नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में कई बार ऐसे पल आते हैं जो किसी फिल्मी कहानी जैसे लगते हैं। ऐसा ही एक वाकया हाल ही में सामने आया जब एक पूर्व सांसद अपने पोते के साथ शहर के एक शांत पार्क में टहल रहे थे। तभी उनकी जेब में रखा फोन घनघनाने लगा। फोन पर देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसा बुलावा था जिसकी उन्होंने उस वक्त बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी। फोन पर साफ शब्दों में कहा गया कि आपको नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है और फाइल पर अंतिम मुहर लग चुकी है।
शुरुआत में पूर्व सांसद को लगा कि शायद कोई उनके साथ मजाक कर रहा है। लेकिन फोन पर दूसरी तरफ बैठे शख्स की आवाज और औपचारिकता ने साफ कर दिया कि यह कोई हंसी-मजाक नहीं बल्कि देश के शीर्ष स्तर से आया एक गंभीर आदेश है। उन्होंने तुरंत अपने पोते का हाथ थामा और पार्क की बेंच पर बैठकर कुछ पलों के लिए इस बड़ी खबर को अपने भीतर आत्मसात करने की कोशिश की। उनके राजनीतिक सफर की यह सबसे बड़ी छलांग थी, जो बिना किसी पैरवी या दबाव के अचानक उनके दरवाजे पर दस्तक दे रही थी।
सादे जीवन से राजभवन तक का सफर
राजनीति के गलियारों में अक्सर टिकट और मंत्रालयों के लिए महीनों तक जोड़-तोड़ और पैरवी चलती है। लेकिन इस पूर्व सांसद का पूरा जीवन हमेशा से सादगी और चुपचाप काम करने के लिए जाना जाता रहा है। जब उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली थी और अपना अधिकांश समय परिवार तथा अपने गृह क्षेत्र के सामाजिक कामों में बिता रहे थे, तब यह फोन कॉल आया। पार्क में टहलते हुए मिले इस सरप्राइज कॉल ने यह साबित कर दिया कि कई बार ईमानदारी और निष्ठा का फल अप्रत्याशित तरीके से मिलता है।
फोन कटने के कुछ ही मिनटों के भीतर उनके पास देश के गृह मंत्रालय और अन्य बड़े कार्यालयों से आधिकारिक पुष्टि के लिए फोन आने लगे। परिवार के सदस्यों को जब यह बात पता चली तो घर में खुशी का माहौल बन गया। पोता जो कुछ देर पहले तक पार्क में दादा के साथ खेल रहा था, अचानक इस बात से अनजान था कि उसके दादा अब देश के एक बड़े राज्य के संवैधानिक प्रमुख बनने जा रहे हैं। स्थानीय समर्थकों को जब यह खबर मिली तो वे भी उनके आवास पर बधाई देने के लिए जुटने लगे।
दिल्ली से आए इस फैसले के सियासी मायने
इस अचानक हुई नियुक्ति के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसके कई तरह के मायने निकाल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार अब ऐसे चेहरों को आगे ला रही है जिनका साफ-सुथरा राजनीतिक इतिहास रहा है और जो विवादों से दूर रहे हैं। पूर्व सांसद का लंबा विधायी अनुभव और प्रशासनिक समझ इस नए संवैधानिक पद पर उनके काम आएगी। पार्टी आलाकमान ने जमीनी स्तर से जुड़े एक शांत स्वभाव के नेता को चुनकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वफादार और मेहनती कार्यकर्ताओं को कभी भी भुलाया नहीं जाता।
आगामी शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां अब तेजी से शुरू हो चुकी हैं। पूर्व सांसद को जल्द ही दिल्ली आकर औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। पार्क की हरी घास पर टहलते हुए शुरू हुआ वह साधारण सा दिन अब उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक दिन बन चुका है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि राजनीति में सरप्राइज अब भी जिंदा हैं और सही समय पर सही काम करने वालों को उनकी मेहनत का इनाम जरूर मिलता है।







