय पर पोर्टल पर लॉक नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से यह रिपोर्ट भी आ रही थी कि कई पोर्टल सर्वर पर भारी ट्रैफिक के कारण रिटर्न अपलोड करने में तकनीकी बाधाएं आ रही थीं। इन जमीनी दिक्कतों को देखते हुए फील्ड से जुड़े अधिकारियों ने भी केंद्रीय कार्यालय को रिपोर्ट भेजी थी, जिसके आधार पर इस डेडलाइन विस्तार का फैसला लिया गया है। अब कंपनियां बिना किसी हड़बड़ाहट के अपने सभी कर्मचारियों के खातों का मिलान कर सकती हैं और सही आंकड़े समय पर जमा कर सकती हैं।
वेतन सीमा और पेंशन योजनाओं पर पड़ रहा है सीधा असर
हाल के दिनों में ईपीएफओ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए वेज सीलिंग बढ़ाने की चर्चाएं भी जोर पकड़े हुए हैं। वेतन सीमा बढ़ने से पीएफ और पेंशन के गणित में बड़ा बदलाव आया है, जिसका सीधा असर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर पड़ रहा है। कई ऐसे कर्मचारी जो पहले पीएफ और पेंशन योजना के दायरे से बाहर हो गए थे, वे अब इस नई व्यवस्था के तहत दोबारा सुरक्षित दायरे में आ रहे हैं। इस प्रशासनिक बदलाव की वजह से एचआर विभागों और वेतन प्रबंधकों पर काम का बोझ अचानक काफी ज्यादा बढ़ गया था।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब देश के कुछ बड़े औद्योगिक महानगरों के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और पीएफ कंसलटेंट्स से बात की, तो उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया। जानकारों का कहना है कि यदि यह मोहलत नहीं मिलती तो छोटे कारोबारियों के लिए इस महीने का हिसाबकिताब रखना बहुत मुश्किल हो जाता। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बढ़ाई गई इस नई समयसीमा के भीतर ही सभी कंपनियों को अपना ईसीआर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, और इसके बाद किसी भी स्थिति में आगे और मोहलत मिलने की संभावना बेहद कम है।
कर्मचारियों के खातों में कब तक पहुंचेगा पैसा और क्या रखें सावधानी
डेडलाइन बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनेEmployer से यह सुनिश्चित करें कि उनका पीएफ समय पर कट रहा है या नहीं। कई बार कंपनियां डेडलाइन मिलने पर काम टाल देती हैं, जिससे अंत में फिर से सर्वर डाउन होने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए सभी नियोक्ताओं को चाहिए कि वे अंतिम दिनों का इंतजार किए बिना समय से पहले ही अपना ईसीआर फाइल कर दें। कर्मचारियों के यूएएन यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर पर पैसा समय से अपडेट होने पर उन्हें लोन लेने या एडवांस निकालने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि ईपीएफओ का यह कदम जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर उठाया गया एक व्यावहारिक कदम है। इससे न सिर्फ कंपनियों को प्रशासनिक काम पूरा करने का पूरा मौका मिला है, बल्कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस नई व्यवस्था के बाद पीएफ कलेक्शन के आंकड़ों में कोई बड़ा उछाल देखने को मिलता है या नहीं। हमारी टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और आगे भी आपको इससे जुड़े सभी अपडेट्स सबसे पहले पहुंचाती रहेगी।




