नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — संसद भवन के पास राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के बड़े नेताओं ने एक विशेष लंच मीटिंग के बाद सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में तय किया गया कि विपक्ष अब चुप नहीं बैठेगा। बैठक खत्म होने के तुरंत बाद सभी विपक्षी सांसद सीधे जंतर-मंतर के लिए रवाना हो गए।
मुख्य विपक्षी दलों का यह गुस्सा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। इसी नाराजगी को जताने के लिए आज संसद से लेकर सड़क तक प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे खुद इस मार्च की अगुवाई कर रहे हैं और सभी विपक्षी दलों के सांसद उनके साथ सड़क पर उतर आए हैं।
लंच डिप्लोमेसी के बाद जंतर-मंतर पर हल्ला बोल
खरगे के घर पर हुई इस लंच मीटिंग में विपक्षी एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश की गई। बैठक में मौजूद नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक हालात और आगामी रणनीतियों पर खुलकर चर्चा की। लंच खत्म होते ही राहुल गांधी ने मीडिया के सामने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दर्ज हर एक मुकदमा उनके लिए किसी मेडल से कम नहीं है। राहुल ने दावा किया कि उन्हें दबाने की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं।
विपक्षी सांसदों का यह जत्था जब जंतर-मंतर की तरफ बढ़ा तो सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम देखे गए। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके में बैरिकेडिंग कर रखी है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। हालांकि विपक्षी नेता अपनी जिद पर अड़े हैं और उनका कहना है कि वे निर्वाचन आयोग के रवैये के खिलाफ वहां बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा कई अन्य क्षेत्रीय दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्ष के गंभीर सवाल
विपक्षी गठबंधन का मुख्य मुद्दा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना है। नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है और विपक्ष की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जंतर-मंतर पर हो रहे इस धरने को आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का ट्रेलर माना जा रहा है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह सरकार को घेरने की यह रणनीति आगे भी जारी रहेगी।
जमीन पर स्थिति यह है कि जंतर-मंतर पर भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों का जमावड़ा लग चुका है। विपक्षी नेताओं के भाषणों का दौर शुरू हो चुका है और वे लगातार सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। आम जनता भी इस राजनीतिक ड्रामे को बड़ी उत्सुकता से देख रही है क्योंकि इससे आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा तय होनी है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
संसदीय राजनीति और सड़क की जंग का नया अध्याय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की यह लंच डिप्लोमेसी और सड़क पर उतरने की रणनीति जनता के बीच संदेश भेजने के लिए है। एक तरफ जहां संसद की कार्यवाही बाधित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर धरना देकर विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी बहस छेड़ना चाहता है। खरगे और राहुल गांधी की अगुवाई में यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और ज्यादा तीखा होने वाला है।
सुरक्षा एजेंसियों ने जंतर-मंतर के आसपास यातायात डायवर्ट कर दिया है ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच किसी भी टकराव से निपटने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। द फ्रीलान्स के ग्राउंड रिपोर्टर्स पल-पल की अपडेट जुटा रहे हैं और यह साफ है कि यह मुद्दा अभी और तूल पकड़ेगा।




