नई दिल्ली और रियाद — मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यमन के उग्रवादी संगठन हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को सीधे तौर पर निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में रियाद एयरपोर्ट पर हुए भीषण मिसाइल हमले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस हमले के समय रियाद एयरपोर्ट की बोर्डिंग लाइन में बड़ी संख्या में हज यात्री खड़े थे। अचानक आसमान में मिसाइल फटने और तेज धमाकों से वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और एयरपोर्ट परिसर में भारी भगदड़ मच गई।
इस खौफनाक हमले की चपेट में आकर कई लोगों के हताहत होने की खबर है। शुरुआती आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस जानलेवा हमले में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई है। सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना की पुष्टि कर दी है। भारतीय दूतावास ने तुरंत कड़े कदम उठाते हुए वहां रह रहे सभी भारतीयों के लिए एक नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने लोगों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही बाहर निकलें और पूरी सावधानी बरतें। इस हमले से सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद मिसाइल एयरपोर्ट तक कैसे पहुंच गई।
सऊदी अरब और यमन की जंग में हूती विद्रोहियों की रणनीति
हूती विद्रोहियों ने पिछले कुछ दिनों में अपने हमलों को बहुत तेज कर दिया है। ताजा हमलों में यमन के करीब 58 सैनिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है। वहीं सऊदी अरब के अंदर कई अलग-अलग जगहों पर मिसाइल और ड्रोन गिरने से भीषण आग लग गई है। जानकारों का कहना है कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को एक लंबी और उलझाने वाली सैन्य जंग में फंसा दिया है। इस जंग में सऊदी अरब के क्षेत्रीय सहयोगियों ने भी कई मौकों पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में भी सऊदी अरब को उस तरह की सीधी सैन्य मदद नहीं मिल पाई जैसी रियाद सरकार उम्मीद कर रही थी।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के बीच शुरुआती रणनीतिक तालमेल में भी कुछ मतभेद सामने आए। जानकारों के अनुसार यूएई ने कुछ सैन्य फैसलों से दूरी बना ली क्योंकि उसे लगा कि यह लड़ाई लंबी खिंचती जा रही है। इसका फायदा उठाकर हूती विद्रोही लगातार अपनी ताकत बढ़ाते गए। पिछले कुछ सालों में इन विद्रोहियों ने अपनी सैन्य क्षमता को काफी मजबूत कर लिया है। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि हूती लड़ाकों ने आने वाले कई सालों के लिए भारी मात्रा में गोला-बारूद और मिसाइलें जमा करके रख ली हैं। उनकी इस बढ़ती ताकत ने अब केवल खाड़ी देशों बल्कि पड़ोसी देशों की सरकारों की नींद भी उड़ा दी है।
क्या इस्लामाबाद तक पहुंच सकती है हूतियों की मिसाइल?
अब अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल बहुत तेजी से उठ रहा है कि क्या हूती विद्रोहियों की मारक क्षमता इतनी अधिक हो चुकी है कि उनकी मिसाइलें दूरदराज के देशों तक पहुंच सकें। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन विद्रोहियों के पास लंबी दूरी के ऐसे हथियार आ चुके हैं जो खाड़ी देशों के भूगोल से बाहर भी प्रहार करने में सक्षम हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन मध्य पूर्व के बदलते हालातों ने पूरी दुनिया के रक्षा विश्लेषकों को सतर्क कर दिया है। हथियारों का यह बढ़ता जखीरा इस बात का साफ संकेत है कि यह क्षेत्रीय संघर्ष अभी बहुत जल्दी थमने वाला नहीं है।
मैदान पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा बल हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं। रियाद एयरपोर्ट पर हुए इस हमले के बाद विमानन सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदले गए हैं या उन्हें कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। भारत सरकार और दूतावास लगातार सऊदी अरब प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि वहां फंसे या प्रभावित हुए अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स आप तक पहुंचाती रहेगी।










