नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों यानी हाईकोर्ट में इन दिनों कई बड़े और कड़े फैसले आ रहे हैं। पिछले कुछ घंटों के दौरान न्यायपालिका के इन कदमों ने आम लोगों और कानूनी जानकारों दोनों का ही ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और केरल तक अदालतों की कार्यवाही में कुछ ऐसे नए मोड़ आए हैं जो सीधे तौर पर समाज और नियमों को प्रभावित करते हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने देश के इन तमाम बड़े न्यायिक घटनाक्रमों की जमीनी पड़ताल की है ताकि पाठकों तक पूरी और सटीक जानकारी पहुंचाई जा सके।
सबसे पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की। अदालत ने एक ऐसे वकील पर पचहत्तर हजार रुपये का भारी जुर्माना लगा दिया है जो निजी विश्वविद्यालयों के नियमों और उनके कामकाज पर सवाल उठा रहे थे। अदालत का मानना था कि इस तरह की याचिकाएं बिना पुख्ता आधार के दायर की जाती हैं जिससे अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है। इस कड़े कदम से वकीलों और याचिकाकर्ताओं के बीच यह संदेश साफ चला गया है कि बिना ठोस दस्तावेजों के जनहित या नियम-कायदों को चुनौती देना भारी पड़ सकता है।
सार्वजनिक जगहों से हटेंगे राजनीतिक झंडे
एक अन्य बड़े मामले में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उस आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है जिसमें सार्वजनिक जगहों पर राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा लगाए गए पक्के झंडे के खंभे हटाने की बात कही गई थी। कोर्ट का यह साफ निर्देश है कि सरकारी जमीनों या चौराहों पर राजनीतिक प्रचार के लिए पक्के ढांचे खड़े नहीं किए जा सकते। इस फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द शहर की सड़कों और पार्कों को ऐसे अवैध कब्जों से पूरी तरह मुक्त कराए।
दूसरी तरफ दक्षिण भारत से एक और अहम कानूनी खबर सामने आई है। केरल की अदालत में चर्चित जि हत्या मामले को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में अदालत ने साफ कर दिया है कि अब इस केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को नहीं सौंपी जाएगी। अदालत के इस फैसले से साफ हो गया है कि मौजूदा जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर ही अदालत को भरोसा है और आगे की कानूनी प्रक्रिया राज्य के दायरे में ही पूरी की जाएगी। इस आदेश के बाद पीड़ित पक्ष और स्थानीय स्तर पर इस पर लंबी बहस छिड़ गई है।
मुंबई मेट्रो के रात के काम को मंजूरी
महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई से भी एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शहर की बहुप्रतीक्षित मुंबई मेट्रो-तीन परियोजना के तहत रात के समय निर्माण कार्य करने की अनुमति दे दी है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दों के कारण रात के काम पर रोक लगाने की मांग की जा रही थी। लेकिन अदालत ने विकास कार्यों की जरूरत और तय समयसीमा को ध्यान में रखते हुए रात में मेट्रो का काम जारी रखने की हरी झंडी दे दी है। इससे इस बड़े प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने की उम्मीद फिर से जग गई है।
इन तमाम फैसलों से यह साफ झलकता है कि देश की अदालतें एक तरफ जहां अनुशासनहीन याचिकाओं पर सख्ती दिखा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को भी व्यावहारिक तरीके से देख रही हैं। सार्वजनिक जगहों के सौंदर्यीकरण और राजनीतिक कब्जों को हटाने के आदेश से शहरों की सूरत बदलने की उम्मीद है। वहीं मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स को मिली रात की राहत से काम में तेजी आएगी। द फ्रीलान्स इन सभी मामलों पर आगे भी अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर छोटे-बड़े अपडेट से आपको अवगत कराता रहेगा।








