जल जीवन मिशन घोटाला और पूर्व मंत्री की रिहाई का पूरा घटनाक्रम
राजस्थान की राजनीति में भूचाल लाने वाले बहुचर्चित जल जीवन मिशन यानी जेजेएम घोटाले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत से नियमित जमानत मंजूर होने के बाद वह आखिरकार पांच महीने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जेल से बाहर आ गए हैं। जेल की सलाखों से बाहर कदम रखते ही उन्होंने मीडिया के सामने बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर गंभीर सवालिया निशान खड़े किए। उनके समर्थकों ने जेल के बाहर उनका स्वागत किया, जिसके बाद उन्होंने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी।
शीर्ष अदालत में जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी दलीलें सुनने के बाद गत दिनों अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद अदालत ने तमाम पहलुओं पर विचार करते हुए उन्हें जमानत देने का आदेश दिया। एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने इस साल 7 मई को उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह लगातार न्यायिक हिरासत में थे। इस रिहाई के साथ ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इस बड़े घोटाले की गूंज सुनाई देने लगी है।
हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का किया था रुख
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और सरकारी खजाने को हुए भारी नुकसान का हवाला देते हुए महेश जोशी सहित कई अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद पूर्व मंत्री के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उनके वकीलों ने शीर्ष अदालत में दलील दी थी कि उनके मु मुवक्किल को इस मामले में अनावश्यक रूप से फंसाया गया है और उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों के पास पुख्ता सबूतों का अभाव है।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत उन्हें पहले गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट से ही जमानत मिली थी। हालांकि, एसीबी द्वारा दोबारा गिरफ्तार किए जाने के कारण उनकी मुश्किलें फिर बढ़ गई थीं। अब जाकर उन्हें इस मामले में भी शीर्ष अदालत से न्याय मिला है, जिससे उनके वकीलों और समर्थकों ने राहत की सांस ली है।
खुद को बताया बेकसूर, कहा- सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं
জেল से बाहर आते ही महेश जोशी ने मीडिया से बातचीत में एक बार फिर दोहराया कि वह शुरू दिन से ही खुद को निर्दोष मानते आए हैं और कानून की अदालत में उनका यह पक्ष साबित होकर रहेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक और राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उन्हें निशाना बनाया गया है, लेकिन उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज वह भरोसा सही साबित हुआ है।
उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा,
"मैंने पहले भी कहा था और आज भी पूरी दृढ़ता से कह रहा हूं कि मैं पूरी तरह निर्दोष हूं। सत्य कुछ समय के लिए परेशान जरूर हो सकता है, लेकिन वह कभी पराजित नहीं हो सकता। मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और अंततः सच्चाई की ही जीत होगी।" — महेश जोशी, पूर्व जलदाय मंत्री, राजस्थान
उन्होंने यह भी कहा कि वह फिलहाल मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से कुछ नहीं कहेंगे, क्योंकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और वह न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं।
राजस्थान सरकार से जल जीवन मिशन पर श्वेतपत्र लाने की जोरदार मांग
अपनी रिहाई के तुरंत बाद पूर्व मंत्री ने मौजूदा राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जल जीवन मिशन के कामकाज पर श्वेतपत्र यानी व्हाइट पेपर जारी करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत धरातल पर वास्तव में कितना काम हुआ है, कितनी शिकायतें मिली हैं और किस स्तर पर किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जोशी के अनुसार, अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इस योजना का क्रियान्वयन किस प्रकार हुआ, इसकी पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक पूर्वाग्रह के चलते चुनिंदा लोगों को निशाना बनाना और गिरफ्तार करने की संस्कृति सही नहीं है। जनता को सच पता चलना चाहिए कि ठेकेदारों और आम नागरिकों को इस पूरी प्रक्रिया में किस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा है और असली जिम्मेदार कौन लोग हैं।
जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और दोहरी जांच पर खड़े किए गंभीर सवाल
पूर्व मंत्री ने अपनी बातचीत के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिना पुख्ता तथ्यों के लोगों को गिरफ्तार करने की परंपरा चल पड़ी है, वह स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि कई ऐसे चेहरे थे जिन्हें उन्होंने पहली बार जेल के भीतर ही देखा था।
उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एक ही प्रकरण की जांच अलग-अलग केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियों द्वारा अलग-अलग एंगल से की जा रही है। उनके मुताबिक, इस दोहरी जांच व्यवस्था और कानूनी पेचीदगियों के कारण ईमानदार और जिम्मेदार लोगों को भी बेवजह प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में जब अदालत में सारे दस्तावेज रखे जाएंगे, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।












